प्रारंभिक परीक्षा
DRDO द्वारा SFDR टेक्नोलॉजी का सफल प्रदर्शन
- 05 Feb 2026
- 51 min read
चर्चा में क्यों?
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) चांदीपुर, ओडिशा से सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (SFDR) तकनीक का सफल उड़ान परीक्षण (फ्लाइट डिमॉन्स्ट्रेशन) संपन्न किया है।
- इस सफल परीक्षण के साथ ही भारत उन विशिष्ट राष्ट्रों के समूह में सम्मिलित हो गया है, जिनके पास SFDR तकनीक उपलब्ध है। यह तकनीक लंबी दूरी की हवा-से-हवा में मार करने वाली मिसाइलों के विकास के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (SFDR) टेक्नोलॉजी क्या है?
- SFDR (सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट): यह एक अत्याधुनिक मिसाइल प्रणोदन प्रौद्योगिकी है। पारंपरिक रॉकेटों के विपरीत, जो ईंधन तथा ऑक्सीडाइज़र दोनों ले जाते हैं, SFDR एक “एयर-ब्रीदिंग” इंजन है। यह ठोस ईंधन के दहन हेतु वायुमंडलीय ऑक्सीजन का उपयोग करता है, जिससे दीर्घकालिक सुपरसोनिक स्पीड तथा विस्तारित मारक-क्षमता प्राप्त होती है।
- SFDR की कार्यप्रणाली:
- नोज़ल-रहित बूस्टर: यह घटक मिसाइल को मात्र तीन सेकंड में सुपरसोनिक वेग तक त्वरित करता है, जो रैमजेट के संचालन के लिये आवश्यक पूर्वापेक्षा है।
- डक्टेड रैमजेट सस्टेनर: आवश्यक गति प्राप्त होने के पश्चात बोरॉन-आधारित ठोस ईंधन प्रज्वलित होता है। यह दहन के लिये वायुमंडल से ऑक्सीजन ग्रहण करता है, जिससे ऑक्सीडाइज़र वहन करने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है तथा इसके भार में बचत के साथ 50 से 200 सेकंड तक संचालित उड़ान संभव होती है।
- हॉट गैस वॉल्व: कार्बन-कार्बन कंपोज़िट तथा टंगस्टन-कॉपर मिश्रधातुओं से विकसित यह वॉल्व ऊँचाई एवं गति के अनुसार दहन गैसों का विनियमन करता है।
- चीक-माउंटेड एयर इंटेक्स: ये उड़ान के दौरान प्रवेश करने वाली वायु का प्रभावी संपीडन करते हैं, जिससे सतत दहन सुनिश्चित होता है।
- मुख्य प्रदर्शन संकेतक:
- ऊँचाई की लचीलापन क्षमता: यह मिसाइल समुद्र तल से लेकर 20 किमी. की ऊँचाई तक प्रभावी रूप से संचालित हो सकती है।
- उच्च गतिशीलता: यह 10 किमी. तक के ऊर्ध्वाधर युद्धाभ्यास करने में सक्षम है।
- सटीक लक्ष्य निर्धारण: उच्च सटीकता सुनिश्चित करने के लिये इसमें रेडियो-फ्रीक्वेंसी सीकर, इनर्शियल नेविगेशन और जैम-प्रतिरोधी डेटा लिंक एकीकृत किये गए हैं।
- निरंतर सुपरसोनिक गति: सामान्य ठोस-ईंधन रॉकेटों के विपरीत, जो जल्दी ईंधन समाप्त कर लेते हैं, SFDR अधिक समय तक मैक 2 से मैक 3.8 की गति बनाए रखने में सक्षम होते हैं।
- विस्तारित मारक क्षमता: यह लड़ाकू विमानों को दृश्य सीमा से कहीं आगे स्थित लक्ष्यों को भेदने में सक्षम बनाता है, जिसकी परिचालन सीमा 50 किमी. से 340 किमी. के बीच है।
- घातक प्रभावशीलता: इसे उच्च गति वाले हवाई लक्ष्यों पर अधिकतम नुकसान पहुँचाने के लिये प्रॉक्सिमिटी फ्यूज़ से लैस विखंडन (फ्रैगमेंटेशन) वारहेड के साथ तैयार किया गया है।
- महत्त्व:
- विस्तृत नो‑एस्केप ज़ोन: अंतिम चरण तक गति और ऊर्जा बनाए रखने के कारण यह एक बड़ा “नो‑एस्केप ज़ोन” बनाता है, जिससे शत्रु विमानों के लिये बच निकलना मुश्किल हो जाता है।
- परिचालन बहुमुखी प्रतिभा: यह तकनीक हवा-से-हवा और सतह‑से‑हवा दोनों प्रकार की मिसाइल प्रणालियों में अपनाई जा सकती है, जिससे व्यापक वायु रक्षा क्षमताएँ और अधिक सुदृढ़ होती हैं।
