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भारत में झींगा पालन

  • 15 May 2024
  • 9 min read

स्रोत: द हिंदू

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारत ने अमेरिका स्थित मानवाधिकार समूह द्वारा भारत में झींगा फार्मों पर लगाए गए आरोपों का खंडन किया है। भारत ने कहा कि भारत का संपूर्ण झींगा निर्यात समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (MPEDA) द्वारा प्रमाणित है जिससे किसी प्रकार की चिंताओं की कोई गुंज़ाइश नहीं है।

भारत में झींगा पालन की स्थिति:

  • परिचय: झींगा क्रस्टेशियन (शेलफिश का एक रूप) है, जिसका शरीर अर्द्ध पारदर्शी होने के साथ चपटा होता है तथा उदर लचीला होने के साथ इसके पश्च भाग से संलग्न होता है।
    • उनके करीबी वंशज में केकड़े, क्रेफिश और झींगा मछली शामिल हैं। ये सभी महासागरों में उथले और गहरे जल में तथा मीठे जल की झीलों एवं झरनों में पाए जाते हैं।
  • झींगा पालन: झींगा पालन का आशय मानव उपभोग के लिये तालाबों या टैंकों जैसे नियंत्रित क्षेत्रों में झींगा पालन करना है।
    • इनके लिये 25-30°C (77-86°F) के मध्य उष्म तापमान वाला गर्म जल अनुकूल होता है।
    • इनके लिये चिकनी-दोमट या बलुई-मिट्टी अनुकूल होती है तथा 6.5 से 8.5 के बीच pH वाली कुछ क्षारीय मृदा इष्टतम होती है।
    • झींगा पालन के लिये मृदा में कम से कम 5% कैल्शियम कार्बोनेट होना बेहतर होता है।
  • भारत में झींगा पालन की स्थिति:
    • झींगा निर्यातक के रूप में भारत: भारत विश्व के सबसे बड़े झींगा निर्यातकों में से एक है।
      • वर्ष 2022-23 में भारत का समुद्री खाद्य निर्यात 8.09 बिलियन अमेरिकी डॉलर या ₹64,000 करोड़ था और इन निर्यातों में झींगा का योगदान 5.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर था।
      • अमेरिकी बाज़ार में समुद्री खाद्य निर्यात के लिये वर्ष 2022-23 में भारत की हिस्सेदारी 40% थी, जो थाईलैंड, चीन, वियतनाम और इक्वाडोर जैसे प्रतिद्वंद्वियों से काफी अधिक थी।
    • झींगा उत्पादक राज्य: आंध्र प्रदेश भारत का सबसे बड़ा झींगा उत्पादक राज्य है, जो भारत के झींगा उत्पादन का 70% है।
      • पश्चिम बंगाल में सुंदरबन तथा गुजरात में कच्छ के प्रमुख उत्पादक के साथ पश्चिम बंगाल और गुजरात झींगा पालन में अन्य प्रमुख राज्य हैं।
    • विनियमन:
      • सभी झींगा इकाइयाँ समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (MPEDA) तथा भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण(FSSAI) के साथ पंजीकृत हैं।
      • वे अमेरिकी संघीय विनियम संहिता के अनुसार, HACCP (संकट विश्लेषण और गंभीर नियंत्रण बिंदु) आधारित खाद्य सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली का पालन करते हैं।
      • वर्ष 2002 से जलीय कृषि में औषधीय किंतु हानिकारक पदार्थों के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
      • इसके अलावा, राष्ट्रीय अवशेष नियंत्रण योजना, ELISA स्क्रीनिंग लैब, इन-हाउस लैब और पूर्व-निर्यात जाँच जैसे राष्ट्रीय नियम एवं निगरानी उपाय लागू हैं।

समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण(MPEDA) क्या है?

