रैपिड फायर
यंत्र इंडिया लिमिटेड को मिनीरत्न का दर्जा
- 05 Feb 2026
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हाल ही में रक्षा मंत्री ने यंत्र इंडिया लिमिटेड को मिनीरत्न श्रेणी-I का दर्जा प्रदान किया। यह निर्णय कंपनी के चार वर्षों के भीतर एक लाभप्रद रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (DPSU) के रूप में तीव्र रूपांतरण को मान्यता देते हुए लिया गया।
- परिचय: यंत्र इंडिया लिमिटेड उन सात नए रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSU) में से एक है, जिनका गठन 1 अक्तूबर, 2021 को तत्कालीन आयुध निर्माणी बोर्ड (OFB) के निगमीकरण के उपरांत किया गया था। यह रक्षा उत्पादन विभाग के अंतर्गत कार्य करता है।
- प्रमुख उत्पाद: यह कंपनी कार्बन फाइबर कंपोज़िट, ग्लास कंपोज़िट, एल्यूमिनियम अलॉय तथा असेंबली उत्पादों का निर्माण करती है, जिनका उपयोग मीडियम एवं लार्ज कैलिबर के गोला-बारूद, बख्तरबंद वाहनों, तोपखानों तथा मुख्य युद्धक टैंकों में होता है; इससे कंपनी रक्षा उत्पादन के महत्त्वपूर्ण खंडों में स्थापित होती है।
- महत्त्व: यह दर्जा यंत्र इंडिया लिमिटेड (YIL) के बोर्ड को नवीन परियोजनाओं, आधुनिकीकरण और उपकरणों की खरीद के लिये सरकारी पूर्व-अनुमोदन के बिना ₹500 करोड़ तक का पूंजीगत व्यय करने हेतु सशक्त बनाता है। इससे तीव्र निर्णय लेने और विस्तार में होने वाले विलंब को कम करने में सहायता मिलेगी।
- नीति का एकीकरण: यह स्वीकृति स्वदेशीकरण को प्रोत्साहन, आयात पर निर्भरता में कमी, रक्षा निर्यात में वृद्धि, उद्योग की व्यापक भागीदारी तथा भारत के वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में उभार को समर्थन देकर आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को सुदृढ़ करती है।
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श्रेणी |
लॉन्च |
मानदंड |
उदाहरण |
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महारत्न |
महानवरत्न योजना को मई 2010 में CPSE के लिये शुरू किया गया था, ताकि प्रमुख CPSE को अपने संचालन का विस्तार करने और वैश्विक दिग्गज के रूप में उभरने के लिये सशक्त बनाया जा सके। |
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नवरत्न |
नवरत्न योजना को वर्ष 1997 में शुरू किया गया था, ताकि ऐसे CPSE की पहचान की जा सके जिन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में तुलनात्मक लाभ प्राप्त है, और उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्द्धी बनने के प्रयास में समर्थन प्रदान किया जा सके। |
मिनीरत्न श्रेणी-I तथा अनुसूची ‘A’ की वे कंपनियाँ जिन्हें पिछले 5 वर्षों में समझौता ज्ञापन प्रणाली के तहत ‘उत्कृष्ट’ या ‘अत्यंत उत्तम’ रेटिंग प्राप्त हुई हो और जो नीचे दिये गए 6 में से कम-से-कम कुछ प्रदर्शन मानकों में कुल 60 या उससे अधिक स्कोर प्राप्त करती हों: 1. नेट प्रॉफिट टू नेटवर्थ 2. मानव संसाधन लागत का कुल लागत से अनुपात 3. मूल्यह्रास, ब्याज एवं कर पूर्व लाभ का पूंजी से अनुपात 4. ब्याज एवं कर पूर्व लाभ का टर्नओवर से अनुपात 5. प्रति शेयर आय 6. अंतर-क्षेत्रीय प्रदर्शन |
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मिनीरत्न |
मिनीरत्न योजना को वर्ष 1997 में इस नीतिगत उद्देश्य के तहत शुरू किया गया था कि सार्वजनिक क्षेत्र को अधिक दक्ष और प्रतिस्पर्द्धी बनाया जा सके तथा लाभ कमाने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को अधिक स्वायत्तता और अधिकारों का विकेंद्रीकरण प्रदान किया जा सके। |
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