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जापान ने भारतीय निवेश हेतु एक विशेष केंद्र स्थापित किया

  • 01 Apr 2026
  • 13 min read

स्रोत: इकॉनोमिक टाइम्स 

जापान भारतीय बाज़ार में विस्तार कर रही जापानी कंपनियों के लिये प्रक्रियाओं को सरल बनाने और आवश्यक सहयोग प्रदान करने हेतु एक विशेष केंद्र स्थापित कर रहा है।

  • संस्थागत सहयोग: नया केंद्र एक सहायक (फैसिलिटेटर) के रूप में कार्य करेगा, जो कंपनियों को भारत की जटिल कर प्रणाली, राज्य-स्तरीय विनियमों तथा विधिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कथित कमी से निपटने में सहायता प्रदान करेगा।
    • यह पहल आगामी दशक के लिये अगस्त 2025 में नई दिल्ली और टोक्यो द्वारा निर्धारित 10 ट्रिलियन येन (62.6 अरब अमेरिकी डॉलर) के निजी क्षेत्र निवेश लक्ष्य को समर्थन प्रदान करती है।
  • लक्षित क्षेत्र: पारंपरिक विनिर्माण से आगे बढ़ते हुए, फोकस अब उच्च प्रौद्योगिकी और रणनीतिक क्षेत्रों जैसे- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), स्टार्टअप्स और महत्त्वपूर्ण खनिज पर भी केंद्रित किया जाएगा।
  • तुलनात्मक स्थिति: मज़बूत राजनीतिक संबंधों के बावजूद वर्ष 2024 में भारत में केवल 1,434 जापानी कंपनियाँ सक्रिय थीं, जो थाईलैंड (लगभग 6,000) और सिंगा
  • पुर (लगभग 4,500) के मुकाबले काफी कम संख्या है।
  • प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की स्थिति: वर्तमान में जापान भारत में FDI का पाँचवा सबसे बड़ा स्रोत है, जिसका कुल निवेश 2000 से दिसंबर 2024 के बीच 43.2 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच चुका है। यह निवेश मुख्य रूप से ऑटोमोबाइल और दूरसंचार क्षेत्रों में हुआ है।
  • रणनीतिक सामंजस्य: साझा लोकतांत्रिक मूल्यों तथा क्वाड (चतुर्भुज सुरक्षा संवाद) के प्रति समान प्रतिबद्धता इस साझेदारी को और सुदृढ़ बनाती है, जिससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की भूमिका एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार के रूप में उभरती है।

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