दृष्टि के NCERT कोर्स के साथ करें UPSC की तैयारी और जानें
ध्यान दें:

डेली अपडेट्स



रैपिड फायर

अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय

  • 21 Feb 2026
  • 33 min read

स्रोत: द हिंदू

पूर्व फिलीपींस के राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते को अपनी मादक पदार्थ विरोधी नीति से जुड़े कथित मानवता के विरुद्ध अपराधों के आरोपों में अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय में पूर्व-ट्रायल सुनवाई का सामना करना पड़ेगा। माना जाता है कि इस अभियान में मारे गए लोगों की संख्या हज़ारों तक पहुँची।

अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय

  • परिचय: अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय विश्व का प्रथम स्थायी अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय है, जिसकी स्थापना अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गंभीरतम अपराधों के लिये व्यक्तियों के अभियोजन हेतु की गई है। यह पूरकता के सिद्धांत पर कार्य करता है, अर्थात यह तभी हस्तक्षेप करता है जब राष्ट्रीय न्यायिक प्रणालियाँ कार्य करने में असमर्थ या अनिच्छुक हों।
    • पूरकता का सिद्धांत यह स्थापित करता है कि अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय अंतिम उपाय के रूप में कार्य करता है और केवल तभी हस्तक्षेप करता है जब राष्ट्रीय प्राधिकारी वास्तविक रूप से अभियोजन या कार्यवाही करने में अनिच्छुक या असमर्थ हों।
    • यह घरेलू न्यायालयों द्वारा दिये गए फैसलों की समीक्षा या उन्हें बदलने का अपीलीय संस्थान नहीं है।
  • कानूनी आधार और स्थापना: इसकी स्थापना रोम संधि के माध्यम से की गई, जिसे 17 जुलाई, 1998 को अपनाया गया और यह 1 जुलाई, 2002 से लागू हुई। इसका मुख्यालय द हेग, नीदरलैंड्स में स्थित है।
  • अधिकार क्षेत्र और मुख्य अपराध: यह राज्यों पर नहीं बल्कि व्यक्तियों पर अभियोजन करता है तथा इसके तहत चार मुख्य अपराध आते हैं—विनाशक नरसंहार, मानवता के खिलाफ अपराध, युद्ध अपराध और आक्रमण का अपराध (आक्रमण के अपराध के लिये अधिकार क्षेत्र 2018 में सक्रिय हुआ)। इसके पास 1 जुलाई, 2002 के बाद किये गए अपराधों पर अधिकार क्षेत्र है, जब रोम संधि लागू हुई थी।
  • अधिकार क्षेत्र सक्रिय होने के आधार: किसी सदस्य राज्य के क्षेत्र में अपराध होना या उसके नागरिक द्वारा अपराध किया जाना।
    • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) द्वारा संदर्भित किया जाना, चाहे संबंधित राज्य सदस्य हो या नहीं।
    • अभियोजक द्वारा स्वप्रेरणा से (Proprio Motu) जाँच शुरू करना, जिसे प्री-ट्रायल चैंबर की अनुमति प्राप्त हो।
  • सदस्यता और भारत का रुख: फरवरी 2026 तक अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) के रोम कानून का अनुसमर्थन करने वाले देशों की संख्या 125 है। भारत, अमेरिका, चीन और इज़रायल रोम कानून के पक्षकार नहीं हैं।
    • भारत ने राष्ट्रीय संप्रभुता और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की संदर्भ शक्तियों को लेकर चिंताओं के कारण आपत्ति जताई है, जिसे वह राजनीतिक रूप से प्रेरित मानता है।
  • संरचना: इसके चार मुख्य अंग हैं—प्रेसीडेंसी, न्यायिक प्रभाग, अभियोजक कार्यालय (Office of the Prosecutor) और रजिस्ट्री।
    • असेंबली ऑफ स्टेट्स पार्टीज़ (ASP) विधायी और प्रबंधन संबंधी निगरानी प्रदान करती है।
  • कार्यान्वयन/प्रवर्तन: इसके पास कोई पुलिस शक्ति नहीं है। यह गिरफ्तारी करने, संदिग्धों को सौंपने और दंड देने हेतु सदस्य देशों के स्वेच्छिक सहयोग पर निर्भर करता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) और अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में अंतर: ICC व्यक्तियों द्वारा किये गए आपराधिक कृत्यों पर मुकदमा चलाता है, जबकि ICJ इसके विपरीत राज्यों के बीच विवादों का समाधान करता है।

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय बनाम अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय

आधार

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ)

अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC)

स्थापना वर्ष

1946

2002

संयुक्त राष्ट्र से संबंध

संयुक्त राष्ट्र का आधिकारिक न्यायालय; प्रायः “विश्व न्यायालय” के रूप में संदर्भित

स्वतंत्र न्यायालय; संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से मामलों के संदर्भ (referral) प्राप्त कर सकता है

स्थान

हेग, नीदरलैंड

हेग, नीदरलैंड

मामलों का प्रकार

राष्ट्रों के मध्य विवाद (Contentious Cases) एवं परामर्शात्मक अभिमत (Advisory Opinions)

व्यक्तियों के विरुद्ध आपराधिक अभियोजन

विषय-वस्तु (Subject Matter)

संप्रभुता, सीमा विवाद, समुद्री विवाद, व्यापार, प्राकृतिक संसाधन, मानवाधिकार, संधि उल्लंघन, संधियों की व्याख्या आदि

नरसंहार, मानवता के विरुद्ध अपराध, युद्ध अपराध, आक्रमण का अपराध

वित्त पोषण

संयुक्त राष्ट्र द्वारा वित्तपोषित

रोम संधि के पक्षकार राष्ट्रों का आकलित अंशदान; संयुक्त राष्ट्र से स्वैच्छिक अंशदान; सरकारों, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों, व्यक्तियों, निगमों तथा अन्य संस्थाओं से स्वैच्छिक योगदान

और पढ़ें: अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय और अमेरिका

close
Share Page
images-2
images-2