प्रारंभिक परीक्षा
भारत का मात्स्यिकी क्षेत्र
- 10 Apr 2026
- 56 min read
चर्चा में क्यों?
भारत चीन के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादन करने वाला देश बन गया है, जो वैश्विक उत्पादन का लगभग 8% योगदान देता है तथा मात्स्यिकी क्षेत्र को कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला क्षेत्र बनाता है।
भारत के मात्स्यिकी क्षेत्र से संबंधित प्रमुख तथ्य क्या हैं?
- आर्थिक योगदान: मात्स्यिकी क्षेत्र कृषि के सकल मूल्यवर्द्धन (GVA) में 7.43% का योगदान देता है, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में कुल उत्पादन बढ़कर 197.75 लाख टन हो गया है, जो लगभग दोगुना वृद्धि दर्शाता है।
- निर्यात प्रदर्शन: वित्त वर्ष 2024-25 में समुद्री खाद्य (सीफूड) का निर्यात ₹62,408 करोड़ तक पहुँच गया, जिसमें मुख्य रूप से फ्रोजन झींगा का प्रभुत्व रहा, जबकि अमेरिका और चीन प्रमुख निर्यात बाज़ार रहे।
- बजटीय सहायता: केंद्रीय बजट 2026-27 में इस क्षेत्र के लिये रिकॉर्ड ₹2,761 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिसमें से ₹2,500 करोड़ विशेष रूप से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) हेतु निर्धारित किये गए हैं।
- अवसंरचना एवं ऋण: मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (FIDF) तथा किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के विस्तार, जिसमें ऋण सीमा बढ़ाकर ₹5 लाख कर दी गई है, ने इस क्षेत्र में औपचारिक ऋण व्यवस्था को सुदृढ़ किया है तथा प्रसंस्करण क्षमताओं को बढ़ावा दिया है।
- तकनीकी परिवर्तन: पुनर्चक्रीय जलीय कृषि प्रणाली (Recirculatory Aquaculture Systems- RAS) और बायो-फ्लॉक तकनीक जैसे उच्च दक्षता वाले मॉडलों को तेज़ी से अपनाया जा रहा है, जो सतत एवं उच्च घनत्व वाली मत्स्य पालन पद्धति को बढ़ावा दे रहे हैं।
- RAS एक उच्च घनत्व वाली मत्स्य पालन तकनीक है, जिसमें एक क्लोज़्ड-लूप फिल्ट्रेशन प्रणाली का उपयोग किया जाता है, जो जल को शुद्ध करके पुनः उपयोग में लाती है। इससे पर्यावरणीय प्रभाव कम होता है तथा भूमि की आवश्यकता भी न्यूनतम हो जाती है।
- बायो-फ्लॉक तकनीक एक सतत जलीय कृषि पद्धति है, जिसमें जल में कार्बन स्रोत मिलाया जाता है जिससे लाभकारी सूक्ष्मजीव प्रोटीन (फ्लॉक) विकसित होता है। यह फ्लॉक एक साथ अपशिष्ट का उपचार करता है तथा मछलियों के लिये प्रत्यक्ष खाद्य स्रोत के रूप में भी कार्य करता है।
- डिजिटल शासन: वर्ष 2024 में शुरू किया गया नेशनल फिशरीज़ डिजिटल प्लेटफॉर्म (NFDP) 30 लाख से अधिक हितधारकों को डिजिटल पहचान प्रदान करता है, जिससे बीमा और सब्सिडी तक पहुँच आसान हो जाती है।
- औपचारिकीकरण: प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY), जिसका परिव्यय 6,000 करोड़ रुपये है, असंगठित मत्स्य पालन मूल्य शृंखला को औपचारिक रूप प्रदान करने और पता लगाने की क्षमता बढ़ाने पर केंद्रित है।
- संसाधन प्रबंधन: आगामी राष्ट्रीय समुद्री मत्स्यपालक गणना और अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) हेतु निर्धारित नवीन नियमावली डेटा-आधारित प्रबंधन को बढ़ावा देती है। यह पहल सतत विकास लक्ष्य 14 (जल के नीचे जीवन) के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करती है।
- अंतर्देशीय क्षमता: 500 जलाशयों और 1,222 अमृत सरोवरों को मत्स्य मूल्य शृंखला में एकीकृत करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि ग्रामीण आजीविका का विविधीकरण सुनिश्चित हो सके।
- वर्ष 2014–15 से अब तक मत्स्य क्षेत्र से संबंधित योजनाओं के माध्यम से लगभग 74.66 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर सृजित किये गए हैं।
- नियामक ढाँचा: अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) और उच्च समुद्री क्षेत्रों में मत्स्य संसाधनों के सतत दोहन के लिये वर्ष 2025 के नियम भारत के 24 लाख वर्ग किलोमीटर EEZ में अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुपालन और दीर्घकालिक संसाधन सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना क्या है?
