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जन औषधि दिवस 2026

  • 09 Mar 2026
  • 40 min read

स्रोत: पी.आई.बी.

चर्चा में क्यों?

जन औषधि दिवस 2026 (7 मार्च) पर, जिसका विषय था "जनऔषधि सस्ती भी, भरोसेमंद भी, सेहत की बात, बचत के साथ", प्रधानमंत्री ने लाखों लोगों के लिये दवा की लागत कम करने में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (PMBJP) की भूमिका को उजागर किया।

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना क्या है?

  • परिचय: PMBJP रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अंतर्गत औषध विभाग द्वारा संचालित एक प्रमुख योजना है। इसका उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाओं और शल्य चिकित्सा सामग्री को सभी के लिये, विशेषकर आर्थिक रूप से वंचित लोगों के लिये, किफायती (50-80% कम लागत पर) बनाना है, ताकि स्वास्थ्य देखभाल पर होने वाले जेब
    • यह योजना मूलतः वर्ष 2008 में जन औषधि योजना के रूप में शुरू हुई थी और वर्ष 2016 में इसका नाम परिवर्तन कर इसे PMBJP कर दिया गया और इसमें विस्तार किया गया।खर्च में उल्लेखनीय कमी लाई जा सके।
  • उत्पाद पोर्टफोलियो: इस योजना में उत्पादों की एक विस्तृत शृंखला है, जिसके अंतर्गत 29 चिकित्सीय श्रेणियों (कैंसर रोधी, हृदय रोग संबंधी और मधुमेह रोधी दवाओं सहित) में लगभग 2,110 दवाएँ और 315 शल्य चिकित्सा संबंधी वस्तुएँ/उपभोग्य वस्तुएँ प्रदान की जाती हैं।
  • गुणवत्ता आश्वासन: दवाओं का प्रापण केवल विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज (GMP) प्रमाणित निर्माताओं से ही किया जाता है और राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (NABL) द्वारा मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में इनका परीक्षण किया जाता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि किफायती कीमत के लिये गुणवत्ता से समझौता न हो।
  • नागरिक-केंद्रित पहलें:
    • जन औषधि सुविधा सैनिटरी नैपकिन: वर्ष 2019 में शुरू की गई इस पहल के अंतर्गत ओक्सो-बायोडिग्रेडेबल नैपकिन मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा दिये जाने के उद्देश्य से प्रति पैड 1 रुपये की अत्यधिक रियायती दर पर बेचे जाते हैं।
    • जन औषधि सुगम ऐप: वर्ष 2019 में लॉन्च किया गया यह डिजिटल टूल केंद्रों का जियो-लोकेशन, दवाओं की उपलब्धता और ब्रांडेड विकल्पों की तुलना में बचत दिखाने की सुविधा प्रदान करता है।
  • समावेशी उद्यमिता मॉडल: यह योजना फ्रेंचाइज़ी आधारित मॉडल पर आधारित है। इसमें विशेष समूहों जैसे महिलाएँ, SC/ST, दिव्यांगजन और पूर्व सैनिकों को उद्यमिता के लिये प्रोत्साहित करने हेतु 2 लाख रुपये (फर्नीचर, फिक्स्चर और कंप्यूटर उपकरण हेतु) तक की एकमुश्त प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।
  • रणनीतिक विस्तार और एकीकरण:
    • लक्ष्य: ग्रामीण, दूरस्थ और अल्प सुविधा प्राप्त क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, केंद्रों की संख्या को वर्ष 2026 की शुरुआत तक 18,000 से बढ़ाकर मार्च 2027 तक 25,000 करना।
    • नवोन्मेषी स्थान: अंतिम वर्ग तक पहुँच को बेहतर बनाने के लिये उपयुक्त और रणनीतिक स्थानों पर केंद्र स्थापित किये जा रहे हैं , जिनमें रेलवे स्टेशनों पर 116 केंद्र (जनवरी 2026 तक) और सरकारी अस्पताल परिसर के भीतर स्थित केंद्र शामिल हैं।
    • सहकारी भागीदारी: प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) का पूर्णतम उपयोग कर केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, जो दूरस्थ वर्ग तक पहुँचने के लिये अपने विशाल ग्रामीण नेटवर्क और बुनियादी ढाँचे का उपयोग कर रही हैं।
  • आर्थिक प्रभाव: जून 2025 तक, इस योजना के परिणामस्वरूप ब्रांडेड विकल्पों की तुलना में नागरिकों को लगभग 38,000 करोड़ रुपये की अनुमानित बचत हुई है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs):

1. प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (PMBJP) का उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य जन औषधि केंद्रों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएँ और शल्य चिकित्सा सामग्री 50-90% कम कीमतों पर उपलब्ध कराना है, जिससे स्वास्थ्य देखभाल पर होने वाला जेब खर्च कम हो सके।

2. PMBJP योजना का संचालन किस मंत्रालय द्वारा किया जाता है?
इसका कार्यान्वयन रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधीन औषध विभाग द्वारा, भारतीय औषधि एवं चिकित्सा उपकरण ब्यूरो (PMBI) के माध्यम से किया जाता है।

3. PMBJP के अंतर्गत जेनेरिक दवाओं की गुणवत्ता कैसे सुनिश्चित की जाती है?
दवाओं को WHO-GMP प्रमाणित निर्माताओं से प्राप्त किया जाता है और वितरण से पहले NABL-मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में उनका परीक्षण किया जाता है।

4. जन औषधि सुविधा सेनेटरी नैपकिन पहल क्या है?
वर्ष 2019 में शुरू की गई यह पहल के अंतर्गत 1 रुपये प्रति पैड की दर से ऑक्सो-बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराई जाती है, जिससे किफायती मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा मिलता है।

5. PMBJP के तहत जन औषधि केंद्रों के विस्तार का लक्ष्य क्या है?
सरकार का लक्ष्य विशेष रूप से ग्रामीण और अल्प सुविधा प्राप्त क्षेत्रों में वर्ष 2026 में मौजूद 18,000 से अधिक केंद्रों की संख्या को मार्च 2027 तक बढ़ाकर 25,000 करना है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQs)

प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2023)

कथन- I: भारत की सार्वजनिक क्षेत्रक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली सीमित निरोधक, वर्द्धक और पुनःस्थापक देखभाल के साथ मुख्यतः रोगनाशक व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित करती है।

कथन- II: भारत के स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करने के विकेंद्रीकृत उपागम के अंतर्गत, राज्य प्राथमिक रूप से स्वास्थ्य सेवाओं को जुटाने के लिये उत्तरदायी हैं।

उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

(a) कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं और कथन-II, कथन-I की सही व्याख्या है।

(b) कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं, किंतु कथन-II, कथन-I की सही व्याख्या नहीं है।

(c) कथन-I सही है किंतु कथन-II गलत है।

(d) कथन-I गलत है किंतु कथन-II सही है।

उत्तर: (b)

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