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सामाजिक न्याय

संवाद (SAMVAD) कार्यक्रम

  • 16 Aug 2021
  • 8 min read

प्रिलिम्स के लिये

संवाद कार्यक्रम, पीएम-केयर्स फॉर चिल्ड्रन, मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों के प्रबंधन पर दिशा-निर्देश, मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम (MHCA) 2017

मेन्स के लिये

मानसिक स्वास्थ्य

चर्चा में क्यों?

हाल ही में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने संवाद कार्यक्रम का दूसरा चरण शुरू किया है। दूसरा चरण, कार्यक्रम के एक वर्ष पूरा होने पर शुरू किया गया था।

  • इस कार्यक्रम का उद्देश्य उन बच्चों के लिये मानसिक स्वास्थ्य तक पहुँच बनाना है जो बच्चे तस्करी के शिकार या अनाथ हैं।
  • इससे पहले सरकार ने कोविड-19 के कारण अनाथ हुए सभी बच्चों के लिये एक विशेष “पीएम-केयर्स फॉर चिल्ड्रन” योजना की घोषणा की थी।

प्रमुख बिंदु

  • संवाद  (SAMVAD)- कमज़ोर परिस्थितियों में बच्चों के लिये समर्थन, सहायता और मानसिक स्वास्थ्य उपायों और संकट (SAMVAD) कार्यक्रम है।
  • वित्तपोषण: इस पहल का वित्तपोषण महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा किया गया है।
  • कार्यान्वयन निकाय: इसका नेतृत्व राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (NIMHANS) द्वारा किया जाता है।
    • NIMHANS मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान शिक्षा का शीर्ष केंद्र है। यह स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत स्वायत्त रूप से संचालित है।
    • हाल ही में गृह मंत्रालय के अनुरोध पर NIMHANS ने कैदियों और जेल कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों के प्रबंधन पर दिशा-निर्देशों का एक सेट जारी किया।
  • उद्देश्य
    • यह एक राष्ट्रीय पहल और एकीकृत संसाधन है जो कठिन परिस्थितियों में बच्चों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोसामाजिक देखभाल का कार्य करता है।
    • इसमें बचपन के आघात, कानून के उल्लंघन में बच्चों के लिये हस्तक्षेप, बच्चे और किशोर मनोरोग में फोरेंसिक तथा मानसिक स्वास्थ्य पर एक विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम शामिल है।
    • गोद लेने के संदर्भ में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य सहायता, सुरक्षा तथा देखभाल।
    • यह पहल बाल संरक्षण कार्यकर्त्ताओं, टेली-परामर्शदाताओं, शिक्षकों, कानूनी पेशेवरों सहित करीब 1 लाख हितधारकों को प्रशिक्षित कर संकटग्रस्त बच्चों के लिये मुकाबला तंत्र प्रदान कर रही है।
  • स्थानीय निकायों के साथ एकीकरण: संवाद पंचायती राज प्रणाली के साथ बाल संरक्षण और मानसिक स्वास्थ्य को एकीकृत करने तथा जागरूकता पैदा करने व ज़मीनी स्तर पर सेवा वितरण में सुधार के लिये देश भर के आकांक्षी ज़िलों में काम शुरू करने हेतु तैयार है।

मानसिक स्वास्थ्य

परिचय

  • मानसिक स्वास्थ्य का आशय कल्याण की ऐसी स्थिति से है, जिसमें एक व्यक्ति अपनी क्षमताओं का एहसास करता है, जीवन के सामान्य तनावों का सामना कर सकता है, उत्पादक रूप से काम कर सकता है और अपने समुदाय में योगदान करने में सक्षम है।
  • शारीरिक स्वास्थ्य की तरह ही मानसिक स्वास्थ्य भी जीवन के प्रत्येक चरण में- बचपन और किशोरावस्था से लेकर वयस्कता तक महत्त्वपूर्ण है।

भारतीय परिदृश्य

  • द लैंसेट साइकियाट्री द्वारा फरवरी 2020 में प्रकशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष  2017 तक भारत में 197.3 मिलियन लोग मानसिक विकारों से ग्रस्त थे।
  • शीर्ष मानसिक रोगों में अवसादग्रस्तता विकार (45.7 मिलियन) और चिंता एवं तनाव संबंधी विकार (44.9 मिलियन) शामिल थे।
  • भारत में कुल बीमारियों में मानसिक विकारों की हिस्सेदारी ‘विकलांगता समायोजित जीवन वर्ष’ (Disability Adjusted Life Years- DALY) के आधार पर वर्ष 1990 में 2.5 प्रतिशत थी तथा वर्ष 2017 में यह बढ़कर 4.7 प्रतिशत हो गई। 

सरकार द्वारा उठाए गए कदम:

  • राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (NMHP): मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में मानसिक विकारों के भारी बोझ और योग्य पेशेवरों की कमी को दूर करने के लिये सरकार द्वारा वर्ष 1982 से ‘राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम’ (NMHP) को क्रियान्वित किया जा रहा है।
    • वर्ष 2003 में दो योजनाओं को शामिल करने के लिये इस कार्यक्रम की रणनीति को पुनः निर्धारित किया गया था। ये योजनाएँ थीं- राज्य मानसिक अस्पतालों का आधुनिकीकरण और मेडिकल कॉलेजों/सामान्य अस्पतालों के मनोरोग विंग का उन्नयन।
  • मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017: यह मानसिक विकास से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति को सरकार द्वारा संचालित या वित्तपोषित सेवाओं से मानसिक स्वास्थ्य देखभाल और उपचार तक पहुँच की गारंटी देता है।
    • इस अधिनियम ने IPC की धारा 309 के उपयोग के दायरे को काफी कम कर दिया है और आत्महत्या करने के प्रयास को केवल एक अपवाद के रूप में दंडनीय बना दिया है।
    • मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम (MHCA) 2017 ‘विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन’ (जिसे भारत ने वर्ष 2007 में अनुमोदित किया) की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये वर्ष 2018 में लागू हुआ था।

अन्य पहलें

  • किरण: सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने चिंता, तनाव, अवसाद, आत्महत्या का विचार और अन्य मानसिक स्वास्थ्य चिंताओं का सामना कर रहे लोगों को सहायता प्रदान करने के लिये 24/7 टोल-फ्री हेल्पलाइन शुरू की है।
  • मनोदर्पण पहल: यह आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत शिक्षा मंत्रालय की एक पहल है। इसका उद्देश्य कोविड-19 के दौरान छात्रों, परिवार के सदस्यों और शिक्षकों को उनके मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिये मनोसामाजिक सहायता प्रदान करना है।

स्रोत: पी.आई.बी.

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