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जैव विविधता और पर्यावरण

सुंदरबन

  • 29 Mar 2024
  • 14 min read

प्रिलिम्स:

सुंदरबन, एश्चुरिन क्रोकोडाइल, वॉटर मॉनिटर लिज़ार्ड , गंगा डॉल्फिन, ओलिव रिडले कछुआ, बंगाल की खाड़ी

मेन्स:

सुंदरबन, सुंदरबन से संबंधित चुनौतियाँ, प्रकृति-आधारित समाधान।

स्रोत: डाउन टू अर्थ 

चर्चा में क्यों?

सुंदरबन को स्वच्छ जल की कमी, माइक्रोप्लास्टिक्स और रसायनों से प्रदूषण तथा तटीय कटाव सहित कई पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिससे इसकी सुरक्षा के लिये स्थायी समाधान तलाशना महत्त्वपूर्ण हो जाता है।

सुंदरबन क्या है?

  • परिचय:
    • सुंदरबन विश्व के सबसे बड़े मैंग्रोव वनों का आवास है, जो बंगाल की खाड़ी पर गंगा, ब्रह्मपुत्र और मेघना नदियों के डेल्टा पर स्थित है।
      • मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में भूमि तथा समुद्र के बीच एक विशेष वातावरण है।
  • वनस्पति जीव:
    • यह वनस्पतियों की 84 प्रजातियों को आश्रय प्रदान करता है, जिनमें 26 मैंग्रोव प्रजातियाँ, जीवों की 453 प्रजातियाँ, मछलियों की 120 प्रजातियाँ, पक्षियों की 290 प्रजातियाँ, स्तनधारियों की 42 प्रजातियाँ, 35 सरीसृप और आठ उभयचर प्रजातियाँ शामिल हैं। 12 मिलियन से अधिक लोग - भारत में 4.5 मिलियन और बांग्लादेश में 7.5 मिलियन - इस डेल्टा पारिस्थितिकी तंत्र पर निर्भर करते हैं।
    • सुंदरबन में कई जानवरों की प्रजातियाँ प्राकृतिक रूप से निवास करती हुई पाई गई हैं, जहाँ वे भोजन करते हैं, प्रजनन करते हैं और आश्रय पाते हैं।
  • संरक्षण:
    • सुंदरबन का 40% हिस्सा भारत में और शेष बांग्लादेश में स्थित है। सुंदरबन को वर्ष 1987 (भारत) और 1997 (बांग्लादेश) में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल नामित किया गया था।
    • जनवरी 2019 में रामसर कन्वेंशन के तहत भारत के सुंदरबन वेटलैंड को 'अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व के वेटलैंड' के रूप में मान्यता दी गई थी।
    • प्रोजेक्ट टाइगर: प्रोजेक्ट टाइगर सुंदरबन के अद्वितीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण में सबसे महत्त्वपूर्ण कदमों में से एक है, क्योंकि इसने रॉयल बंगाल टाइगर की आबादी को संरक्षित करके संपूर्ण जंगल की रक्षा की है।
    • सुंदरबन के संरक्षण पर भारत और बांग्लादेश के बीच समझौता ज्ञापन: वर्ष 2011 में भारत और बांग्लादेश दोनों ने सुंदरबन की निगरानी तथा संरक्षण की आवश्यकता को पहचानते हुए सुंदरबन के संरक्षण पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये।
    • बायोस्फीयर रिज़र्व:

सुंदरबन के सामने क्या चुनौतियाँ हैं?

