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भारतीय अर्थव्यवस्था

स्पॉटलाइटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश

  • 21 Nov 2022
  • 14 min read

यह एडिटोरियल 19/11/2022 को ‘फाइनेंशियल एक्सप्रेस’ में प्रकाशित “The Infrastructure Imperative” लेख पर आधारित है। इसमें भारत के अवसंरचना क्षेत्र को सशक्त करने से संबद्ध प्रमुख चुनौतियों और उन्हें दूर करने के लिये किये जा सकने वाले उपायों के बारे में चर्चा की गई है।

संदर्भ

आधारभूत संरचना या अवसंरचना क्षेत्र (Infrastructure sector) भारतीय अर्थव्यवस्था के लिये एक प्रमुख चालक है। यह क्षेत्र भारत के समग्र विकास को आगे ले जाने के लिये प्रमुख रूप से उत्तरदायी है और सरकार द्वारा इस पर गहन ध्यान दिया जाता है। देश भर में आधारभूत संरचना परियोजनाओं को सुविधाजनक बनाने के लिये केंद्र के साथ-साथ राज्य स्तर पर कई पहल की गई है।

  • लेकिन विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट, अत्याधुनिक आधारभूत संरचना निर्माण के मार्ग में अभी भी कई बाधाएँ हैं। सतत उच्च विकास और एक प्रतिस्पर्द्धी विनिर्माण क्षेत्र की ओर भारत की राह सुदृढ़ और विश्वसनीय राष्ट्रीय आधारभूत ढाँचे से होकर ही गुज़रेगी।

भारत में अवसंरचना का वर्तमान परिदृश्य

  • ‘इंफ्रा-डेफिसिट इंडिया’: भारत विश्व में दूसरा सबसे बड़ा (ब्राजील के बाद) अवसंरचनागत घाटा रखने वाला देश है क्योंकि इसने 1990 के दशक की शुरुआत से ही 6% से अधिक की तीव्र गति से विकास किया है लेकिन आपूर्ति में अनुरूप वृद्धि नहीं हुई है।
    • विश्व बैंक की ‘भारत की शहरी अवसंरचना आवश्यकताओं का वित्तपोषण’ (Financing India’s Urban Infrastructure Needs) शीर्षक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2036 तक 600 मिलियन लोग भारत के शहरी क्षेत्रों में रह रहे होंगे, जो जनसंख्या के 40% भाग का प्रतिनिधित्व करेंगे।
      • इससे भारतीय शहरों की पहले से ही तनी हुई शहरी अवसंरचना और सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की संभावना है।
    • वर्तमान में भारतीय शहरों की अवसंरचनात्मक आवश्यकताओं का महज 5% ही निजी स्रोतों के माध्यम से वित्तपोषित किया जा रहा है।
  • अवसंरचना क्षेत्र का महत्त्व:
    • अवसंरचना क्षेत्र भारत के आर्थिक विकास के लिये एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य करता है क्योंकि यह टाउनशिप, हाउसिंग, बिल्ट-अप इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्माण विकास परियोजनाओं जैसे संबद्ध क्षेत्रों के विकास को संचालित करता है।
    • वैश्विक निवेशकों ने आधारभूत संरचना परियोजनाओं के लिये भारत को अपने शीर्ष गंतव्य स्थलों में से एक के रूप में देखना शुरू कर दिया है। भारत अपने युवा उभार, मध्यम वर्ग के उदय और विशाल घरेलू बाज़ार के दम पर अवसंरचनात्मक परियोजनाओं पर उच्च प्रतिफल या रिटर्न दर की की पेशकश करता है।
  • संबंधित पहलें:
    • सरकार ने वित्त वर्ष 2020-25 की अवधि के लिये अवसंरचना विकास को समर्थन देने हेतु राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) शुरू की है, जहाँ शहरी अवसंरचना प्रमुख फोकस क्षेत्रों में से एक है।
    • सरकार ने लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने के लिये आधारभूत संरचना परियोजनाओं की समन्वित योजना और निष्पादन के उद्देश्य से महत्त्वाकांक्षी गति शक्ति योजना भी शुरू की है।
    • राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (National Investment and Infrastructure Fund- NIIF) एक सरकार समर्थित इकाई है, जो देश के अवसंरचना क्षेत्र को दीर्घकालिक पूंजी प्रदान करने के लिये स्थापित की गई है। इसे दिसंबर 2015 में श्रेणी-II वैकल्पिक निवेश कोष के रूप में स्थापित किया गया था।
    • नवंबर 2021 में भारत, इज़राइल, अमेरिका और यूएई (I2U2) ने क्षेत्र में अवसंरचना विकास परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित करने तथा द्विपक्षीय सहयोग को मज़बूत करने के लिये एक नया चतुर्भुज आर्थिक मंच स्थापित किया।
    • मार्च 2021 में भारत में अवसंरचना परियोजनाओं को निधि देने के लिये राष्ट्रीय अवसंरचना वित्तपोषण और विकास बैंक (National Bank for Financing Infrastructure and Development- NaBFID) की स्थापना के लिये संसद में इस आशय का एक विधेयक पारित किया गया।

