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भारतीय अर्थव्यवस्था

ई-कॉमर्स ‘फ्लैश सेल’ पर प्रतिबंध का प्रस्ताव

  • 23 Jun 2021
  • 8 min read

प्रिलिम्स के लिये:

ई-कॉमर्स के प्रमुख प्रकार

मेन्स के लिये:

ई-कॉमर्स से संबंधित विभिन्न मुद्दे तथा उनका समाधान, उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम नियमों में प्रमुख संशोधन

चर्चा में क्यों

सरकार ने ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर दी जाने वाली भारी छूट की निगरानी के लिये सभी प्रकार "फ्लैश सेल" पर प्रतिबंध लगाते हुए उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम [Consumer Protection (e-commerce) Rules] 2020 में बदलाव प्रस्तावित किये हैं।

E-commerce-Rules

प्रमुख बिंदु

परिवर्तन के मूल कारण: 

  • ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर तीसरे पक्ष के विक्रेताओं द्वारा पारंपरिक फ्लैश बिक्री/सेल पर प्रतिबंध नहीं है।
  • छोटे व्यवसायियों द्वारा अमेज़ॅन और फ्लिपकार्ट जैसे ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस द्वारा बाज़ार प्रभुत्व के दुरुपयोग और भारी छूट की शिकायत की जाती रही है।
  • उपभोक्ता मामले मंत्रालय को ई-कॉमर्स इकोसिस्टम में व्यापक धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार प्रथाओं के खिलाफ कई शिकायतें भी मिलती रही हैं।
  • कुछ ई-कॉमर्स संस्थाएँ 'बैक-टू-बैक' या 'फ्लैश' सेल लाकर उपभोक्ताओं की पसंद को सीमित करती हैं, जिसमें प्लेटफॉर्म पर बेचने वाला कोई विक्रेता इन्वेंट्री या ऑर्डर को पूरा करने की क्षमता नहीं रखता है बल्कि प्लेटफॉर्म द्वारा नियंत्रित दूसरे विक्रेता के साथ केवल 'फ्लैश या बैक-टू-बैक' ऑर्डर पूरा करता है। 

प्रस्तावित संशोधन:

  • उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 और नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिये मुख्य अनुपालन अधिकारी (Chief Compliance Officer- CCO) की नियुक्ति, कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ 24x7 समन्वय के लिये एक नोडल संपर्क व्यक्ति, उनके आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिये अधिकारी की नियुक्ति का प्रस्ताव किया गया है। 
  • ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर उपभोक्ताओं की शिकायतों के निवारण के लिये स्थायी रूप से रहने वाले शिकायत अधिकारी (Resident Grievance Officer) की नियुक्ति का भी प्रस्ताव किया गया है, जिसे कंपनी का एक कर्मचारी तथा भारत का नागरिक होना चाहिये। 
  • तरजीही व्यवहार की बढ़ती चिंताओं से निपटने के लिये, नए नियमों में यह सुनिश्चित करने का प्रस्ताव किया गया है कि किसी भी संबंधित पक्ष को 'अनुचित लाभ' पहुँचाने हेतु किसी भी प्रकार की उपभोक्ता जानकारी (ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से) का उपयोग करने की अनुमति न हो।
  • प्रस्तावित संशोधनों में ऐसी व्यवस्था की बात कही गई है कि जब एक ई-कॉमर्स इकाई आयातित वस्तुओं या सेवाओं की पेशकश करे, तो उसके मूल देश की पहचान करने हेतु एक फिल्टर तंत्र हो।
    • साथ ही घरेलू सामानों के लिये उचित अवसर सुनिश्चित करने हेतु विकल्प सुझाए जाएंगे।
  • यदि विक्रेता लापरवाही के चलते सामान या सेवाएँ उपलब्ध कराने में विफल रहता है और मार्केटप्लेस ई-कॉमर्स इकाई द्वारा निर्धारित कर्तव्यों एवं देनदारियों को पूरा करने में असफल रहता है तो ऐसी स्थिति में प्रत्येक मार्केटप्लेस ई-कॉमर्स इकाई के लिये देयता (देनदारी या दायित्व) का प्रावधान किया गया है।
  • प्रत्येक ई-कॉमर्स इकाई के पंजीकरण के लिये रूपरेखा तैयार की गई है जिसमें उसे उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (Department for Promotion of Industry and Internal Trade (DPIIT) के पास अपना पंजीकरण कराना होगा।

प्रस्तावित संशोधनों का महत्त्व:

  • ये संशोधन अधिनियम के प्रावधानों और नियमों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करेंगे तथा ई-कॉमर्स संस्थाओं से संबंधित शिकायत निवारण तंत्र को भी मज़बूती प्रदान करेंगे।
  • संशोधन का यह प्रस्ताव इसलिये भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग (Competition Commission of India- CCI) द्वारा बाज़ार प्रभुत्व के कथित दुरुपयोग और ऐसे विक्रेताओं को तरजीही देने के संदर्भ में बड़े ई-कॉमर्स बाज़ारों की जाँच की जा रही है जिसमें वे अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी रखते हैं।

ई-कॉमर्स

  • इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स या ई-कॉमर्स एक व्यवसाय मॉडल है जो फर्मों और व्यक्तियों को इंटरनेट के माध्यम से चीजें खरीदने एवं बेचने की सुविधा देता है।
  • स्मार्टफोन की बढ़ती पहुँच, 4जी नेटवर्क के लॉन्च और बढ़ती उपभोक्ता संपत्ति से प्रेरित, भारतीय ई-कॉमर्स बाज़ार के वर्ष 2026 तक 200 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने की उम्मीद है जो कि वर्ष 2017 में 38.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर थी।
  • भारतीय ई-कॉमर्स उद्योग तेज़ी से विकास के पथ पर अग्रसर है और यह आशा व्यक्त की जा रही है वर्ष 2034 तक भारत, अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए विश्व का दूसरा सबसे बड़ा ई-कॉमर्स बाज़ार बन जाएगा।

ई-कॉमर्स के प्रमुख प्रकार

ई-कॉमर्स का प्रकार

उदाहरण

B2C- बिज़नेस टू कंज़्यूमर

Amazon.com एक सामान्य विक्रेता है जो खुदरा उपभोक्ताओं को वस्तुओं की बिक्री करता है।

B2B- बिज़नेस टू बिज़नेस

esteel.com एक स्टील इंडस्ट्री एक्सचेंज है जो स्टील उत्पादकों तथा उपयोगकर्त्ताओं के लिये एक इलेक्ट्रिक मार्केट का निर्माण करता है।

C2C- कंज़्यूमर टू कंज़्यूमर

ebay.com एक ऐसे मार्केट का निर्माण करता है जहाँ उपभोक्ता अपनी वस्तुओं की प्रत्यक्ष नीलामी अथवा बिक्री कर सकते हैं।

P2P- पीयर टू पीयर

Gnutella एक सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन है जो मार्केट मेकर के हस्तक्षेप (जैसा कि C2C ई कॉमर्स में होता है) के बिना उपभोक्ताओं को सीधे एक-दूसरे के साथ म्यूजिक साझा करने की अनुमति देता है।

M-कॉमर्स : मोबाइल कॉमर्स

PDA (पर्सनल डिजिटल असिस्टेंट) या सेल फोन जैसे वायरलेस उपकरणों का उपयोग वाणिज्यिक लेनदेन हेतु कियाजा सकता है।

स्रोत: द हिंदू

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