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PM केयर और राहत कोष पर PMO के निर्देश

  • 11 Feb 2026
  • 68 min read

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस  

चर्चा में क्यों? 

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने लोकसभा सचिवालय को सूचित किया कि प्रधानमंत्री नागरिक सहायता एवं आपातकालीन स्थिति राहत कोष (PM CARES Fund), प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) तथा राष्ट्रीय रक्षा कोष (NDF) से संबंधित प्रश्न लोकसभा में अस्वीकार्य हैं।

  • प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने तर्क दिया कि ये निधियाँ स्वैच्छिक सार्वजनिक योगदान के माध्यम से वित्तपोषित हैं, जिनका भारत की संचित निधि से कोई संबंध नहीं है, जिससे ये भारत सरकार के प्रत्यक्ष सरोकार से बाहर हो जाती हैं। अपनी इस स्थिति के समर्थन में PMO ने लोकसभा की प्रक्रिया तथा कार्य-संचालन नियमों के नियम 41(2)(viii) और नियम 41(2)(xvii) का उल्लेख किया।

नोट: लोकसभा की प्रक्रिया और कार्य-संचालन नियमों के नियम 41, संसद सदस्यों को उन मंत्रियों से प्रश्न पूछने की अनुमति देता है जो उनके विशेष संज्ञान में सार्वजनिक महत्त्व के मामलों पर जानकारी प्राप्त करने से संबंधित हों।

  • नियम 41(2)(viii): प्रश्न उन मामलों से संबंधित नहीं होने चाहिये, जो मुख्य रूप से भारत सरकार के प्रत्यक्ष सरोकार से बाहर हों।
  • नियम 41(2)(xvii): प्रश्न उन निकायों से संबंधित नहीं होने चाहिये जो मुख्य रूप से भारत सरकार के प्रति उत्तरदायी नहीं हों।

संसदीय परिप्रेक्ष्य में ‘प्रश्न’ क्या हैं?

  • परिचय: “प्रश्न” सरकार को उत्तरदायी ठहराने का एक सशक्त संसदीय उपकरण है। यह एक निहित संसदीय अधिकार है, जिसके माध्यम से सदस्य प्रशासन, शासकीय गतिविधियों तथा नीतिगत निर्णयों से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
    • सामान्यतः लोकसभा की बैठक का प्रथम घंटा प्रश्नों के लियेये निर्धारित होता है, जिसे प्रश्नकाल कहा जाता है।

प्रश्नों के प्रकार:

प्रकार

विवरण

प्रमुख विशेषताएँ

तारांकित प्रश्न

ऐसा प्रश्न जिसका उत्तर सदस्य सदन में मौखिक रूप से प्राप्त करना चाहता है।

तारांकन (*) से चिह्नित। इसके बाद अनुपूरक प्रश्न पूछने की अनुमति होती है।

अतारांकित प्रश्न

ऐसा प्रश्न जिसके लिये लिखित उत्तर अपेक्षित होता है।

सदन की मेज़ पर रखा हुआ माना जाता है। इस पर कोई अनुपूरक प्रश्न नहीं पूछा जा सकता।

अल्प सूचना प्रश्न

इस प्रकार के प्रश्नों के अंतर्गत सार्वजनिक महत्त्व और अत्यावश्यक प्रकृति के मामलों पर विचार किया जाता है।

सदस्य द्वारा मौखिक उत्तर के लिये सामान्य न्यूनतम अवधि से कम, अर्थात 10 दिनों से कम नोटिस पर पूछा जा सकने वाला प्रश्न।

निजी सदस्यों द्वारा पूछा जाने वाला प्रश्न:

किसी ऐसे सदस्य को संबोधित, जो मंत्री नहीं है।

विषय-वस्तु उसी विधेयक या प्रस्ताव से संबंधित होना चाहिये, जिसके लिये वह विशिष्ट सदस्य उत्तरदायी हो।

