प्रारंभिक परीक्षा
डिज़ाइन आधारित प्रोत्साहन (DLI) योजना
- 07 Jan 2026
- 48 min read
सेमीकंडक्टरों के लिये भारत की डिज़ाइन आधारित प्रोत्साहन (DLI) योजना ने ज़मीनी स्तर पर ठोस परिणाम दिये हैं, जो वैश्विक आपूर्ति शृंखला की अनिश्चितताओं के बीच आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर डिज़ाइन ईकोसिस्टम के निर्माण में तेज़ प्रगति को दर्शाते हैं।
डिज़ाइन आधारित प्रोत्साहन (DLI) योजना के संबंध में मुख्य तथ्य क्या हैं?
- परिचय: DLI योजना केंद्र सरकार की एक पहल है, जिसे इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा सेमिकॉन इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत लागू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य वित्तीय प्रोत्साहन तथा उन्नत डिज़ाइन अवसंरचना उपलब्ध कराकर घरेलू स्टार्टअप्स एवं MSMEs में स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप डिज़ाइन को बढ़ावा देना है।
- उद्देश्य: DLI योजना का लक्ष्य फैबलेस सेमीकंडक्टर डिज़ाइन के क्षेत्र में एक आत्मनिर्भर, नवोन्मेषी और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्द्धी चिप डिज़ाइन ईकोसिस्टम विकसित करना है।
- फैबलेस सेमीकंडक्टर डिज़ाइन में स्वयं का विनिर्माण संयंत्र रखे बिना सेमीकंडक्टर चिप्स का डिज़ाइन और विकास किया जाता है, जबकि निर्माण कार्य विशेषीकृत फाउंड्रीज़ को सौंपा जाता है।
- DLI योजना की आवश्यकता: फैबलेस सेमीकंडक्टर कंपनियाँ इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन में सबसे रणनीतिक स्थान पर होती हैं, क्योंकि डिज़ाइन और बौद्धिक संपदा (IP) चिप के कुल मूल्य का आधे से अधिक योगदान देती हैं, मूल्य संवर्द्धन की लगभग 50% तक सामग्री सूची (बिल ऑफ मटीरियल्स) का 20–50% हिस्सा होती हैं तथा वैश्विक सेमीकंडक्टर बिक्री का लगभग 30–35% संचालित करती हैं।
- चूँकि डिज़ाइन और बौद्धिक संपदा (IP) चिप की कार्यक्षमता, ऊर्जा दक्षता, सुरक्षा और दीर्घकालिक प्रतिस्पर्द्धा को तय करती हैं, इसलिये स्वदेशी डिज़ाइन क्षमता न होने पर स्थानीय उत्पादन के बावजूद देश मुख्य तकनीकों के लिये आयात पर निर्भर रहते हैं। इसी आवश्यकता को देखते हुए DLI योजना के तहत मज़बूत घरेलू फैबलेस ईकोसिस्टम का विकास अनिवार्य है।
- पात्रता: DLI योजना में स्टार्टअप [औद्योगिक नीति एवं संवर्द्धन विभाग (DPIIT) अधिसूचना, 2019 के अनुसार], MSME (MSME अधिसूचना, 2020 के अनुसार) और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नीति परिपत्र, 2017 या प्रचलित मानदंडों के अनुरूप भारतीय नागरिकों के स्वामित्व वाली घरेलू कंपनियाँ शामिल हैं।
- यह समावेशी डिज़ाइन उद्यम परिपक्वता के विभिन्न चरणों में भागीदारी की अनुमति देता है।
- समर्थन का दायरा: समर्थन/सपोर्ट संपूर्ण सेमीकंडक्टर डिज़ाइन के लाइफसायकल में प्रदान किया जाता है, जिसमें इंटीग्रेटेड सर्किट (IC), चिपसेट, सिस्टम-ऑन-चिप (SoC), सिस्टम और IP कोर शामिल हैं।
- योजना स्वदेशी डिज़ाइन, IP स्वामित्व और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों में तैनाती पर ज़ोर देती है।
- वित्तीय प्रोत्साहन: योजना दो प्रमुख पहलों पर आधारित है। उत्पाद डिज़ाइन आधारित पहल में होने वाले व्यय का 50% तक (प्रति आवेदन ₹15 करोड़ की अधिकतम सीमा के साथ) प्रतिपूर्ति करती है।
- डिप्लॉय आधारित प्रोत्साहन: इस प्रोत्साहन के तहत पाँच वर्षों के लिये शुद्ध बिक्री कारोबार का 4–6% प्रदान किया जाता है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹30 करोड़ है। यह प्रोत्साहन न्यूनतम बिक्री मानदंडों की पूर्ति तथा उत्पाद के सफल परिनियोजन की शर्त के अधीन होगा।
