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गुजरात ने फिर हासिल किया ‘टाइगर स्टेट’ का दर्जा
- 03 Feb 2026
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जांबूघोड़ा और रतनमहल वन क्षेत्रों में रॉयल बंगाल टाइगर की निरंतर उपस्थिति के बाद गुजरात एक बार फिर टाइगर बियरिंग स्टेट का दर्जा हासिल करने जा रहा है। यह भारत के वन्यजीव संरक्षण इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
- अद्वितीय जैव विविधता: बाघ की स्थायी उपस्थिति की पुष्टि के बाद गुजरात भारत का एकमात्र राज्य बन गया है, जहाँ तीन प्रमुख बड़े शिकारी पाए जाते हैं: एशियाई शेर, रॉयल बंगाल टाइगर और तेंदुआ।
- प्रवासन मार्ग: बाघ ने मध्य प्रदेश के कट्टीवाड़ा वन्यजीव अभयारण्य से गुजरात के कांजेता रेंज और जांबूघोड़ा वन्यजीव अभयारण्य तक लगभग 60 किमी. की दूरी तय की।
- 90 किमी. प्रवासन मार्ग: कांजेता और जांबूघोड़ा को जोड़ने वाला यह 90 किमी. लंबा मार्ग एक समृद्ध वन क्षेत्र के रूप में पहचाना गया है, जिसमें प्राकृतिक गुफाएँ और जलस्रोत हैं, जो बाघ संरक्षण के लिये उपयुक्त हैं।
- राज्य वन विभाग राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के साथ समन्वय कर एक मादा बाघ लाने की योजना बना रहा है, ताकि इस क्षेत्र में स्थिर बाघ आबादी स्थापित की जा सके।
- प्राय बेस ऑग्मेंटेशन: बाघ के लिये पर्याप्त शिकार प्राणी उपलब्ध कराने और मानव–वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिये कदा डैम के पास एक शाकाहारी पशु प्रजनन केंद्र (Herbivore Breeding Centre) स्थापित किया गया है, जहाँ चीतल तथा साँभर का प्रजनन किया जाता है और उन्हें जंगल में छोड़ा जाता है।
- जांबूघोड़ा वन्यजीव अभयारण्य: यह एक जैव विविधता का केंद्र है, जिसकी पहचान शुष्क दक्षिणी उष्णकटिबंधीय, शुष्क पर्णपाती और माध्यमिक वनों से होती है, जिनके बीच-बीच में घास के मैदान और औषधीय जड़ी-बूटियाँ पाई जाती हैं।
- परिदृश्य और वन्यजीव: यह क्षेत्र सागवान, महुआ और बाँस के घने जंगलों से घिरा हुआ है, जो जीव-जंतु की विविध प्रजातियों के लिये सुरक्षित आवरण प्रदान करता है।
- यह अभयारण्य तेंदुओं की एक महत्त्वपूर्ण आबादी का आवास है इसके साथ ही यहाँ स्लॉथ बीयर, चौसिंगा (चार सींग वाला हरिण), नीलगाय और हैना भी पाए जाते हैं, जिससे यह क्षेत्र एक महत्त्वपूर्ण पारिस्थितिकीय मार्ग के रूप में विकसित होता है।
- रतनमहल वन्यजीव अभयारण्य: गुजरात में मध्य प्रदेश की सीमा के पास स्थित रतनमहल वन्यजीव अभयारण्य (स्थापना: 1982) एक महत्त्वपूर्ण आवास क्षेत्र है, जो राज्य में स्लॉथ बीयर की सबसे बड़ी आबादी के लिए जाना जाता है।
- अभयारण्य में शुष्क सागौन और मिश्रित पर्णपाती वन पाए जाते हैं, जिनमें बाँस, महुआ और जामुन के वृक्ष भी शामिल हैं, जो भालुओं के लिये आवश्यक चरागाह प्रदान करते हैं।
- अपने समृद्ध जीव-जंतु के अलावा, जिसमें तेंदुए की महत्त्वपूर्ण संख्या शामिल है, यह क्षेत्र रणनीतिक पारिस्थितिक महत्त्व भी रखता है क्योंकि यह पानम नदी का जलग्रहण क्षेत्र है, जो दाहोद और पंचमहल ज़िलों में जल संरक्षण प्रयासों को बनाए रखने में सहायक है।
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