  • परिचय: यह भारत में समुद्री खाद्य उद्योग के समग्र विकास और इसकी निर्यात क्षमता की प्राप्ति के लिये एक नोडल एजेंसी है।
    • इसकी स्थापना 1972 में समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण अधिनियम (MPEDA), 1972 के तहत की गई थी।
    • यह केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
  • उद्देश्य: यह भारत में समुद्री खाद्य उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और निर्यात के विकास की परिकल्पना करता है।
    • भारत सरकार MPEDA की सिफारिशों के आधार पर मछली पकड़ने वाले जहाज़ो, भंडारण परिसरों, प्रसंस्करण संयंत्रों और परिवहन के लिये नए मानकों की सिफारिश करती है।
  • कार्यप्रणाली: MPEDA निर्यातकों को नामांकित करता है, गुणवत्ता मानक निर्धारित करता है, निर्यात को बढ़ावा देने के लिये आयातकों के साथ संपर्क करता है तथा उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने के लिये प्रासंगिक हितधारकों के लिये प्रशिक्षण, जागरूकता अभियान जैसे क्षमता निर्माण कार्यक्रम (Capacity-building programmes) आयोजित करता है।
  • मुख्यालय: कोच्चि, केरल

समुद्री खाद्य निर्यात से संबंधित सरकारी पहल क्या हैं?

  • प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana- PMMSY): इस प्रमुख योजना के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण झींगा उत्पादन, प्रजातियों के विविधीकरण, निर्यात-उन्मुख प्रजातियों को बढ़ावा देने, ब्रांडिंग, मानकों और प्रमाणन, प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण, मत्स्य पालन प्रबंधन और नियामक ढाँचे के निर्माण में सहायता प्रदान करने के लिये इसे 2020 में लॉन्च किया गया था।

  • मत्स्य पालन और जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष: वर्ष 2018 में शुरू किया गया, FIDF समुद्री और अंतर्देशीय मत्स्य पालन दोनों में बुनियादी ढाँचे के साथ-साथ आधुनिकीकरण की अवश्यकताओं को पूरा करने हेतु ऋण प्रदान करता है।
  • किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) मत्स्य पालन योजना: यह मत्स्य पालन करने वाले किसानों को उनकी कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं के लिये पर्याप्त और समय पर ऋण सहायता प्रदान करती है।
    • नए कार्डधारक ब्याज छूट के साथ 2 लाख रुपए तक का ऋण प्राप्त कर सकते हैं। 
    • वर्तमान KCC धारक 3 लाख रुपए की बढ़ी हुई ऋण सीमा का लाभ उठा सकते हैं।
    • KCC ऋण के लिये ऋण दर 7% है, जिसमें भारत सरकार द्वारा प्रतिवर्ष 2% ब्याज छूट भी शामिल है।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रिलिम्स:

प्रश्न: किसान क्रेडिट कार्ड योजना के अंतर्गत किसानों को निम्नलिखित में से किस उद्देश्य के लिये अल्पकालिक ऋण सुविधा प्रदान की जाती है? (2020)

  1. कृषि संपत्तियों के रखरखाव के लिये कार्यशील पूंजी 
  2. कंबाइन हार्वेस्टर, ट्रैक्टर और मिनी ट्रक की खरीद 
  3. खेतिहर परिवारों की उपभोग आवश्यकताएँ
  4. फसल के बाद का खर्च 
  5. पारिवारिक आवास का निर्माण एवं ग्राम कोल्ड स्टोरेज सुविधा की स्थापना

निम्नलिखित कूट की सहायता से सही उत्तर का चयन कीजिये:

(a) केवल 1, 2 और 5
(b) केवल 1, 3 और 4
(c) केवल 2, 3, 4 और 5
(d) 1, 2, 3, 4 और 5

उत्तर: (b)


मेन्स:

प्रश्न. ‘नीली क्रांति’ को परिभाषित करते हुए भारत में मत्स्य पालन की समस्याओं और रणनीतियों को समझाइये। (2018)

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