संबंधित चुनौतियाँ

  • भारत की सबसे बड़ी चुनौती विशाल अवसंरचनागत वित्तीय अंतराल है, जिसके जीडीपी के 5% से अधिक होने का अनुमान है।
  • भूमि अधिग्रहण, आक्रामक बोली लगाना और गैर-निष्पादित परिसंपत्तियाँ अवसंरचनात्मक PPPs (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) के लिये प्रमुख चुनौतियाँ हैं ।
  • भारत तनावग्रस्त परिसंपत्तियों के उच्च स्तर का सामना कर रह है और अर्थव्यवस्था के भविष्य के विकास के लिये सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिये ऋण वृद्धि को आधार के रूप में बहाल करने की आवश्यकता है।
    • बैंकों में तनावग्रस्त परिसंपत्तियों के साथ-साथ बैंकों की छोटी पूंजी के कारण इन परिसंपत्तियों पर अतिरिक्त और संभावित रूप से गंभीर क्षति की स्थिति बन सकती है।
  • इसके अलावा, क्रेडिट ब्याज दरों की स्थिरता की कमी से क्षेत्र में निवेश के लिये एक उल्लेखनीय जोखिम उत्पन्न हुआ है।
    • यह तथ्य कि भारत में अवसंरचना निवेश आम तौर पर USD पर अपेक्षित प्रतिफल/रिटर्न पर आधारित होता है न कि उपयोगकर्त्ता शुल्क पर, एक असंतुलन का सृजन करता है और देश में विदेशी अवसंरचना निवेश के कुल प्रवाह को प्रभावित करता है।

Roadblocks

अवसंरचना क्षेत्र को सशक्त करने के लिये क्या उपाय किये जा सकते हैं?

