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भारतीय अर्थव्यवस्था

वेतन दर सूचकांक (WRI)

  • 04 Dec 2021
  • 5 min read

प्रिलिम्स के लिये:

वेतन दर सूचकांक, अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन, राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग

मेन्स के लिये:

वेतन दर सूचकांक से संबंधित प्रमुख तथ्य एवं इसके आधार वर्ष में परिवर्तन का कारण।

चर्चा में क्यों?

हाल ही में सरकार ने वेतन दर सूचकांक (WRI) के लिये आधार वर्ष को संशोधित कर 2016 कर दिया है जो 1963-65 के आधार वर्ष से संबंधित पुरानी शृंखला को परिवर्तित करेगा।

  • वेतन दर सूचकांक संख्या समय की अवधि में वेतन दरों में सापेक्ष परिवर्तनों को मापती है, किसी उद्योग में उच्च या निम्न वेतन दर सूचकांक अन्य उद्योगों की तुलना में उस उद्योग में उच्च या निम्न वेतन दर को इंगित नहीं करता है।
  • एक आधार वर्ष एक आर्थिक या वित्तीय सूचकांक में वर्षों की शृंखला में से पहला वर्ष होता है और आमतौर पर इसे 100 के स्वैच्छिक स्तर पर निर्धारित किया जाता है।

WRI

प्रमुख बिंदु

  • परिचय:
    • श्रम और रोज़गार मंत्रालय ने आधार वर्ष 2016 के साथ वेतन दर सूचकांक (डब्ल्यूआरआई) की एक नई शृंखला जारी की है, जिसे मंत्रालय के एक संलग्न कार्यालय श्रम ब्यूरो द्वारा संकलित और अनुरक्षित किया जा रहा है।
    • यह अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन और राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग की सिफारिशों पर आधारित है।
    • WRI पर नई शृंखला मौजूदा वार्षिक शृंखला के स्थान पर अर्द्धवार्षिक आधार पर (हर वर्ष जनवरी और जुलाई में) संकलित की गई है।
    • नए WRI बास्केट में (2016=100) पुरानी WRI शृंखला (1963-65=100) की तुलना में व्यवसायों और उद्योगों के मामले में दायरे और कवरेज को बढ़ाया गया है।
    • नई शृंखला में शामिल किये गए 37 उद्योगों में कपड़ा वस्त्र, जूते और पेट्रोलियम सहित विनिर्माण क्षेत्र के 16 नए उद्योगों को जोड़ा गया है।
    • नई शृंखला में खनन क्षेत्र को तीन अलग-अलग प्रकार के खनन अर्थात् कोयला, धातु और तेल का अधिक प्रतिनिधित्व प्रदान करने हेतु नए ‘बास्केट’ में अभ्रक खदान उद्योग के स्थान पर तेल खनन उद्योग को प्रतिस्थापित किया गया है।
    • कुल 3 बागान उद्योग- चाय, कॉफी और रबर को नए WRI बास्केट में जोड़ा गया है।
    • शीर्ष पाँच उद्योगों- मोटर वाहन, कोयले की खदानें, कपड़ा, लोहा और इस्पात तथा सूती वस्त्र का समग्र तौर पर 46% हिस्सा है।
  • संभावित लाभ:
    • संशोधित आधार अधिक प्रतिनिधित्व प्रदान करेगा और अन्य मानकों के साथ न्यूनतम मजदूरी एवं राष्ट्रीय न्यूनतम मज़दूरी निर्धारित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
    • सरकार समय-समय पर प्रमुख आर्थिक संकेतकों के लिये आधार वर्ष में संशोधन करती है, ताकि अर्थव्यवस्था में बदलाव को प्रतिबिंबित किया जा सके और श्रमिकों के वेतन पैटर्न को सही ढंग से दर्ज किया जा सके।
    • यह मानव संसाधन रणनीति पर निर्णय लेने हेतु नियोक्ताओं को उपयोगी सुझाव प्रदान करता है।
  • वेतन दर सूचकांक 2020:
    • सभी 37 उद्योगों के लिये अखिल भारतीय वेतन दर वर्ष 2020 (दूसरी छमाही) में 119.7 थी जो वर्ष 2020 (पहली छमाही) के सूचकांक की तुलना में 1.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है।
    • उच्चतम वेतन दर सूचकांक:
      • दवा क्षेत्र में सर्वाधिक वेतन दर सूचकांक दर्ज किया गया, जिसके बाद चीनी, मोटर साइकिल, जूट वस्त्र और चाय बागान का स्थान रहा।
    • न्यूनतम वेतन दर सूचकांक:
      • रबर प्लांटेशन में सबसे कम वेतन दर सूचकांक दर्ज किया गया, जिसके बाद कागज़, कास्टिंग और फोर्जिंग, ऊनी वस्त्र और सिंथेटिक वस्त्र का स्थान रहा।

स्रोत: पीआईबी

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