  • ताज़े जल की कमी: 
    • नदियों की मुख्य रूप से खारी प्रकृति के कारण सुंदरबन में मीठे पानी की कमी का अनुभव होता है, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र और निवासियों की आजीविका दोनों प्रभावित होती हैं।
      • विशेषज्ञों की टिप्पणियों के अनुसार, ताज़ा भूजल 250 मीटर से अधिक गहराई में पाया जा सकता है और कुछ मामलों में, सुंदरबन में भूजल प्रकृति में खारा है।
  • प्रदूषण और कटाव:
    • माइक्रोप्लास्टिक्स, औद्योगिक गतिविधियों से रसायन और अपशिष्ट निपटान सहित विभिन्न स्रोतों से प्रदूषण, सुंदरबन के नाज़ुक पारिस्थितिकी तंत्र तथा इसके निवासियों के स्वास्थ्य को खतरे में डालता है।
      • कुछ अध्ययन रिपोर्टों में यह पाया गया कि बांग्लादेश और भारत की विभिन्न नदियों से प्रति वर्ष चार मिलियन टन माइक्रोप्लास्टिक बंगाल की खाड़ी तथा सुंदरबन में छोड़ा जाता है।
    • सुंदरबन मैंग्रोव प्रणाली में बहुत कम ताज़ा (मीठा) पानी प्रवेश करता है। प्रभावित करने वाले कुछ प्रमुख कारक नदी कटाव और वन संसाधनों का दोहन हैं।
      • इसके अलावा मैंग्रोव वनीकरण के लिये गैर-वन भूमि का उपयोग स्थिति को और भी खराब कर देता है।
  • समुद्री स्तर में वृद्धि:
    • अन्य तटीय क्षेत्रों की तुलना में सुंदरबन को समुद्र के स्तर में लगभग दोगुनी वृद्धि का सामना करना पड़ता है।
    • साथ ही इस क्षेत्र में चक्रवातों की बढ़ती आवृत्ति और तीव्रता इसकी कार्बन पृथक्करण क्षमता तथा इस मैंग्रोव वन की अन्य पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के लिये एक गंभीर खतरा पैदा करती है।
    • बढ़ते तापमान, समुद्र का स्तर और जलवायु परिवर्तन के कारण जैवविविधता में परिवर्तन सुंदरबन पारिस्थितिकी तंत्र तथा इसके निवासियों पर अतिरिक्त दबाव डाल रहे हैं।
  • मानव-वन्यजीव संघर्ष:
    • मनुष्यों और जानवरों के बीच संघर्ष, विशेष रूप से बाघ जैसी प्रजातियों के साथ, संरक्षण प्रयासों तथा स्थानीय समुदायों की सुरक्षा दोनों के लिये एक महत्त्वपूर्ण चुनौती है।
  • संदूषण:
    • बांग्लादेश के मोंगला बंदरगाह और भारत के लेदर एस्टेट के कारण हाइड्रोकार्बन तथा समुद्री पेंट जैसे रसायन नदियों एवं जल पारिस्थितिकी तंत्र को प्रदूषित करते हैं।

सुंदरबन की सुरक्षा हेतु क्या किया जा सकता है?

