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बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का प्रदर्शन

  • 27 Jan 2021
  • 6 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में वर्ष 2015 में लॉन्च हुई बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ ( Beti Bachao Beti Padhao- BBBP) योजना के 6 वर्ष पूर्ण हो गए हैं। राष्ट्रीय बालिका दिवस (24 जनवरी) के अवसर पर BBBP योजना के अब तक के प्रदर्शन पर चर्चा की गई।

  • राष्ट्रीय बालिका दिवस की शुरुआत वर्ष 2008 में महिला और बाल विकास मंत्रालय द्वारा  की गई थी।

प्रमुख बिंदु: 

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं (BBBP) योजना के बारे में:

  • मुख्य उद्देश्य:
    • लिंग आधारित चयन पर रोकथाम।
    • बालिकाओं के अस्तित्व और सुरक्षा को सुनिश्चित करना।
    • बालिकाओं के लिये शिक्षा की उचित व्यवस्था तथा उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना।
    • बालिकाओं के अधिकारों की रक्षा करना।
  • बहुक्षेत्रीय राष्ट्रव्यापी अभियान:  
    • BBBP एक राष्ट्रीय अभियान है जो सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को कवर करते हुए बाल लिंग अनुपात (Child Sex Ratio- CSR) हेतु चयनित100 ज़िलों में मल्टीसेक्टोरल एक्शन (Multisectoral Action) पर केंद्रित है।
    • यह महिला और बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय तथा मानव संसाधन विकास मंत्रालय की एक संयुक्त पहल है।

BBBP योजना का प्रदर्शन:

  • जन्म के समय लिंग अनुपात:
    • स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (Health Management Information System- HMIS) से प्राप्त आँकड़ों के अनुसार, वर्ष  2014-15 में जन्म के समय लिंग अनुपात 918 था जो वर्ष 2019-20 में 16 अंकों के सुधार  के साथ बढ़कर 934 हो गया है।
    • BBBP के अंतर्गत शामिल  640 ज़िलों में से 422 में वर्ष 2014-15 से वर्ष 2018-2019 तक SRB में सुधार देखा गया है।
    • महत्त्वपूर्ण उदाहरण:
      • मऊ (उत्तर प्रदेश) में वर्ष 2014-15 से वर्ष 2019-20 तक लिंग अनुपात 694 से बढ़कर  951 हुआ है ।
      • करनाल (हरियाणा) में वर्ष 2014-15 से  वर्ष 2019-20 तक यह अनुपात 758 से बढ़कर 898 हो गया है। 
      • महेन्द्रगढ़ (हरियाणा)  में वर्ष 2014-15 से वर्ष 2019-20 तक यह 791 से बढ़कर 919 हुआ है।
  • स्वास्थ्य:
    • ANC पंजीकरण: पहली तिमाही में प्रसव पूर्व देखभाल (AnteNatal Care- ANC) पंजीकरण में सुधार का रुझान वर्ष 2014-15 के  61% से बढ़कर वर्ष 2019-20 में  71% देखा गया है।
    • संस्थागत प्रसव में सुधार का प्रतिशत वर्ष  2014-15  के 87% से बढ़कर  वर्ष  2019-20 में 94% तक पहुँच गया है। 
  • शिक्षा:
    • सकल नामांकन अनुपात (GER): शिक्षा के लिये एकीकृत ज़िला सूचना प्रणाली (UDISE) के अंतिम आंँकड़ों के अनुसार, माध्यमिक स्तर पर स्कूलों में बालिकाओं के सकल नामांकन अनुपात (Gross Enrolment Ratio-GER) में  77.45 (वर्ष 2014-15) से 81.32 (वर्ष 2018-19) तक सुधार हुआ है।
    • बालिकाओं के लिये शौचालय: बालिकाओं के लिये अलग शौचालय वाले स्कूलों का प्रतिशत वर्ष 2014-15 के 92.1% से बढ़कर वर्ष 2018-19 में 95.1% हो गया है।

सोच में परिवर्तन:

  • BBBP योजना कन्या भ्रूण हत्या, बालिकाओं में शिक्षा की कमी और जीवन चक्र की निरंतरता के अधिकार से  उन्हें वंचित करने जैसे महत्त्वपूर्ण मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम है।
  • बेटी जन्मोत्सव प्रत्येक ज़िले में मनाए जाने वाले प्रमुख कार्यक्रमों में से एक है।

बालिकाओं के लिये अन्य पहलें:

  • उज्ज्वला (UJJAWALA): यह मानव तस्करी की समस्या से निपटने से संबंधित है जो वाणिज्यिक  उद्देश्यों के लिये किये  गए यौन शोषण व तस्करी के शिकार पीड़ितों और उनके बचाव, पुनर्वास तथा एकीकरण के लिये एक व्यापक योजना है।
  • किशोरी स्वास्थ्य कार्ड: किशोर लड़कियों का वज़न, ऊंँचाई, बॉडी मास इंडेक्स (Body Mass Index- BMI) के बारे में जानकारी दर्ज करने के उद्देश्य से इन स्वास्थ्य कार्डों को आंँगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बनाया जाता है।
  • किशोरियों के लिये योजना (Scheme for Adolescent Girls- SAG)।
  • सुकन्या समृद्धि योजना (Sukanya Samridhi Yojana) आदि।

स्रोत: द हिंदू

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