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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

PASSEX नौसैनिक मार्ग अभ्यास

  • 21 Jul 2020
  • 4 min read

प्रीलिम्स के लिये:

PASSEX

मेन्स के लिये:

भारत अमेरिका के बीच सैन्य अभ्यासों का महत्त्व

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारतीय नौसेना के जहाज़ों ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के पास अमेरिकी नौसेना के ‘USS निमित्ज कैरियर स्ट्राइक ग्रुप’ के साथ एक मार्ग अभ्यास (PASSEX) का आयोजन किया। जब भी अवसर मिलता है, पूर्व नियोजित समुद्री ड्रिल के विपरीत, एक पैसेज अभ्यास का आयोजन किया जाता है। हाल ही में भारतीय नौसेना ने जापानी नौसेना और फ्राँसीसी नौसेना के साथ एक ऐसे ही PASSEX का संचालन किया था।

प्रमुख बिंदु

  • PASSEX:
    • चार फ्रंटलाइन भारतीय नौसैनिक जहाज़ों में INS शिवालिक, INS सह्याद्री, INS कामोर्ता और INS राणा शामिल थे, जिन्होंने अभ्यास का संचालन करने के लिये ‘कैरियर USS निमित्ज’ और तीन अन्य अमेरिकी जहाज़ों के साथ मिलकर काम किया।
    • USS निमित्ज अमेरिकी नौसेना का सबसे बड़ा विमान वाहक है।
  • लक्ष्य:
    • अमेरिकी और भारतीय समुद्री बलों के बीच सहयोग को बेहतर बनाना, एवं प्रशिक्षण तथा अंतर्समन्वयता को बढ़ावा देना, जिसमें वायु रक्षा भी शामिल है।
  • प्रभाव:
    • यह समुद्री डकैती से लेकर हिंसक अतिवाद तक, समुद्री क्षेत्र में मौजूद संकट का सामना करने के लिये दोनों पक्षों की क्षमता को बढ़ाएगा
      • एक स्वतंत्र और खुला समुद्री क्षेत्र, अंतर्राष्ट्रीय नियमों पर आधारित आदेश को बढ़ावा देता है जिसमें प्रत्येक देश राष्ट्रीय संप्रभुता का त्याग किये बिना अपनी क्षमता का पूर्ण उपयोग करने में सक्षम होता है।
    • यह संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच पहले से मौजूद मज़बूत संबंधों को और दृढ़ बनाएगा और दोनों देशों को एक-दूसरे से सीखने के अवसर भी देगा।
  • चीनी संदर्भ:
    • वर्तमान में भारत लद्दाख क्षेत्र में चीन के साथ सीमाई गतिरोध का सामना कर रहा है, ऐसे में हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारतीय नौसेना द्वारा PASSEX का आयोजन काफी अहम् है।
      • इस अभ्यास का आयोजन ऐसे समय पर किया गया है जब दक्षिण चीन सागर में तनाव बढ़ता जा रहा है, और अमेरिकी नौसेना ने USS निमित्ज और USS रोनाल्ड रीगन को शामिल करते हुए एक प्रमुख अभ्यास का भी आयोजन किया है।
    • भारतीय नौसेना IOR में चीनी नौसैनिक जहाज़ों की आवाजाही पर कड़ी नज़र रख रही है, एंटी-पायरेसी गश्ती के नाम पर पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में चीन की गतिविधियों में काफी वृद्धि हुई है।
      • वर्ष 2017 में चीन ने हॉर्न ऑफ अफ्रीका में जिबूती में अपना पहला विदेशी सैन्य अड्डा खोला था।

स्रोत-द हिंदू

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