  • स्ट्रीमबैंक की सुरक्षा:
    • वेटिवर जैसी गैर-स्थानीय प्रजातियों को शामिल करने के बजाय, वाइल्ड राइस (पोर्टेरेसिया कोर्कटाटा), मायरियोस्टैच्या वाइटियाना, बिस्किट ग्रास (पास्पलम वेजिनाटम) और साल्ट काउच ग्रास (स्पोरोबोलस वर्जिनिकस) जैसी देशी घास प्रजातियों की खेती करने से स्ट्रीमबैंक को स्थिर करने तथा कटाव को रोकने में मदद मिल सकती है।
      • वेटिवर स्थानीय प्रजातियाँ नहीं हैं और न ही लवण-सहिष्णु (Salt-Tolerant) हैं।
  • सतत् कृषि को बढ़ावा देना:
    • मृदा-सहिष्णु (Soil-Tolerant) धान की किस्मों जैसे दरसल, नोना बोकरा, तालमुगुर आदि की खेती को प्रोत्साहित करना और जैविक कृषि प्रथाओं को बढ़ावा देना पर्यावरणीय प्रभाव को कम करते हुए कृषि उत्पादकता को बढ़ा सकता है।
    • इसके अतिरिक्त जैविक कृषि को बढ़ावा देने से किसानों को पर्यावरणीय स्वास्थ्य बनाए रखते हुए अपनी आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
      • वर्षा जल संचयन और वाटरशेड विकास पहलों को लागू करने से कृषि उत्पादन में तथा वृद्धि होगी।
  • गैर-काष्ठ वन संसाधनों का उपयोग:
    • आर्थिक विकास के लिये गैर-काष्ठ वन संसाधनों का उपयोग प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को सुनिश्चित करते हुए सतत् विकास को बढ़ावा दे सकता है।
      • मैंग्रोव जलवायु संरक्षक और आजीविका के स्रोत हो सकते हैं। इस क्षेत्र में बायेन, गर्जन, गोलपाटा, होगला, हेतल, कांकरा, कुंभी, कायोरा, नोना झाऊ, पोसुर, गोरान, गेवोया, सुंदरी आदि कई मैंग्रोव हैं।
      • इन मैंग्रोवों का आर्थिक के साथ-साथ औषधीय महत्त्व भी है। हेतल, कायोरा और गोलपाटा के ऐसे फल व्यावसायिक बाज़ारों में बेचे जा सकते हैं।
        • होगला के फूलों का उपयोग खाद्य उद्योग में स्वादिष्ट व्यंजन बनाने के लिये किया जा सकता है और सूखी पत्तियों से रस्सियाँ तैयार की जा सकती हैं।
  • अपशिष्ट जल का उपचार:
    • अपशिष्ट जल उपचार के लिये लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया और प्रकाश संश्लेषक बैक्टीरिया सहित प्राकृतिक प्रक्रियाओं तथा सूक्ष्मजीवों का उपयोग, पानी की गुणवत्ता एवं पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद कर सकता है।
  • जैवविविधता संरक्षण:
    • मेजर कार्प जैसी स्वदेशी मछली प्रजातियों सहित जैवविविधता के संरक्षण को बढ़ावा देना, सुंदरबन के पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य को बहाल करने और बनाए रखने में सहायता कर सकता है।
  • भारत-बांग्लादेश सहयोग:  
    • भारत-बांग्लादेश संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group - JWG) को सुंदरबन की जलवायु लचीलेपन और इस पारिस्थितिकी तंत्र पर निर्भर समुदायों के कल्याण की योजना बनाने तथा लागू करने के लिये एक संयुक्त उच्च शक्ति बोर्ड एवं अंतःविषय विशेषज्ञों के एक समूह में परिवर्तित किया जा सकता है।
    • संस्थागत तंत्र को कई क्षेत्रों में काम करने के लचीलेपन के साथ मिश्रित किया जाना चाहिये, जिससे ज़मीनी मुद्दों को प्रभावी ढंग से निपटने के लिये स्थानीय लोगों को शामिल किया जा सके।

निष्कर्ष

  • ये प्रकृति-आधारित समाधान सुंदरबन पारिस्थितिकी तंत्र के सामने आने वाली जटिल चुनौतियों का समाधान करने के लिये प्रकृति के विरुद्ध नहीं, बल्कि उसके साथ काम करने के महत्त्व पर ज़ोर देते हैं।
  • विकास योजनाओं और नीतियों में प्रकृति आधारित दृष्टिकोण को एकीकृत करके, हितधारक सुंदरबन तथा इसके निवासियों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य एवं स्थिरता को बढ़ावा दे सकते हैं।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न 

प्रिलिम्स:

Q. निम्नलिखित संरक्षित क्षेत्रों पर विचार कीजिये: (2012)

  1. बांदीपुर
  2.  भितरकनिका
  3.  मानसी
  4.  सुंदरबन

उपर्युक्त में से किसे टाइगर रिज़र्व घोषित किया गया है?

 (A) केवल 1 और 2
(B) केवल 1, 3 और 4
(C) केवल 2, 3 और 4
(D) 1, 2, 3 और 4

 उत्तर: (B)


Q. भारत की जैवविविधता के संदर्भ में सीलोन फ्रॉगमाउथ, कॉपरस्मिथ बार्बेट, ग्रे-चिन्ड मिनिवेट और ह्वाइट-थ्रोटेड रेडस्टार्ट क्या है?

(a) पक्षी
(b) प्राइमेट
(c) सरीसृप
(d) उभयचर

उत्तर: (a)


मेन्स:

प्रश्न."भारत में आधुनिक कानून की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पर्यावरणीय समस्याओं का संवैधानिकीकरण है।" सुसंगत वाद विधियों की सहायता से इस कथन की विवेचना कीजिये। (2022)

प्रश्न. "विभिन्न प्रतियोगी क्षेत्रों और साझेदारों के मध्य नीतिगत विरोधाभासों के परिणामस्वरूप पर्यावरण के संरक्षण तथा उसके निम्नीकरण की रोकथाम' अपर्याप्त रही है।" सुसंगत उदाहरणों सहित टिप्पणी कीजिये। (2018)

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