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क्वांटम क्लोनिंग

  • 11 Apr 2026
  • 22 min read

स्रोत : द हिंदू

शोधकर्त्ताओं ने क्वांटम स्टेट की परिपूर्ण प्रतिलिपि बनाने की एक विधि का प्रायोगिक प्रदर्शन किया है, जिसमें क्वांटम भौतिकी की मूलभूत नो-क्लोनिंग थ्योरम में एक संभावित कमी का उपयोग किया गया है। यह उपलब्धि क्वांटम कंप्यूटिंग और क्लाउड स्टोरेज अवसंरचना के लिये परिवर्तनकारी संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।

  • नो-क्लोनिंग थ्योरम: यह क्वांटम भौतिकी का एक मूलभूत सिद्धांत है, जो अज्ञात क्वांटम स्टेट की पूर्ण प्रतिलिपि बनाने को अस्वीकार करता है। यह सिद्धांत अपनी शुरुआत से ही क्वांटम क्रिप्टोग्राफी और क्वांटम कंप्यूटिंग की आधारशिला रहा है।
    • पारंपरिक कंप्यूटिंग (जहाँ फाइलों की कॉपी करना सरल होता है) के विपरीत, क्वांटम कंप्यूटर डेटा की स्वतंत्र रूप से प्रतिलिपि नहीं बना सकते हैं, जिससे नो-क्लोनिंग थ्योरम प्रभावी क्वांटम प्रणालियों के निर्माण में प्रमुख बाधक है।
    • क्वांटम सूचना मापन के दौरान नष्ट हो जाती है, इसलिये पारंपरिक तरीके से उसकी कॉपी बनाना संभव नहीं होता है। यही कारण है कि यह थ्योरम क्वांटम क्रिप्टोग्राफी और क्वांटम कंप्यूटिंग की आधारशिला रही है।
  • कमियाँ: शोधकर्त्ताओं ने यह स्थापित किया है कि क्वांटम स्टेट की ‘परिपूर्ण प्रतिलिपि’ बनाई जा सकती है, बशर्ते प्रत्येक प्रतिलिपि को क्वांटम नॉइज़ के माध्यम से अलग-अलग एन्क्रिप्ट किया जाए और इसे संबंधित डिक्रिप्शन कुंजी के बिना अभिगम्य नहीं बनाया जा सकता है।
    • कुंजी के बिना, यह प्रतिलिपि किसी भी व्यक्ति, यहाँ तक कि हमलावर के लिये भी अर्थहीन यादृच्छिक डेटा के रूप में दिखाई देती है।

      यह एन्क्रिप्शन विशेष ‘नॉइज़ क्यूबिट्स’ का उपयोग करके किया जाता है, जो लॉकिंग पैटर्न को संग्रहित करते हैं और डिक्रिप्शन कुंजी के रूप में कार्य करते हैं।

    • एन्क्रिप्शन प्रक्रिया: यह एन्क्रिप्शन विशेष 'नॉइज़ क्विबिट्स' का उपयोग करके किया जाता है, जो लॉकिंग पैटर्न को स्टोर करते हैं तथा डिक्रिप्शन की (decryption key) के रूप में कार्य करते हैं।
      • डाटा की स्वाभाविक सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु मूल क्वांटम सूचना को अनेक क्विबिट्स में वितरित कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया में प्रत्येक क्विबिट व्यक्तिगत रूप से अर्थहीन शोर (रैंडम नॉइज़) जैसा प्रतीत होता है।
  • वन-टाइम यूज़ रूल: एक बार जब एक सटीक प्रतिलिपि प्राप्त करने के लिये डिक्रिप्शन की (key) का उपयोग किया जाता है, तो वह की (key) स्थायी रूप से नष्ट हो जाती है।
    • शेष सभी प्रतियाँ अपरिवर्तनीय रूप से अपठनीय हो जाती हैं। इसका अर्थ है कि केवल एक ही सटीक रिकवरी संभव है, जो नो-क्लोनिंग थ्योरम की मूल भावना के अनुरूप है, बस इसे अलग तरह से व्याख्यायित किया गया है।
  • रणनीतिक अनुप्रयोग: इस सफलता के रिडंडेंट क्वांटम क्लाउड स्टोरेज और विश्वसनीय क्वांटम मेमोरी के विकास के लिये गहरे निहितार्थ हैं, जिससे क्लाइंट तब तक सटीक डेटा रिकवर कर सकते हैं, जब तक कम-से-कम एक सर्वर सुरक्षित रहता है।
और पढ़ें: क्वांटम प्रौद्योगिकी

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