  • प्रश्नों की स्वीकृति: सदस्य द्वारा प्रस्तुत प्रत्येक प्रश्न स्वीकार नहीं किया जाता। लोकसभा अध्यक्ष को प्रश्नों की स्वीकृति पर अंतिम अधिकार प्राप्त है। यह निर्णय कार्य-संचालन एवं व्यवहार नियमावली के नियम 41 से 44, अध्यक्ष द्वारा जारी निर्देश 10A, पूर्व उदाहरणों, पीठ के निर्णयों तथा स्थापित संसदीय परंपराओं के आधार पर लिया जाता है।
    • स्वीकृति की शर्तें: किसी प्रश्न को स्वीकार किये जाने के लिये उसे कुछ कठोर मानदंडों को पूरा करना होता है, जिनमें शामिल हैं:
      • सार्वजनिक महत्त्व: प्रश्न उस विषय से संबंधित होना चाहिये, जो मंत्री के विशेष क्षेत्राधिकार में सार्वजनिक महत्त्व का हो।
      • व्यंग्य या मानहानि नहीं: इसमें तर्क, व्यंग्यात्मक अभिव्यक्तियाँ या मानहानिकारक बयान नहीं हो सकते।
      • पुनरावृत्ति नहीं: पहले से उत्तर दिये जा चुके प्रश्नों को दोहराना नहीं चाहिये।
      • गोपनीय मामले नहीं: यह सचिवालय की गोपनीय बैठकों या राष्ट्रपति को दी गई सलाह से संबंधित जानकारी नहीं मांग सकता।
      • न्यायालयीन विवाद नहीं: यह उन मामलों के बारे में प्रश्न नहीं कर सकता, जो वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन हैं।
    • अस्वीकृत किये जाने के कारण (निर्देश 10A): किसी प्रश्न को निम्नलिखित परिस्थितियों में अस्वीकार किया जा सकता है:
      • ऐसा प्रश्न जो राष्ट्रीय एकता को प्रभावित करने वाली विभाजनकारी प्रवृत्तियों को बढ़ावा देता हो।
      • जो केवल दिन-प्रतिदिन के प्रशासन या व्यक्तिगत हितों से संबंधित हो।
      • जो अन्य निकायों के क्षेत्राधिकार में आता हो, जैसे– मुख्य निर्वाचन आयुक्त या न्यायालय।

क्या कोई सरकारी संस्था पूर्वसंज्ञा के आधार पर प्रश्नों को अवरुद्ध कर सकती है?

संसदीय विशेषज्ञों के अनुसार, PMO का समग्र निर्देश प्रक्रिया की दृष्टि से अत्यंत असामान्य है।

  • प्रति-प्रकरण आधार: स्वीकृति के निर्णय पारंपरिक रूप से प्रत्येक प्रश्न की विशिष्टता और गुणों के आधार पर लिये जाते हैं, न कि किसी पूरे विषय (जैसे– किसी विशेष कोष) को पूर्वसंज्ञा के आधार पर प्रतिबंधित करके।
  • मानक प्रक्रिया: सामान्यतः, यदि कोई मंत्रालय किसी विशेष प्रश्न को समस्याजनक पाता है (जैसे– राष्ट्रीय सुरक्षा के कारण), तो वह सचिवालय से केवल उस विशेष प्रश्न को अस्वीकृत करने का अनुरोध करता है, न कि किसी पूरे विषय के खिलाफ सामान्य निर्देश जारी करता है।
  • आलोचना: आलोचक यह तर्क देते हैं कि PMO की इस स्थिति से संसदीय निरीक्षण और पारदर्शिता कमज़ोर होती है, यह लोकसभा के कार्य-संचालन में कार्यपालिका का हस्तक्षेप माना जा सकता है, और प्रधानमंत्री तथा सार्वजनिक दान से जुड़े कोषों के लिये सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने में संसद की भूमिका कमज़ोर होती है।

पीएम-केयर्स फंड, PMNRF और NDF क्या हैं?

पीएम-केयर्स फंड

  • परिचय: यह एक सार्वजनिक चैरिटेबल ट्रस्ट है। इसे विशेष रूप से राष्ट्रीय आपदाओं, जैसे कि कोविड-19 महामारी, से निपटने के लिये धन जुटाने और प्रभावित लोगों को राहत प्रदान करने हेतु स्थापित किया गया था।
  • वित्तपोषण: यह पूरी तरह से जनता के स्वैच्छिक योगदानों से निर्मित है और इसे भारत के संयुक्त कोष से कोई बजटीय सहायता नहीं मिलती।
  • पारदर्शिता की स्थिति: सरकार का मानना है कि यह सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के तहत सार्वजनिक प्राधिकारी नहीं है। इसके RTI अधिनियम के तहत दर्जे को चुनौती दी गई है और यह वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है।

