रैपिड फायर
8वाँ पोषण पखवाड़ा
- 10 Apr 2026
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महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने पोषण पखवाड़ा (9 अप्रैल से 23 अप्रैल, 2026) के 8वें संस्करण की शुरुआत की है, जो एक पखवाड़ा-व्यापी राष्ट्रीय अभियान है, जिसका उद्देश्य पोषण और प्रारंभिक बाल देखभाल को जन आंदोलन (जनता का आंदोलन) के रूप में संस्थागत बनाना है।
- मुख्य विषय: वर्ष 2026 संस्करण का केंद्र ‘जीवन के पहले छह वर्षों में मस्तिष्क के अधिकतम विकास को सुनिश्चित करना’ है, जिसमें यह स्वीकार किया गया है कि 6 वर्ष की आयु तक मस्तिष्क का 85% से अधिक विकास हो जाता है।
- यह अभियान इस बात पर ज़ोर देता है कि जीवन के पहले 1,000 दिन शारीरिक विकास, मानसिक स्वास्थ्य और संज्ञानात्मक विकास के लिये सबसे महत्त्वपूर्ण अवधि होते हैं।
- मिशन पोषण 2.0: मिशन पोषण 2.0 के अंतर्गत मनाया जाने वाला यह मिशन सभी केंद्रीय मंत्रालयों और राज्यों के प्रयासों को एकीकृत कर जन भागीदारी (जन भागीदारी) के माध्यम से पोषण परिणामों में सुधार करने का लक्ष्य रखता है।
- यह वर्ष 2018 में शुरू किये गए पोषण अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य देश में पोषण संबंधी परिणामों में सुधार करना है।
- प्रमुख कार्य क्षेत्र:
- मातृ एवं शिशु पोषण: विशेष स्तनपान तथा आयु-उपयुक्त पूरक आहार (Complementary Feeding) को बढ़ावा देना।
- अर्ली स्टिमुलेशन/प्रारंभिक उत्तेजना (0-3 वर्ष): संवेदनशील देखभाल (Responsive Caregiving) तथा प्रारंभिक अधिगम की अंतर्क्रियाएँ को प्रोत्साहित करना।
- खेल-आधारित शिक्षा (3-6 वर्ष): समग्र विकासात्मक गतिविधियों के माध्यम से स्कूल-तैयारी (School Readiness) की ओर संक्रमण सुनिश्चित करना।
- जीवनशैली प्रबंधन: छोटे बच्चों में स्क्रीन टाइम को न्यूनतम करने हेतु माता-पिता एवं समुदायों को प्रेरित करना।
- पहुँच और विस्तार: यह अभियान आंगनवाड़ी कार्यकर्त्ताओं, ASHA, सहायक नर्स-मिडवाइफ (ANM) तथा स्वयं सहायता समूहों (SHG) को सक्रिय रूप से शामिल करता है, ताकि विकसित भारत (Viksit Bharat) के दृष्टिकोण को प्रत्येक घर तक पहुँचाया जा सके।
- भारत के लगभग 14 लाख आंगनवाड़ी केंद्र वर्तमान में लगभग 8.9 करोड़ लाभार्थियों को सेवाएँ प्रदान करते हैं, जिनमें गर्भवती महिलाएँ, स्तनपान कराने वाली माताएँ तथा किशोरियाँ शामिल हैं।
- आकांक्षी ज़िले: विकासात्मक अंतराल को कम करने हेतु आकांक्षी ज़िलों में प्रदर्शन को सुदृढ़ करने तथा सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने पर विशेष बल दिया जा रहा है।
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