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सामाजिक न्याय

कार्यबल में महिलाओं की घटती संख्या

  • 14 Aug 2018
  • 2 min read

चर्चा में क्यों

कार्यबल में महिलाओं की तेज़ी से गिरावट के बाद नियोक्ताओं द्वारा अधिक से अधिक महिलाओं को रोज़गार दिलाने के उद्देश्य से श्रम मंत्रालय ने प्रधानमंत्री रोज़गार प्रोत्साहन योजना (PMRPY) को वर्तमान तीन साल से बढाकर पाँच वर्ष तक ज़ारी रखने की योजना बनाई है।

प्रमुख बिंदु

  • छोटे एवं मध्यम उद्यमों के साथ-साथ सूक्ष्म व्यवसायों को और अधिक महिलाओं को कार्य पर रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इस संदर्भ में सरकार द्वारा नई प्रातिभाओं को शामिल करने वाले नियोक्ताओं को कर्मचारियों को दिये जाने वाले पेंशन और भविष्य निधि के लिये 12 प्रतिशत का योगदान दिया जाता है।
  • वर्तमान में नियोक्ताओं के लिये सब्सिडी तीन वर्ष के लिये है जो अगस्त 2016 में लॉन्च की गई थी। इसके अंतर्गत 15000 रुपए मासिक वेतन के साथ अप्रैल 2016 से योगदान करने वाले सभी कुशल और अकुशल श्रमिक शामिल हैं।
  • उल्लेखनीय है कि 5 जुलाई तक, 61.12 लाख कर्मचारियों को पीएमआरपीवाई के तहत नामांकित किया गया है।
  • इसे महिलाओं के लिये और दो वर्ष तक विस्तारित किये जाने के लिये 25000 करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च होने का शुरुआती अनुमान लगाया गया है।
  • पुरुषों और महिलाओं दोनों की भर्ती के लिए मौजूदा तीन साल की योजना हेतु लगभग 18,000 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है, जिसमें 10, 600 करोड़ रुपए केंद्रीय बज़ट के हिस्से के रूप में शामिल है।
  • भारत की महिला कार्यबल भागीदारी दर दक्षिण एशिया में  सबसे कम है।
  • 2018 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार महिलाओं का रोज़गार 2005-2006 में 36 प्रतिशत से घटकर 24 प्रतिशत रह गया है।
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