- परिचय: PMMSY एक प्रमुख पहल है, जिसे सितंबर 2020 में भारत में मत्स्य पालन क्षेत्र के सतत और ज़िम्मेदार विकास को बढ़ावा देकर ‘नीली क्रांति’ लाने के उद्देश्य से आरंभ किया गया था।
- यह योजना मत्स्य पालन विभाग (मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय) की देखरेख में संचालित है। प्रारंभिक रूप से इसे वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक की पाँच-वर्षीय अवधि हेतु तैयार किया गया था, जिसे अब वर्ष 2025-26 तक विस्तारित कर दिया गया है।
- सरकार ने प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PMMKSSY) भी शुरू की है। यह PMMSY की एक उप-योजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य असंगठित मत्स्य पालन क्षेत्र को औपचारिक रूप तथा सूक्ष्म उद्यमों को 6,000 करोड़ रुपये से अधिक के अतिरिक्त निवेश के साथ सहायता प्रदान करना है।
- इसे वित्त वर्ष 2023-24 से वित्त वर्ष 2026-27 तक चार वर्षों के लिये सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू किया जा रहा है।
- वित्तीय आवंटन: PMMSY में कुल अनुमानित निवेश 20,050 करोड़ रुपये है। यह एक अंब्रेला स्कीम के रूप में कार्य करती है, जिसके दो मुख्य घटक हैं:
- केंद्रीय क्षेत्र योजना (CS): इसका पूरा वित्तपोषण केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है।
- केंद्र प्रायोजित योजना (CSS): केंद्र और राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा संयुक्त रूप से वित्तपोषित, जिसे आगे लाभार्थी-उन्मुख और गैर-लाभार्थी-उन्मुख गतिविधियों में विभाजित किया गया है।
- सामान्य श्रेणी: व्यक्तियों/समूहों के लिये 40% सब्सिडी।
- SC/ST/महिला श्रेणी: समावेशी विकास को प्रोत्साहित करने के लिये 60% सब्सिडी।
- मूल घटक: PMMSY क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिये विभिन्न "एक्टिविटी क्लस्टर" पर केंद्रित है:
- अंतर्देशीय और समुद्री मत्स्य पालन: केज कल्चर, समुद्री शैवाल की कृषि और सजावटी मत्स्य पालन को बढ़ावा देना।
- प्रौद्योगिकी अंतर्निवेश: RAS और बायोफ्लॉक प्रौद्योगिकी जैसी आधुनिक प्रणालियों का समर्थन।
- बुनियादी ढाँचा: बाज़ार संपर्क में सुधार के लिये "मत्स्यग्रहण हेतु बंदरगाह", "लैंडिंग केंद्र" और "कोल्ड चेन" सुविधाओं का निर्माण।
- मछुआरा कल्याण: मत्स्यग्रहण के जहाज़ों और मछुआरों के लिये बीमा कवरेज, साथ ही "मंदी की अवधि" (मत्स्यग्रहण पर प्रतिबंध) के दौरान सहायता प्रदान करना।
- प्रमुख उद्देश्य और लक्ष्य:
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. भारत के कृषि सकल मूल्यवर्द्धन (GVA) में मत्स्य क्षेत्र का क्या महत्त्व है?
मत्स्य क्षेत्र कृषि सकल मूल्यवर्द्धन (GVA) में 7.43% का योगदान देता है, जो इसे सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला संबद्ध क्षेत्र और ग्रामीण रोज़गार तथा पोषण सुरक्षा के लिये एक महत्त्वपूर्ण स्तंभ बनाता है।
2. RAS और बायोफ्लॉक प्रौद्योगिकियाँ सतत जलीय कृषि का समर्थन कैसे करती हैं?
RAS क्लोज़्ड-लूप फिल्ट्रेशन के माध्यम से जल का संरक्षण करता है, जबकि बायोफ्लॉक जैविक अपशिष्ट को पोषक तत्त्वों से भरपूर चारे में परिवर्तित करता है; ये दोनों न्यूनतम पर्यावरणीय फुटप्रिंट के साथ उच्च-घनत्व वाली कृषि को सक्षम बनाते हैं।
3. PM-MKSSY उप-योजना का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
यह एक केंद्रीय क्षेत्रक उप-योजना है, जिसका उद्देश्य असंगठित मत्स्य क्षेत्र को औपचारिक रूप देना, पता लगाने की क्षमता (ट्रेसेबिलिटी) बढ़ाना और 6,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के माध्यम से सूक्ष्म-उद्यमों का समर्थन करना है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रिलिम्स
प्रश्न. किसान क्रेडिट कार्ड योजना के अंतर्गत किसानों को निम्नलिखित में से किस उद्देश्य के लिये अल्पकालिक ऋण सुविधा प्रदान की जाती है? (2020)
- कृषि संपत्तियों के रखरखाव के लिये कार्यशील पूंजी
- कंबाइन हार्वेस्टर, ट्रैक्टर और मिनी ट्रक की खरीद
- खेतिहर परिवारों की उपभोग आवश्यकताएँ
- फसल के बाद का खर्च
- पारिवारिक आवास का निर्माण एवं ग्राम कोल्ड स्टोरेज सुविधा की स्थापना
निम्नलिखित कूट की सहायता से सही उत्तर का चयन कीजिये:
(a) केवल 1, 2 और 5
(b) केवल 1, 3 और 4
(c) केवल 2, 3, 4 और 5
(d) 1, 2, 3, 4 और 5
उत्तर: (b)