- डिज़ाइन अवसंरचना समर्थन: उन्नत कंप्यूटिंग विकास केंद्र (C-DAC) द्वारा संचालित ChipIN सेंटर के माध्यम से प्रदान किया जाता है।
- इसमें उन्नत राष्ट्रीय EDA (इलेक्ट्रॉनिक डिज़ाइन ऑटोमेशन) टूल ग्रिड, IP कोर रिपॉजिटरी, MPW प्रोटोटाइपिंग और पोस्ट-सिलिकॉन सत्यापन तक पहुँच शामिल है, जो चिप डिज़ाइन के लिये प्रवेश संबंधी बाधाओं को काफी कम करता है।
- DLI की प्रमुख उपलब्धियाँ: DLI योजना के तहत, वीडियो निगरानी, ड्रोन पहचान, ऊर्जा मीटर, माइक्रोप्रोसेसर, उपग्रह संचार और ब्रॉडबैंड एवं इंटरनेट ऑफ थिंग्स सिस्टम ऑन चिप (IoT SoC) जैसे क्षेत्रों में 24 चिप-डिज़ाइन प्रोजेक्ट को स्वीकृति प्रदान की गई है।
- ChipIN सेंटर ने चिप डिज़ाइन अवसंरचना तक पहुँच को डेमोक्रेटिक किया है, जो 400 संगठनों में लगभग 1 लाख इंजीनियरों और छात्रों का समर्थन कर रहा है, हालाँकि राष्ट्रीय EDA ग्रिड का व्यापक उपयोग हुआ है, जो पारिस्थितिक तंत्र के मज़बूत अंगीकरण को दर्शाता है।
भारत में सेमीकंडक्टर डिज़ाइन हेतु प्रमुख संस्थागत ढाँचे
- सेमिकॉन इंडिया प्रोग्राम (SIM): 76,000 करोड़ रुपये के प्रावधान के साथ, SIM सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले निर्माण के साथ-साथ चिप डिज़ाइन का समर्थन करता है।
- उन्नत कंप्यूटिंग विकास केंद्र (C-DAC) इसे लागू करने वाली केंद्रीय संस्था (नोडल कार्यान्वयन एजेंसी) के रूप में कार्य करता है।
- चिप्स टू स्टार्टअप (C2S) प्रोग्राम: यह एक राष्ट्रीय क्षमता निर्माण पहल है, जो शैक्षणिक संस्थानों में BTech, MTech और PhD स्तर पर लगभग 85,000 उद्योग-तैयार पेशेवरों को सेमीकंडक्टर चिप डिज़ाइन में तैयार करने हेतु संचालित की जाती है।
- माइक्रोप्रोसेसर विकास कार्यक्रम: C-DAC, IIT मद्रास और IIT बॉम्बे द्वारा नेतृत्व किये गए इस कार्यक्रम ने VEGA, SHAKTI और AJIT जैसे ओपन-सोर्स, स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर विकसित किये हैं, जिससे तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिला है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) स्कीम क्या है?
यह केंद्रीय सरकार की एक योजना है, जिसे सेमिकॉन इंडिया प्रोग्राम के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा लागू किया जाता है। इसका उद्देश्य प्रोत्साहन और साझा अवसंरचना के माध्यम से देशी सेमीकंडक्टर चिप डिज़ाइन को बढ़ावा देना है।
2. भारत के लिये DLI स्कीम क्यों आवश्यक है?
चिप के मूल्य में डिज़ाइन और IP का योगदान आधे से अधिक होता है, लगभग 50% मूल्य संवर्द्धन और 20-50% BOM में जबकि फैबलेस कंपनियाँ वैश्विक बिक्री का लगभग 30-35% संचालित करती हैं। इसलिये, देशी डिज़ाइन प्रतिस्पर्द्धा और सुरक्षा के लिये महत्त्वपूर्ण है।
3. DLI स्कीम के तहत कौन पात्र है?
स्टार्टअप (DPIIT पंजीकृत), MSME और घरेलू कंपनियाँ, जो भारतीय नागरिकों के स्वामित्व में हैं और FDI नियमों के अनुरूप हैं, जिससे विभिन्न स्तरों की उद्यम क्षमता के साथ भागीदारी संभव होती है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रिलिम्स:
प्रश्न: निम्नलिखित में से किस लेज़र प्रकार का उपयोग लेज़र प्रिंटर में किया जाता है? (2008)
(a) डाई लेज़र
(b) गैस लेज़र
(c) सेमीकंडक्टर लेज़र
(d) एक्सीमर लेज़र
उत्तर: (c)
मेन्स
प्रश्न. भारत ने एक सेमीकंडक्टर विनिर्माण केंद्र बनने का लक्ष्य रखा है। भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग के सामने क्या चुनौतियाँ हैं? भारत सेमीकंडक्टर मिशन की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिये। (2025)