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भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग

  • 28 May 2020
  • 14 min read

भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग (Competition Commission of India- CCI) भारत सरकार का एक सांविधिक निकाय है जो प्रतिस्पर्द्धा अधिनियम, 2002 (Competition Act, 2002) के प्रवर्तन के लिये उत्तरदायी है। मार्च 2009 में इसे विधिवत रूप से गठित किया गया था।

  • राघवन समिति की अनुशंसा पर एकाधिकार तथा अवरोधक व्यापार व्यवहार. अधिनियम, 1969 (Monopolies and Restrictive Trade Practices Act- MRTP Act) को निरस्त कर इसके स्थान पर प्रतिस्पर्द्धा अधिनियम, 2002 लाया गया।
  • भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग का उद्देश्य निम्नलिखित के माध्यम से देश में एक सुदृढ़ प्रतिस्पर्द्धी वातावरण तैयार करना है:
    • उपभोक्ता, उद्योग, सरकार और अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्राधिकारों सहित सभी हितधारकों के साथ सक्रिय संलग्नता के माध्यम से।
    • उच्च क्षमता स्तर के साथ एक ज्ञान प्रधान संगठन के रूप में।
    • प्रवर्तन में पेशेवर कुशलता, पारदर्शिता, संकल्प और ज्ञान के माध्यम से।      

प्रतिस्पर्द्धा अधिनियम, 2002

  • प्रतिस्पर्द्धा अधिनियम वर्ष 2002 में पारित किया गया था और प्रतिस्पर्द्धा (संशोधन) अधिनियम, 2007 द्वारा इसे संशोधित किया गया। यह आधुनिक प्रतिस्पर्द्धा विधानों के दर्शन का अनुसरण करता है।
    • यह अधिनियम प्रतिस्पर्द्धा-विरोधी करारों और उद्यमों द्वारा अपनी प्रधान स्थिति के दुरुपयोग का प्रतिषेध करता है तथा समुच्चयों [अर्जन, नियंत्रण की प्राप्ति और 'विलय एवं अधिग्रहण' (M&A)] का विनियमन करता है, क्योंकि इनसे भारत में प्रतिस्पर्द्धा पर व्यापक प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है या इसकी संभावना बनती है।
    • संशोधन अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग और प्रतिस्पर्द्धा अपीलीय न्यायाधिकरण (Competition Appellate Tribunal- COMPAT) की स्थापना की गई
    • वर्ष 2017 में सरकार ने प्रतिस्पर्द्धा अपीलीय न्यायाधिकरण (COMPAT) को राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (National Company Law Appellate Tribunal- NCLAT) से प्रतिस्थापित कर दिया।      

CCI की संरचना

  • प्रतिस्पर्द्धा अधिनियम के अनुसार, आयोग में एक अध्यक्ष और छह सदस्य होते हैं जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किया जाता है।
    • भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग वर्तमान में एक अध्यक्ष और दो सदस्यों के साथ कार्यरत है।
  • आयोग एक अर्द्ध-न्यायिक निकाय (Quasi-Judicial Body) है जो सांविधिक प्राधिकरणों को परामर्श देता है तथा अन्य मामलों को भी संबोधित करता है। इसका अध्यक्ष और अन्य सदस्य पूर्णकालिक सदस्य होते हैं।
  • सदस्यों की पात्रता: अध्यक्ष और प्रत्येक अन्य सदस्य योग्यता, सत्यनिष्ठा और प्रतिष्ठा वाला ऐसा व्यक्ति होगा जो उच्च न्यायालय का न्यायाधीश रह चुका हो या उच्च न्यायाधीश के पद पर नियुक्त होने की योग्यता रखता हो, या जिसके पास अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, अर्थशास्त्र, कारोबार, वाणिज्य, विधि, वित्त, लेखाकार्य, प्रबंधन, उद्योग, लोक कार्य या प्रतिस्पर्द्धा संबंधी विषयों में कम-से-कम पंद्रह वर्ष का ऐसा विशेष ज्ञान और वृत्तिक अनुभव हो जो केंद्र सरकार की राय में आयोग के लिये उपयोगी हो।      