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF)

  • परिचय: इसकी स्थापना वर्ष 1948 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा की गई थी। इसका प्रारंभिक उद्देश्य भारत विभाजन के दौरान पाकिस्तान से आए विस्थापित लोगों (शरणार्थियों) की सहायता करना था।
  • वर्तमान में इसके संसाधनों का उपयोग मुख्यतः प्राकृतिक आपदाओं (जैसे- बाढ़, चक्रवात, भूकंप), बड़े हादसों और दंगों में मृतकों के परिवारों को तात्कालिक सहायता प्रदान करने के लिये किया जाता है।
  • वित्तपोषण: PM CARES की तरह यह केवल स्वैच्छिक सार्वजनिक योगदान स्वीकार करता है।
  • पारदर्शिता की स्थिति: सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत इसकी स्थिति विवादित है और वर्तमान में मामला न्यायालय में विचाराधीन है।

राष्ट्रीय रक्षा कोष (NDF)

  • परिचय: इस कोष का उपयोग विशेष रूप से सशस्त्र बलों (थलसेना, नौसेना, वायुसेना) के सदस्यों और उनके आश्रितों के कल्याण हेतु किया जाता है (अर्द्धसैनिक बलों को भी प्रायः इसमें शामिल किया जाता है)।
  • प्रशासन: इसका प्रशासन एक कार्यकारी समिति द्वारा किया जाता है, जिसमें प्रधानमंत्री अध्यक्ष होते हैं।
  • वित्तपोषण: यह जनता से प्राप्त स्वैच्छिक योगदान पर निर्भर करता है।
  • पारदर्शिता की स्थिति: राष्ट्रीय रक्षा कोष सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत आता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. लोकसभा में प्रश्नकाल क्या होता है?
प्रश्नकाल लोकसभा की बैठक का पहला घंटा होता है, जिसके दौरान सदस्य सरकार से जानकारी प्राप्त करने और उसे जवाबदेह ठहराने के लिये प्रश्न पूछते हैं।

2. संसद में प्रश्नों के मुख्य प्रकार कौन-से हैं?
संसदीय प्रश्नों में शामिल हैं- तारांकित प्रश्न (मौखिक उत्तर), अतारांकित प्रश्न (लिखित उत्तर), अल्प सूचना प्रश्न (तत्काल महत्त्व के विषय), निजी सदस्यों से संबंधित प्रश्न।

3. लोकसभा में प्रश्नों की ग्राह्यता कौन तय करता है?
लोकसभा अध्यक्ष नियम 41-44, निर्देश 10A, पूर्व दृष्टांतों तथा संसदीय परंपराओं के आधार पर प्रश्नों की ग्राह्यता तय करते हैं।

4. किसी प्रश्न के स्वीकार किये जाने की मुख्य शर्तें क्या हैं?
किसी प्रश्न का सार्वजनिक महत्त्व से संबंधित होना, किसी मंत्री के कार्यक्षेत्र में आना, स्पष्ट और संक्षिप्त होना तथा न्यायालय में लंबित मामलों, गोपनीय सूचनाओं या मानहानिकारक विषयों से मुक्त होना आवश्यक है।

5. निर्देश 10A के अंतर्गत किन आधारों पर प्रश्न अस्वीकार किया जा सकता है?
यदि कोई प्रश्न राष्ट्रीय एकता को प्रभावित करता हो, दैनिक प्रशासन से जुड़ा हो या संवैधानिक प्राधिकरणों अथवा न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र में आता हो, तो उसे अस्वीकार किया जा सकता है।

6. क्या PM CARES और PMNRF RTI अधिनियम के अंतर्गत आते हैं?
RTI अधिनियम के अंतर्गत उनकी स्थिति विवादित है और वर्तमान में मामला न्यायालय में विचाराधीन है, जबकि सरकार का मत है कि वे सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं हैं।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)

प्रिलिम्स 

प्रश्न. भारत की संसद् किसके/ किनके द्वारा मंत्रिपरिषद के कृत्यों के ऊपर नियंत्रण रखती है? (2017)

  1. स्थगन प्रस्ताव
  2. प्रश्न काल
  3. अनुपूरक प्रश्न

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) 1,2 और 3

उत्तर: (d)

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