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रोज़गार और सामाजिक रुझान, 2026 रिपोर्ट

  • 20 Jan 2026
  • 52 min read

स्रोत: द हिंदू

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने रोज़गार और सामाजिक रुझान, 2026 रिपोर्ट जारी की है, जिसमें विश्व स्तर पर बेरोज़गारी दर 2025 में 4.9% बनी रहने का अनुमान लगाया गया है।

रोज़गार और सामाजिक रुझान, 2026 रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु क्या हैं?

  • रोज़गार गुणवत्ता में ठहराव: पिछले दो दशकों में सुधार की गति धीमी हुई है। वर्ष 2015-25 के बीच, अत्यधिक कार्य संबंधी गरीबी में केवल 3.1 प्रतिशत अंकों की गिरावट (7.9% या 284 मिलियन श्रमिक तक) देखी गई, जो कि पिछले दशक की 15 अंकों की गिरावट की तुलना में बहुत कम है। कम आय वाले देशों में, 2025 में 68% श्रमिक अत्यधिक या मध्यम गरीबी में जीवन यापन कर रहे थे।
    • अत्यधिक कार्य संबंधी गरीबी उस स्थिति को कहा जाता है, जिसमें कामकाजी व्यक्ति ऐसे घरों में रहते हैं जिनकी प्रति व्यक्ति आय या खपत अंतर्राष्ट्रीय अत्यधिक गरीबी सीमा (दिन के 3 अमेरिकी डॉलर से कम) से कम होती है।
  • बढ़ती अनौपचारिकता: वैश्विक अनौपचारिक रोज़गार दर वर्ष 2015–25 के बीच 0.3 प्रतिशत अंक बढ़ी है और अनुमान है कि वर्ष 2026 तक 2.1 अरब श्रमिक अनौपचारिक रूप से रोज़गार में होंगे।
  • धीमा संरचनात्मक परिवर्तन: पिछले दो दशकों में वैश्विक स्तर पर श्रमिकों का आर्थिक क्षेत्रों में स्थानांतरण आधा हो गया है। औपचारिक और उत्पादक क्षेत्रों में यह धीमी संक्रमण दर कमज़ोर रोज़गार गुणवत्ता तथा उत्पादकता वृद्धि का प्रमुख कारण है।
  • असमान बेरोज़गारी और रोज़गार वृद्धि: वर्ष 2025 में वैश्विक बेरोज़गारी दर 4.9% बनी रही (वर्ष 2026 में 186 मिलियन बेरोज़गारों का अनुमान), जबकि रोज़गार अंतर 408 मिलियन है। रोज़गार वृद्धि भी असमान है—उच्च आय वाले देशों में वर्ष 2026 में गिरावट, ऊपरी-मध्यम आय वाले देशों में धीमी वृद्धि (0.5%), जबकि निम्न आय वाले देशों में अपेक्षाकृत तेज़ वृद्धि (3.1%) दर्ज की गई है।
  • लैंगिक और युवा अंतर में निरंतरता: महिलाएँ विश्व-स्तर पर कुल रोज़गार का केवल लगभग 40 प्रतिशत (2/5 हिस्सा) ही प्रतिनिधित्व करती हैं और उनकी श्रमबल भागीदारी दर पुरुषों की तुलना में 24.2 प्रतिशत कम है। वैश्विक युवा बेरोज़गारी दर 2025 में बढ़कर 12.4% हो गई, जबकि 257 मिलियन युवा NEET (रोज़गार, शिक्षा या प्रशिक्षण में नहीं) की श्रेणी में हैं।
  • अपर्याप्त उत्पादकता और श्रम आय वृद्धि: श्रम उत्पादकता वृद्धि विशेषकर निम्न आय वाले देशों में कमज़ोर बनी हुई है। वैश्विक श्रम आय हिस्सेदारी वर्ष 2025 में 52.6% रही, जो वर्ष 2019 के स्तर से कम है, यह दर्शाता है कि वास्तविक वेतन वृद्धि उत्पादकता वृद्धि से पीछे चल रही है।
  • एआई और व्यापार से उत्पन्न उभरते जोखिम: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को अपनाने से उच्च-कुशल प्रारंभिक स्तर की नौकरियों में कार्यरत या प्रवेश करने वाले शिक्षित युवाओं के लिये जोखिम बढ़ रहा है। वहीं व्यापार नीतियों में अनिश्चितता वास्तविक वेतन और रोज़गार सृजन हेतु खतरा उत्पन्न कर रही है, विशेष रूप से दक्षिण-पूर्वी एशिया और यूरोप जैसे क्षेत्रों में।
  • व्यापार के लाभों में असमानता: वर्ष 2024 में जहाँ 46.5 करोड़ नौकरियाँ विदेशी मांग पर निर्भर थीं, वहीं निम्न आय वाले देश व्यापार और निवेश के प्रवाह से काफी हद तक वंचित रहे, जिससे उन्हें उच्च गुणवत्ता तथा व्यापार-संबद्ध रोज़गार के अवसर सीमित रूप से ही मिल पाए।

भारत से संबंधित निष्कर्ष क्या हैं?