CCI की भूमिका और कार्य 

  • प्रतिस्पर्द्धा पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले अभ्यासों को समाप्त करना, प्रतिस्पर्द्धा को बढ़ावा देना और उसे जारी रखना, उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना तथा भारतीय बाज़ारों में व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना।
  • किसी विधान के तहत स्थापित किसी सांविधिक प्राधिकरण से प्राप्त संदर्भ के लिये प्रतिस्पर्द्धा संबंधी विषयों पर परामर्श देना एवं प्रतिस्पर्द्धा की भावना को संपोषित करना, सार्वजनिक जागरूकता पैदा करना एवं प्रतिस्पर्द्धा के विषयों पर प्रशिक्षण प्रदान करना।
  • भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग अपने उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु निम्नलिखित उपाय करता है:
    • उपभोक्ता कल्याण: उपभोक्ताओं के लाभ और कल्याण के लिये बाज़ारों को कार्यसक्षम बनाना।
    • अर्थव्यवस्था के तीव्र तथा समावेशी विकास एवं वृद्धि के लिये देश की आर्थिक गतिविधियों में निष्पक्ष और स्वस्थ प्रतिस्पर्द्धा सुनिश्चित करना
    • आर्थिक संसाधनों के कुशलतम उपयोग को कार्यान्वित करने के उद्देश्य से प्रतिस्पर्द्धा नीतियों को लागू करना।
    • क्षेत्रीय नियामकों के साथ प्रभावी संबंधों व अंतःक्रियाओं का विकास व संपोषण ताकि प्रतिस्पर्द्धा कानून के साथ क्षेत्रीय विनियामक कानूनों का बेहतर संरेखण/तालमेल सुनिश्चित हो सके।
    • प्रतिस्पर्धा के पक्ष-समर्थन को प्रभावी रूप से आगे बढ़ाना और सभी हितधारकों के बीच प्रतिस्पर्द्धा के लाभों पर सूचना का प्रसार करना ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्द्धा की संस्कृति का विकास तथा संपोषण किया जा सके।
  • प्रतिस्पर्द्धा आयोग भारत का प्रतिस्पर्द्धा विनियामक (Competition Regulator) है और यह उन छोटे संगठनों के लिये एक स्पर्द्धारोधी प्रहरी/एंटी-ट्रस्ट वाचडॉग (Antitrust Watchdog) के रूप में कार्य करता है जो बड़े कॉर्पोरेशन के समक्ष अपने अस्तित्त्व को बनाए रखने में असमर्थ होते हैं।
  • CCI के पास भारत में व्यापार करने वाले संगठनों को नोटिस देने का अधिकार है यदि उसे लगता है कि वे भारत के घरेलू बाज़ार की प्रतिस्पर्द्धा को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकते हैं।
  • प्रतिस्पर्द्धा अधिनियम यह गारंटी देता है कि कोई भी उद्यम आपूर्ति के नियंत्रण, खरीद मूल्य के साथ छेड़छाड़ या अन्य प्रतिस्पर्द्धी फर्मों की बाज़ार तक पहुँच को बाधित करने वाले अभ्यासों को अपनाने के रूप में बाज़ार में अपनी 'प्रभावी स्थिति' (Dominant Position) का दुरुपयोग नहीं करेगा।
  • अधिग्रहण या विलय के माध्यम से भारत में प्रवेश की इच्छुक किसी विदेशी कंपनी को देश के प्रतिस्पर्द्धा कानूनों का पालन करना होगा।
    • एक निश्चित मौद्रिक मूल्य के ऊपर की आस्तियाँ और कारोबार किसी समूह को भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग के दायरे में ले आएंगी।      

