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भुगतान अवसंरचना विकास कोष

  • 06 Jun 2020
  • 5 min read

प्रीलिम्स के लिये

भुगतान अवसंरचना विकास कोष

मेन्स के लिये

भुगतान अवसंरचना विकास कोष की आवश्यकता और महत्त्व, भारत में डिजिटल भुगतान की स्थिति

चर्चा में क्यों?

देश भर में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India-RBI) ने हाल ही में 500 करोड़ रुपए का ‘भुगतान अवसंरचना विकास कोष’ (Payments Infrastructure Development Fund-PIDF) स्थापित किया है।

प्रमुख बिंदु

  • उल्लेखनीय है कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) 250 करोड़ रुपए के प्रारंभिक योगदान के साथ इस कोष की शुरुआत करेगा, जोकि कुल राशि का आधा हिस्सा होगा और शेष आधा हिस्सा कार्ड जारी करने वाले बैंकों और देश में परिचालित कार्ड नेटवर्कों (Card Networks Operating) द्वारा वहन किया जाएगा। 
  • RBI द्वारा इस कोष का गठन उद्देश्य मुख्यतः टियर-III से टियर-VI शहरों तथा पूर्वोत्तर राज्यों में अधिग्राहकों को पॉइंट ऑफ सेल (Point of Sale-PoS) से संबंधित अवसंरचना स्थापित करने हेतु प्रोत्साहित करना है।
  • RBI द्वारा गठित इस कोष को एक सलाहकार परिषद (Advisory Council) के माध्यम से शासित किया जाएगा, हालाँकि इसका प्रबंधन भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा स्वयं किया जाएगा।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा भारतीय शहरों को उनकी जनसंख्या के आधार पर विभिन्न टियर में विभाजित किया गया है-
1. टियर I - 1,00,000 या उससे अधिक 
2. टियर II - 50,000 से 99,999
3. टियर III -  20,000 से 49,999
4. टियर IV - 10,000 से 19,999
5. टियर V - 5,000 से 9,999 
6. टियर VI - 5000 से कम

उद्देश्य

  • इस कोष के गठन का प्रमुख उद्देश्य देश भर के छोटे व्यापारियों को डिजिटल भुगतान स्वीकार करने हेतु सक्षम बनाना है।
  • यह कदम देश में डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारियों की संख्या को बढ़ाने में काफी मददगार साबित होगा।

आवश्यकता 

  • विदित हो कि बीते कुछ वर्षों में देश में भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र (Payments Ecosystem) विभिन्न प्रकार के विकल्पों के साथ विकसित हुआ है, जिसमें बैंक खाते, मोबाइल फोन, कार्ड इत्यादि शामिल हैं।
  • ऐसे में देश में भुगतान प्रणालियों के डिजिटलीकरण के लिये और अधिक उत्साह प्रदान करने की आवश्यकता है।
  • देश में अधिकांश PoS टर्मिनल टियर I और टियर II शहरों में स्थित हैं और अन्य सभी शहरों तथा क्षेत्रों में इस प्रकार की अवसंरचना का अभाव है।
  • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा प्रस्तुत आँकड़ों के अनुसार, मार्च 2020 तक देश भर में लगभग 5.14 मिलियन सक्रिय PoS डिवाइस हैं। 

महत्त्व

  • विशेषज्ञों ने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि यह कोष देश के पिछड़े इलाकों में भुगतान अवसंरचना (Payments Infrastructure) की पहुँच सुनिश्चित करने में मदद करेगा।
  • इस कोष से दीर्घकाल में उन कंपनियों को भी लाभ प्राप्त होगा, जो कि देश में डिजिटल भुगतान सेवाएँ प्रदान करती हैं।

संबंधित चिंताएँ

  • कई विश्लेषकों ने यह चिंता ज़ाहिर की है कि देश भर के उन क्षेत्रों में PoS उपकरण स्थापित करना एक कारगर कदम नहीं होगा, जहाँ न्यूनतम व्यापारिक लेनदेन 10000 रुपए से भी कम होता है, क्योंकि इस प्रकार के उपकरण के रखरखाव की लागत ही काफी अधिक होती है।
  • वहीं नीति निर्माताओं के लिये आम लोगों को इस प्रकार के उपकरण के प्रयोग के प्रति जागरूक करना भी एक चुनौती होगी।

पॉइंट ऑफ सेल (Point of Sale-PoS)

  • पॉइंट ऑफ सेल (PoS) वह स्थान होता है, जहाँ ग्राहक द्वारा वस्तुओं या सेवाओं हेतु भुगतान किया जाता है। यहाँ पर बिक्री कर भी देय हो सकता है।
  • यह कोई बाह्य स्टोर हो सकता है जहाँ पर भुगतान के लिये कार्ड पेमेंट या वर्चुअल सेल्स पॉइंट, जैसे- कंप्यूटर या मोबाइल इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का उपयोग किया जाता है।

स्रोत: द हिंदू

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