  • आर्थिक वृद्धि: एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारत के सर्वाधिक तीव्र वृद्धि दर वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहने की संभावना है तथा दक्षिण एशिया में उच्च GDP वृद्धि को बनाए रखने की अपेक्षा है।
  • विनिर्माण में हिस्सेदारी: वैश्विक विनिर्माण में भारत की हिस्सेदारी (वर्तमान अमेरिकी डॉलर के आधार पर) लगभग 3% बताई गई है, जो चीन (27%) और संयुक्त राज्य अमेरिका (17%) की तुलना में काफी कम है।
  • नवीकरणीय ऊर्जा रणनीति एवं रोज़गार: भारत ने बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का विकास किया है। जापान और कोरिया गणराज्य के साथ-साथ भारत को नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में रोज़गार सृजन बढ़ाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति करता हुआ माना गया है।
  • ग्रीन टैलेंट गैप: भारत तथा व्यापक एशिया-प्रशांत क्षेत्र में हरित कौशल (ग्रीन टैलेंट) की मांग, उपलब्ध आपूर्ति की तुलना में कहीं अधिक तेज़ी से बढ़ रही है।

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO)

  • परिचय: अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) संयुक्त राष्ट्र की एक विशेषीकृत एजेंसी है, जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त मानव एवं श्रम अधिकारों को बढ़ावा देकर सामाजिक और आर्थिक न्याय की स्थापना के लिये कार्य करती है।
  • स्थापना एवं दायित्व: अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की स्थापना वर्ष 1919 में प्रथम विश्वयुद्ध के बाद वर्साय की संधि के अंतर्गत की गई थी। यह 1946 में संयुक्त राष्ट्र की पहली विशेषीकृत एजेंसी बना तथा 1969 में इसे नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • उद्देश्य: मूल मानवाधिकार और श्रम अधिकारों को बढ़ावा देने, बेहतर कार्य परिस्थितियों को सुनिश्चित करने तथा रोज़गार के अवसर सृजित करने हेतु अंतर्राष्ट्रीय नीतियों का निर्माण।
  • विशिष्ट त्रिपक्षीय संरचना: ILO एक विशिष्ट त्रिपक्षीय ढाँचा प्रदान करता है, जिसमें 187 सदस्य राज्यों की सरकारों, नियोक्ता संगठनों और श्रमिक संगठनों (व्यापार संघों) के प्रतिनिधि एकत्र होते हैं, ताकि नीतियाँ सभी सामाजिक भागीदारों के दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित कर सकें।
  • प्रमुख शासन निकाय:
    • अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन: वार्षिक सर्वोच्च निर्णय-निर्धारण संस्था।
    • शासनिक निकाय: कार्यकारी परिषद जो नीतियाँ और बजट तय करती है।
    • अंतर्राष्ट्रीय श्रम कार्यालय: जेनेवा में स्थायी सचिवालय, जिसका नेतृत्व निदेशक-जनरल करते हैं।
  • मुख्य रिपोर्ट: रोज़गार और सामाजिक रुझान, विश्व रोज़गार और सामाजिक आउटलुक, वैश्विक वेतन रिपोर्ट, विश्व सामाजिक सुरक्षा रिपोर्ट और सोशल डायलॉग रिपोर्ट।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1.  ILO के अनुसार 2025 के लिये वैश्विक बेरोज़गारी दर क्या है?
ILO की रोज़गार और सामाजिक रुझान 2026, रिपोर्ट के अनुसार 2025 में वैश्विक बेरोज़गारी दर 4.9% अनुमानित है।

2. रिपोर्ट के अनुसार भविष्य के रोज़गार के लिये मुख्य जोखिम क्या हैं?
मुख्य उभरते जोखिम हैं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का अपनाना, जिससे युवाओं के उच्च-कुशल प्रारंभिक रोज़गार संबंधी समस्याएँ उत्पन्न करता है तथा व्यापार नीति में अनिश्चितता, जो वास्तविक वेतन एवं रोज़गार सृजन को प्रभावित करती है।

3. रिपोर्ट के निष्कर्षों में भारत का प्रदर्शन कैसा है?
भारत एक उच्च-वृद्धि अर्थव्यवस्था है, लेकिन वैश्विक विनिर्माण में इसकी हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम (3%) है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न 

प्रश्न. अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के 138 एवं 182 अभिसमय किससे संबंधित हैं? (2018)

(a) बाल श्रम

(b)  कृषि के तरीकों का वैश्विक जलवायु परिवर्तन से अनुकूलन

(c) खाद्य कीमतों एवं खाद्य सुरक्षा का विनियमन

(d) कार्यस्थल पर लिंग समानता

उत्तर: (a)


प्रश्न. प्रच्छन्न बेरोज़गारी का सामान्यतः अर्थ है कि:  (2013)

(a) लोग बड़ी संख्या में बेरोज़गार रहते हैं

(b) वैकल्पिक रोज़गार उपलब्ध नहीं है

(c) श्रमिक की सीमांत उत्पादकता शून्य है

(d) श्रमिकों की उत्पादकता नीची है

उत्तर: (c)

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