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उत्तर-पूर्वी मानसून की स्थिति

  • 03 Jan 2020
  • 6 min read

प्रीलिम्स के लिये:

भारत मौसम विज्ञान विभाग

मेन्स के लिये:

उत्तर-पूर्वी मानसून का वार्षिक वितरण

चर्चा में क्यों?

वर्ष 2019 में उत्तर-पूर्वी मानसून से होने वाली वर्षा की मात्रा में वृद्धि दर्ज की गई है।

मुख्य बिंदु:

  • वर्ष 2019 में उत्तर-पूर्वी मानसून से होने वाली वर्षा की मात्रा में कुल 30% की वृद्धि दर्ज की गई।
  • वर्ष 2019 में दक्षिण-पश्चिम मानसून काफी समय तक प्रभावी रहा, इसलिये शीतकालीन मानसून देरी से प्रारंभ हुआ।
  • इसके बावजूद दक्षिणी प्रायद्वीप के सभी प्रभागों में तीन महीनों के दौरान सामान्य या उससे अधिक वर्षा दर्ज की गई।
  • भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department-IMD) के अनुसार, उत्तर-पूर्वी मानसून के प्रभावी रहने के दौरान स्थानिक और कालिक रूप से प्रत्येक सप्ताह सामान्य वर्षा दर्ज की गई।

उत्तर-पूर्वी मानसून:

  • IMD द्वारा सामान्यतः अक्तूबर से दिसंबर तक के समय को उत्तर-पूर्वी मानसून की अवधि के तौर पर माना गया है।
  • सितंबर के अंत में सूर्य का दक्षिणायन प्रारंभ हो जाता है, फलतः गंगा के मैदान पर निर्मित निम्न वायुदाब की पेटी भी दक्षिण की ओर खिसकना आरंभ कर देती है, जिसके कारण ‘दक्षिण-पश्चिम मानसून’ कमज़ोर पड़ने लगता है और दिसंबर के मध्य तक आते-आते निम्न वायुदाब का केंद्र भारतीय उपमहाद्वीप से पूरी तरह हट चुका होता है।
  • इस समय ताप कटिबंधों के साथ-साथ इंटर ट्रॉपिकल कन्वर्ज़ेंस ज़ोन (Inter Tropical Convergence Zone- ITCZ) का भी दक्षिण की ओर विस्थापन हो जाता है, जिसके कारण ‘उपोष्ण कटिबंधीय पश्चिमी जेट स्ट्रीम’ का तिब्बत के पठार से हिमालय पर्वत की ओर विस्थापन प्रारंभ हो जाता है तथा ‘उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट स्ट्रीम’ का प्रभाव भारतीय प्रायद्वीप पर कम होने लगता है, जिसके कारण बंगाल की खाड़ी में उष्ण कटिबंधीय चक्रवात की उत्पत्ति के लिये अनुकूल दशाएँ उत्पन्न हो जाती हैं तथा प्रायद्वीपीय भारत के पूर्वी भागों में वर्षा होती है।
  • इस अवधि के दौरान जहाँ दक्षिणी राज्यों मुख्यतः तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश के साथ-साथ तेलंगाना और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में वर्षा होती है, वहीं जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र में इस अवधि के दौरान या तो वर्षा या बर्फबारी होती है।

इंटर ट्रॉपिकल कन्वर्ज़ेंस ज़ोन:

  • ITCZ भूमध्य रेखा के पास एक गतिशील क्षेत्र है, जहाँ उत्तरी और दक्षिणी गोलार्द्ध से आने वाली व्यापारिक हवाएँ मिलती हैं। गर्मियों में ITCZ भूमध्य रेखा से उत्तरी गोलार्द्ध की तरफ खिसक (Shift) जाता है जिसका भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

वर्ष 2019 में उत्तर-पूर्वी मानसून की स्थिति:

  • वर्ष 2019 में मानसूनी मौसम के दौरान लक्षद्वीप (172%) एवं कर्नाटक (70%) में अत्यधिक वर्षा हुई, जबकि केरल और माहे में दिसंबर के अंत तक सामान्य से 27% अधिक वर्षा दर्ज की गई।
  • IMD द्वारा जारी वर्षा संबंधी आँकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु में सामान्य से 1% अधिक वर्षा हुई।
  • वहीं पुद्दुचेरी में सामान्य से 17% कम तथा तेलंगाना एवं आंध्र प्रदेश में सामान्य से 8% कम वर्षा हुई।
  • वर्ष 2019 में उत्तर-पूर्वी मानसून के कारण दक्षिण भारत में सामान्य से 30% अधिक वर्षा हुई। इसलिये केंद्रीय जल आयोग (Central Water Commission) द्वारा 26 दिसंबर, 2019 को जारी जलाशयों की वर्तमान भंडारण स्थिति के अनुसार, दक्षिण भारत में स्थित 36 जलाशयों में इनकी कुल जल भरण क्षमता का 76 प्रतिशत (40.37 बिलियन क्यूबिक मीटर) जल भंडारित है।
  • पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान इन जलाशयों में कुल जल भंडारण क्षमता का केवल 46 प्रतिशत जल भंडारित था।

उत्तर-पूर्वी मानसून का नामकरण:

  • उत्तर-पूर्वी मानसून का देश के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है, हालाँकि इस मानसून प्रणाली का एक हिस्सा उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के ऊपर उत्पन्न होता है।
  • उत्तर-पूर्वी मानसून का नामकरण इसके उत्तर-पूर्व दिशा से दक्षिण-पश्चिम की ओर जाने के कारण किया गया है।

स्रोत- इंडियन एक्सप्रेस

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