- रणनीतिक बढ़त: यह तकनीक भारत की आगामी अस्त्र Mk‑3 का आधार है, जो एक सीमा से परे हवा-से-हवा में मार करने वाली मिसाइल (BVRAAM) है और जिसे यूरोपीय मीटिओर मिसाइल तथा चीनी PL‑15 के समकक्ष प्रतिस्पर्द्धी के रूप में विकसित किया जा रहा है।
- सामरिक बढ़त: यह भारतीय वायु सेना (IAF) को “फर्स्ट लुक, फर्स्ट किल” की क्षमता प्रदान करती है, जिससे वह सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए शत्रुओं को निशाना बना सकती है।
रैमजेट, SFDR और स्क्रैमजेट प्रौद्योगिकियाँ
|
विशेषता |
रैमजेट |
SFDR (सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट) |
स्क्रैमजेट (अतिध्वनिक दहन रैमजेट) |
|
दहन की अवस्था |
अवध्वनिक (इंजन के भीतर वायु की गति धीमी हो जाती है) |
अवध्वनिक (इंजन के भीतर वायु की गति धीमी हो जाती है) |
अतिध्वनिक (इंजन के भीतर वायु अत्यधिक तीव्र गति से प्रवाहित होती है) |
|
ईंधन का प्रकार |
द्रव ईंधन (प्रायः) |
ठोस ईंधन (बोरॉन-आधारित) |
द्रव हाइड्रोजन |
|
ऑक्सीडाइज़र |
वायुमंडलीय ऑक्सीजन |
वायुमंडलीय ऑक्सीजन |
वायुमंडलीय ऑक्सीजन |
|
मुख्य उपयोग |
क्रूज़ मिसाइलें (जैसे- ब्रह्मोस) |
हवा-से-हवा मार करने वाली मिसाइलें (जैसे- अस्त्र Mk-3) |
अतिध्वनिक वाहन (जैसे- हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डेमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल- HSTDV) |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (SFDR) टेक्नोलॉजी क्या है?
SFDR एक वायु-श्वासी (एयर-ब्रीदिंग) मिसाइल प्रणोदन प्रणाली है, जो ठोस ईंधन दहन हेतु वायुमंडलीय ऑक्सीजन का उपयोग करती है। इससे निरंतर अधिध्वनिक गति तथा अधिक दूरी तक मारक क्षमता संभव होती है।
2. भारत के लिये SFDR टेक्नोलॉजी क्यों महत्त्वपूर्ण है?
यह दीर्घ-मारक हवा-से-हवा मिसाइलों के विकास में सहायक है, ‘नो-एस्केप ज़ोन’ को बढ़ाती है तथा भारत को उन्नत मिसाइल-टेक्नोलॉजी वाले चयनित देशों की श्रेणी में स्थापित करती है।
3. SFDR पारंपरिक सॉलिड रॉकेट मोटरों से किस प्रकार भिन्न है?
जहाँ पारंपरिक रॉकेट शीघ्र ही अपना ईंधन जला लेते हैं, वहीं SFDR वायुमंडलीय ऑक्सीजन का उपयोग कर ईंधन का सतत दहन करता है, जिससे दीर्घ समय तक स्थायी प्रणोदन प्राप्त होता है।
4. कौन-सी आगामी मिसाइल प्रणाली SFDR टेक्नोलॉजी का उपयोग करेगी?
SFDR भारत में विकसित की जा रही ‘अस्त्र Mk-3’ दृश्य-सीमा से परे हवा-से-हवा में मार करने वाली मिसाइल (BVRAAM) का प्रमुख आधार है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2023)
- बैलिस्टिक मिसाइल अपनी पूरी उड़ान में अवध्वनिक चाल पर प्रधार-नोदित होती हैं, जबकि क्रूज़ मिसाइल केवल उड़ान के आरंभिक चरण में रॉकेट संचालित होती हैं।
- अग्नि-V मध्यम दूरी की पराध्वनिक क्रूज़ मिसाइल है, जबकि ब्रह्मोस ठोस ईंधन चालित अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (d)
प्रश्न. अग्नि-IV मिसाइल के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (2014)
- यह सतह-से-सतह पर मार करने वाली मिसाइल है।
- यह केवल तरल प्रणोदक द्वारा संचालित होती है।
- यह लगभग 7500 किमी. दूरी तक एक टन परमाणु आयुध पहुँचाने में सक्षम है।
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (a)