  • नीति/नियामक ढाँचे में निरंतरता सुनिश्चित करना: निविदा प्रक्रिया में एक बेहतर नियामक वातावरण और निरंतरता की आवश्यकता है। विभिन्न सरकारी विभागों में निरंतरता और नीतिगत सामंजस्य की कमी को प्राथमिकता से संबोधित किया जाना चाहिये।
    • तनावग्रस्त परिसंपत्तियों की समस्या से निपटने के लिये सरकार और RBI के मध्य एक समग्र दृष्टिकोण होना चाहिये। गैर-निष्पादित संपत्तियों, PSUs के पुनरुद्धार के लिये सभी क्षेत्रों में एक समर्पित नीति का निर्माण करने की आवश्यकता है।
  • उचित उपयोगकर्त्ता शुल्क: अवसंरचन वित्तपोषण, अवसंरचना सेवा प्रदाताओं की वित्तीय व्यवहार्यता और पर्यावरण एवं संसाधन उपयोग संवहनीयता को बढ़ाने के लिये यह आवश्यक है।
    • उपयोगकर्त्ता शुल्क महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि देश भर के कई क्षेत्रों में आंशिक रूप से शून्य या बहुत कम उपयोगकर्त्ता शुल्क के कारण कीमती संसाधनों (जैसे भूजल) का अत्यधिक उपयोग एवं अपव्यय होता है।
    • उचित उपयोगकर्त्ता मूल्यों से प्रेरित पर्यावरणीय संवहनीयता एवं संसाधन उपयोग दक्षता के अलावा इस नीति प्राथमिकता में अपार संसाधन सृजन क्षमता भी है।
  • अवसंरचना का स्वायत्त विनियमन: चूँकि भारत और विश्व निजी भागीदारी के लिये अधिकाधिक क्षेत्रों को खोल रहे हैं, निजी क्षेत्र अनिवार्य रूप से स्वायत्त अवसंरचना विनियमन की मांग करेगा।
    • विश्वव्यापी प्रवृत्ति बहु-क्षेत्रीय नियामकों की ओर है क्योंकि आधारभूत संरचना क्षेत्रों में नियामक भूमिका आम है और ऐसे संस्थान नियामक क्षमता का निर्माण करते हैं, संसाधनों का संरक्षण करते हैं और नियामक कब्जे को रोकते हैं।
  • संपत्ति पुनर्चक्रण (AR) और BAM: BAM (Brownfield Asset Monetisation) का मूल विचार ब्राउनफील्ड AR के माध्यम से अवसंरचनागत संसाधनों को बढ़ाना है ताकि डी-रिस्क्ड ब्राउनफील्ड सार्वजनिक क्षेत्र की संपत्तियों में बंधी धनराशि को मुक्त करके त्वरित ग्रीनफील्ड निवेश किया जा सके।
    • इन परिसंपत्तियों को एक ट्रस्ट (InvITs) या एक कॉर्पोरेट संरचना (TOT मॉडल) में स्थानांतरित किया जा सकता है, जो कैपिटल कंसिडरेशन (जो इन अंतर्निहित परिसंपत्तियों से भविष्य के नकदी प्रवाह के मूल्य पर कब्जा करता है) के बजाय संस्थागत निवेशकों से निवेश प्राप्त करता है।
    • भारत के पास अवसंरचना क्षेत्रों में ब्राउनफील्ड संपत्तियों का एक बड़ा भंडार है।
  • घरेलू फंड का उपयोग: भारतीय पेंशन फंड जैसे घरेलू स्रोत जो निष्क्रिय पड़े हुए हैं, यदि कुशलता से उपयोग किये जाएँ तो इस क्षेत्र को बड़ा बढ़ावा मिल सकता है।
    • भारत अवसंरचना विकास को बढ़ावा देने के लिये घरेलू धन के कुशल उपयोग पर कनाडा, नीदरलैंड, ऑस्ट्रेलिया एवं ऐसे अन्य देशों के अभ्यासों का अनुकरण कर सकता है।
  • वैश्विक नेतृत्व का लाभ उठाना: भारत दिसंबर 2022 से G20 की अध्यक्षता ग्रहण कर रहा है। विभिन्न G20 देशों ने अपनी अध्यक्षता में अवसंरचना के लिये एजेंडा निर्धारित किया है, जैसे कि परिसंपत्ति वर्ग के रूप में अवसंरचना के लिये रोडमैप (अर्जेंटीना, 2018), गुणवत्तापूर्ण अवसंरचना निवेश के सिद्धांत (जापान, 2019), इंफ्राटेक (सऊदी अरब, 2020) और प्रतिफल/रिकवरी के लिये संवहनीय अवसंरचना का वित्तपोषण (इटली, 2021)।
    • G20 की अध्यक्षता भारत के लिये एक अवसर है कि वह स्वयं के लिये और विश्व के लिये अवसंरचना एजेंडे को निर्धारित करे।

अभ्यास प्रश्न: ‘‘वर्ष 2025 तक 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिये अवसंरचना विकास समय की आवश्यकता है।’’ टिप्पणी कीजिये।

  यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)  

प्रारंभिक परीक्षा:

Q 1. 'राष्ट्रीय निवेश और बुनियादी अवसंरचना कोष' के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?  (वर्ष 2017)

  1. यह नीति आयोग का एक अंग है।
  2. वर्तमान में इसके पास `4,00,000 करोड़ का कोष है।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

 (A) केवल 1
 (B) केवल 2
 (C) 1 और 2 दोनों
 (D) न तो 1 और न ही 2

 उत्तर: (D)


Q 2. भारत में "सार्वजनिक रूप से महत्त्वपूर्ण बुनियादी अवसंरचना" शब्द का प्रयोग किसके संदर्भ में किया जाता है (वर्ष 2020)

(A) डिजिटल सुरक्षा बुनियादी अवसंरचना
(B) खाद्य सुरक्षा बुनियादी अवसंरचना
(C) स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा हेतु बुनियादी अवसंरचना
(D) दूरसंचार और परिवहन बुनियादी अवसंरचना

उत्तर: (A)


मुख्य परीक्षा

Q. अधिक तीव्र और समावेशी आर्थिक विकास के लिए बुनियादी अवसंरचना में निवेश आवश्यक है।” भारत के अनुभव के आलोक में चर्चा करें। (वर्ष 2021)

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