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यंत्र इंडिया लिमिटेड को मिनीरत्न का दर्जा

  • 05 Feb 2026
  • 33 min read

स्रोत: पीआईबी 

हाल ही में रक्षा मंत्री ने यंत्र इंडिया लिमिटेड को मिनीरत्न श्रेणी-I का दर्जा प्रदान किया। यह निर्णय कंपनी के चार वर्षों के भीतर एक लाभप्रद रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (DPSU) के रूप में तीव्र रूपांतरण को मान्यता देते हुए लिया गया।

  • परिचय: यंत्र इंडिया लिमिटेड उन सात नए रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSU) में से एक है, जिनका गठन 1 अक्तूबर, 2021 को तत्कालीन आयुध निर्माणी बोर्ड (OFB) के निगमीकरण के उपरांत किया गया था। यह रक्षा उत्पादन विभाग के अंतर्गत कार्य करता है।
  • प्रमुख उत्पाद: यह कंपनी कार्बन फाइबर कंपोज़िट, ग्लास कंपोज़िट, एल्यूमिनियम अलॉय तथा असेंबली उत्पादों का निर्माण करती है, जिनका उपयोग मीडियम एवं लार्ज कैलिबर के गोला-बारूद, बख्तरबंद वाहनों, तोपखानों तथा मुख्य युद्धक टैंकों में होता है; इससे कंपनी रक्षा उत्पादन के महत्त्वपूर्ण खंडों में स्थापित होती है।
  • महत्त्व: यह दर्जा यंत्र इंडिया लिमिटेड (YIL) के बोर्ड को नवीन परियोजनाओं, आधुनिकीकरण और उपकरणों की खरीद के लिये सरकारी पूर्व-अनुमोदन के बिना ₹500 करोड़ तक का पूंजीगत व्यय करने हेतु सशक्त बनाता है। इससे तीव्र निर्णय लेने और विस्तार में होने वाले विलंब को कम करने में सहायता मिलेगी।
  • नीति का एकीकरण: यह स्वीकृति स्वदेशीकरण को प्रोत्साहन, आयात पर निर्भरता में कमी, रक्षा निर्यात में वृद्धि, उद्योग की व्यापक भागीदारी तथा भारत के वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में उभार को समर्थन देकर आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को सुदृढ़ करती है।

श्रेणी

लॉन्च

मानदंड

उदाहरण

महारत्न

महानवरत्न योजना को मई 2010 में CPSE के लिये शुरू किया गया था, ताकि प्रमुख CPSE को अपने संचालन का विस्तार करने और वैश्विक दिग्गज के रूप में उभरने के लिये सशक्त बनाया जा सके।

  • नवरत्न का दर्जा प्राप्त होना चाहिये।
  • भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के नियमानुसार सार्वजनिक शेयरधारिता के साथ भारतीय स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होना चाहिये।
  • पिछले 3 वर्षों में औसत वार्षिक टर्नओवर ₹25,000 करोड़ से अधिक
  • पिछले 3 वर्षों में औसत नेटवर्थ ₹15,000 करोड़ से अधिक
  • पिछले 3 वर्षों में कर कटौती के बाद औसत वार्षिक शुद्ध लाभ ₹5,000 करोड़ से अधिक
  • अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महत्त्वपूर्ण उपस्थिति होनी चाहिये।
  • भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड
  • भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड
  • कोल इंडिया लिमिटेड
  • गेल (इंडिया) लिमिटेड आदि।

नवरत्न

नवरत्न योजना को वर्ष 1997 में शुरू किया गया था, ताकि ऐसे CPSE की पहचान की जा सके जिन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में तुलनात्मक लाभ प्राप्त है, और उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्द्धी बनने के प्रयास में समर्थन प्रदान किया जा सके।

मिनीरत्न श्रेणी-I तथा अनुसूची ‘A’ की वे कंपनियाँ जिन्हें पिछले 5 वर्षों में समझौता ज्ञापन प्रणाली के तहत ‘उत्कृष्ट’ या ‘अत्यंत उत्तम’ रेटिंग प्राप्त हुई हो और जो नीचे दिये गए 6 में से कम-से-कम कुछ प्रदर्शन मानकों में कुल 60 या उससे अधिक स्कोर प्राप्त करती हों:

1. नेट प्रॉफिट टू नेटवर्थ

2. मानव संसाधन लागत का कुल लागत से अनुपात

3. मूल्यह्रास, ब्याज एवं कर पूर्व लाभ का पूंजी से अनुपात

4. ब्याज एवं कर पूर्व लाभ का टर्नओवर से अनुपात

5. प्रति शेयर आय

6. अंतर-क्षेत्रीय प्रदर्शन

  • भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड
  • हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड आदि।

मिनीरत्न

मिनीरत्न योजना को वर्ष 1997 में इस नीतिगत उद्देश्य के तहत शुरू किया गया था कि सार्वजनिक क्षेत्र को अधिक दक्ष और प्रतिस्पर्द्धी बनाया जा सके तथा लाभ कमाने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को अधिक स्वायत्तता और अधिकारों का विकेंद्रीकरण प्रदान किया जा सके।

  • मिनीरत्न श्रेणी-I: वे CPSE जिन्होंने लगातार पिछले तीन वर्षों में लाभ अर्जित किया हो, जिनमें से कम-से-कम एक वर्ष में प्री-टैक्स लाभ ₹30 करोड़ से अधिक हो और नेटवर्थ सकारात्मक हो।
  • मिनीरत्न श्रेणी-II: वे CPSE जिन्होंने पिछले तीन वर्षों में लगातार लाभ अर्जित किया हो और नेटवर्थ सकारात्मक हो।
  • मिनीरत्न CPSE ने किसी भी सरकारी ऋण/ब्याज भुगतान में चूक नहीं की हो।
  • मिनीरत्न CPSE को सरकारी सहायता पर निर्भर नहीं रहना चाहिये।
  • श्रेणी-I: एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया, एंट्रिक्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड आदि।
  • श्रेणी-II: आर्टिफिशियल लिंब्स  मैन्युफैक्चरिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, भारत पंप्स एवं कंप्रेसर्स लिमिटेड आदि।

और पढ़ें: 3 DPSU को मिनीरत्न का दर्जा

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