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जीव विज्ञान और पर्यावरण

वर्चुअल क्‍लाइमेट एक्‍शन मीटिंग

  • 08 Jul 2020
  • 6 min read

प्रीलिम्स के लिये:

पेरिस समझौता, संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज

मेन्स के लिये:

जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने हेतु इस दिशा में भारत के प्रयास 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में जलवायु परिवर्तन के दुष्‍प्रभावों के खिलाफ एकजुट कार्रवाई करने के लिये वि‍भिन्‍न देशों के पर्यावरण मंत्रियों के मध्य वर्चुअल क्‍लाइमेट एक्‍शन मीटिंग (Virtual Climate Action Meeting) के चौथे संस्‍करण का आयोजन किया गया।

प्रमुख बिंदु:

  • वर्चुअल क्‍लाइमेट एक्‍शन मीटिंग का उद्देश्य जलवायु परिर्वतन से निपटने की दिशा में सामूहिक प्रयासों की प्रगति को सुनिश्चित करना था।
  • बैठक में शामिल सभी पक्षों द्वारा ‘पेरिस समझौते’ (Paris Agreement) के अनुरूप आर्थिक सुधार योजनाओं को कार्यान्वित करने के तौर तरीकों तथा जलवायु परिवर्तन के खिलाफ समुचित कार्रवाई सुनिश्चित करने पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
  • इस बैठक में ‘संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज’ (United Nations Framework Convention on Climate Change- UNFCCC) के तहत पेरिस समझौते को पूरी तरह से लागू करने पर चर्चा को आगे बढ़ाया गया तथा जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक स्‍तर पर राजनीतिक प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।
  • यूरोपीय संघ, चीन तथा कनाड़ा द्वारा इस बैठक की सह अध्‍यक्षता की गई।
  • भारत द्वारा विकसित देशों से अनुरोध  किया गया कि वे UNFCCC तथा पेरिस समझौते के तहत की गई प्रतिबद्धताओं के तहत विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन की समस्‍या से निपटने के लिये वित्तीय एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराए।
  •  भारत द्वारा इस और भी ध्यान आकर्षित किया गया कि विकसित देशों द्वारा वर्ष 2020 तक 1 ट्रिलियन डॉलर की मदद का वादा अभी तक पूरा नहीं किया गया है।
  • बैठक में लगभग 30 देशों के मंत्रियों एवं प्रतिनिधियों ने भाग लिया। 
  • कोरोना महामारी को देखते हुए पहली बार यह बैठक र्चुअल तरीके से आयोजित की गई। 

भारत का प्रयास: 

  • बैठक में  भारत द्वारा जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिये अब तक की गई अपनी महत्त्वपूर्ण कार्यवाहियों के बारे में जानकारी साझा की गई  है तथा भविष्य में भी इस दिशा में  प्रयास जारी रखने की बात कही गई । 
  • भारत ने वर्ष  2005 और वर्ष 2014 के बीच अपने सकल घरेलू उत्पाद की तुलना में उत्सर्जन गहनता में 21% की कमी की है। 
  • पिछले 5 वर्षों  में भारत की अक्षय ऊर्जा स्थापित क्षमता में 226% की वृद्धि हुई है जो वर्तमान में 87 गीगावॉट से अधिक है।
  •  बिजली उत्पादन की स्थापित क्षमता में गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी मार्च 2015 के 30.5% से बढ़कर मई 2020 में 37.7% हो गई है।
  • वर्तमान सरकार द्वारा नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता लक्ष्य 450 गीगावॉट तक बढ़ाने की आकांक्षा व्‍यक्‍त की गई है।
  • सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में 8 करोड़ एलपीजी कनेक्शन वितरित किये गए हैं जो ग्रामीण लोगों को खाना पकाने हेतु स्वच्छ ईंधन तथा स्वस्थ वातावरण प्रदान करते हैं।
  •  देश का कुल वन और वृक्ष आच्छादन क्षेत्र 8,07,276 वर्ग किलोमीटर है जो देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 24.56% है।
  •  उजाला योजना के तहत 36 करोड़ से अधिक एलईडी बल्ब वितरित किये गए हैं, जिसके कारण प्रति वर्ष लगभग 47 अरब यूनिट बिजली की बचत हुई है तथा प्रति वर्ष कार्बन उत्‍सर्जन में 38 मिलियन टन की कमी आई है। 
  • बैठक में स्‍वच्‍छ ईंधन की दिशा में भारत के प्रयासों का ज़िक्र करते हुए बताया गया कि भारत द्वारा 1 अप्रैल, 2020 तक भारत स्टेज-VI ( Bharat Stage-VI) उत्सर्जन मानकों को पूरे देश में लागू कर लिया गया है जबकि इसके लिये वर्ष 2024 तक की समय सीमा निर्धारित की गई थी।
  • देश के हरित पहलों का जिक्र करते हुए कहा गया कि इसके तहत देश में कोयला उपकर लगाया गया है। 
  • स्‍मार्ट सिटी मिशन के तहत ‘क्लाइमेट स्मार्ट सिटीज़ असेसमेंट फ्रेमवर्क’ 2019 शुरू किया गया है।  
    • यह  शहरों तथा  शहरी क्षेत्रों के लिये शमन एवं अनुकूलन उपायों के माध्यम से जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिये एक स्पष्ट रोडमैप प्रदान करता है। 

स्रोत: पीआईबी 

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