CCI के प्रमुख निर्णय

  • जून 2012 में CCI ने व्यवसायी समूहन या कार्टेलाइज़ेशन (Cartelisation) के लिये 11 सीमेंट कंपनियों पर 63.7 बिलियन रुपये (910 मिलियन डॉलर) का अर्थदंड लगाया। CCI ने माना कि इन सीमेंट कंपनियों ने मूल्य निर्धारण एवं बाज़ार हिस्सेदारी पर नियंत्रण के लिये नियमित बैठकें की और आपूर्ति को बाधित रखा जिससे उन्हें अवैध लाभ प्राप्त हुआ।
  • वर्ष 2013 में CCI ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) पर अपनी प्रधान स्थिति के दुरुपयोग के लिये 522 मिलियन रुपये (7.6 मिलियन डॉलर) का जुर्माना लगाया।
    • CCI ने पाया कि IPL टीम के स्वामित्व समझौते अनुचित एवं भेदभावपूर्ण थे और आईपीएल फ्रेंचाइज़ी समझौतों की शर्तें BCCI के पक्ष में अधिक थीं साथ ही अनुबंध के संदर्भ में फ्रेंचाइजी के पास कोई शक्ति नहीं थी।
  • CCI ने  सूचना और दस्तावेजों की माँग करते हुए महानिदेशक (DG) द्वारा जारी निर्देशों का अनुपालन नहीं करने के लिये वर्ष 2014 में गूगल (Google) पर 10 मिलियन रुपये का जुर्माना लगाया।
  • वर्ष 2015 में CCI ने  तीन एयरलाइंसों पर 258 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया।
    • भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग (CCI) ने एयर कार्गो पर फ्यूल सरचार्ज निर्धारित करने में तीनों एयरलाइनों के कार्टेलाइज़ेशन के लिये उन्हें दंडित किया।
  • रिलायंस जियो द्वारा अपने प्रतिद्वंद्वियों भारती एयरटेल, वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेलुलर के विरुद्ध कार्टेलाइज़ेशन की शिकायत पर CCI ने भारतीय सेलुलर ऑपरेटर संघ (Cellular Operators Association of India- COAI) के कार्यकलाप की जाँच का आदेश दिया था।
  • एंड्रॉइड के मामले में अपनी प्रधान स्थिति का दुरुपयोग कर अपने बाज़ार प्रतिद्वंद्वियों को प्रतिस्पर्द्धा से वंचित करने के लिये Google के विरुद्ध CCI ने एक स्पर्द्धारोधी (Antitrust) जाँच का आदेश दिया। यह जाँच यूरोपीय संघ में एक ऐसे ही मामले के विश्लेषण के आधार पर आदेशित की गई थी जहाँ Google को दोषी पाया गया था और जुर्माना लगाया गया था।
  • वर्ष 2019 में CCI ने हैंडसेट निर्माताओं को एक पत्र जारी कर Google के साथ उनके समझौते के नियमों और शर्तों का विवरण माँगा।
    • ऐसा यह पता लगाने के लिये किया गया कि वर्ष 2011 से 2019 तक की अवधि में Google ने कंपनी के ऐप्स का उपयोग करने के लिये उन पर कोई नियंत्रण आरोपित किया था या नहीं।

CCI की आवश्यकता क्यों?

  • मुक्त उद्यम को बढ़ावा देने के लिये: प्रतिस्पर्द्धा कानूनों को मुक्त उद्यम के मैग्नाकार्टा के रूप में वर्णित किया गया है। आर्थिक स्वतंत्रता और हमारे मुक्त उद्यम प्रणाली के संरक्षण के लिये प्रतिस्पर्द्धा महत्त्वपूर्ण है।
  • बाज़ार को विकृतियों से बचाने के लिये: प्रतिस्पर्द्धा कानून की आवश्यकता इसलिये उत्पन्न हुई क्योंकि बाज़ार विफलताओं एवं विकृतियों का शिकार हो सकता है और विभिन्न अभिकर्त्ता कार्टेलाइज़ेशन, अपनी प्रधान स्थिति के दुरुपयोग जैसे प्रतिस्पर्द्धा विरोधी गतिविधियों का सहारा ले सकते हैं जो आर्थिक दक्षता और उपभोक्ता कल्याण पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।
    • इस प्रकार, एक नियामक बल प्रदान करने के लिये प्रतिस्पर्द्धा कानून की आवश्यकता होती है जो आर्थिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करता है।
  • घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये: ऐसे युग में जहाँ अर्थव्यवस्थाएँ बंद अर्थव्यवस्थाओं से खुली अर्थव्यवस्थाओं में परिणत हो रही हैं, घरेलू उद्योगों की निरंतर व्यवहार्यता सुनिश्चित करने के लिये एक प्रभावी प्रतिस्पर्द्धा आयोग का होना आवश्यक है जो संतुलन को बनाए रखते हुए उद्यमों को प्रतिस्पर्द्धा के लाभों का अवसर प्रदान करती है।
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