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बाघ मृत्युदर में कमी

  • 03 Jan 2020
  • 8 min read

प्रीलिम्स के लिये:

बाघ अभयारण्य

मेन्स के लिये:

बाघों की जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे

चर्चा में क्यों?

हाल ही में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (Ministry of Forest, Environment and Climate Change- MoEFCC) द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, देश में वर्ष 2019 में मात्र 95 बाघों की मृत्यु के मामले पंजीकृत किये गए, जो पिछले तीन वर्षों के अनुपात में सबसे कम है।

मुख्य बिंदु:

Vanishing-big-cats

  • वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2019 में देश भर में बाघों की मृत्यु के 85 प्रत्यक्ष मामले सामने आए, जबकि 11 बाघों के मरने की पुष्टि उनके अंगों के मिलने के आधार पर की गई।
  • ध्यातव्य है कि इससे पहले वर्ष 2018 के दौरान देश भर में बाघों की मृत्यु के 100 मामले और वर्ष 2017 में 115 मामले दर्ज किये गए थे, जबकि वर्ष 2016 में बाघों की मृत्यु का आँकड़ा 122 तक पहुँच गया था।
  • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (National Tiger Conservation Authority-NTCA) के विशेषज्ञों के मतानुसार, इन आँकड़ों को पिछले कुछ वर्षों में देश में बढ़ रही बाघों की संख्या के संदर्भ में देखा जाना चाहिये।
  • जुलाई 2019 में जारी पिछली बाघ जनगणना में देखा गया था कि वर्ष 2014 में हुई जनगणना के मुकाबले देश में बाघों की संख्या तीन गुना बढ़कर 2,967 हो गई थी।

देश में बाघ मृत्यु-दर में आई कमी के कारण:

  • देश में बाघ मृत्यु-दर में आई कमी राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण द्वारा बाघों के संरक्षण के लिये चलाए गए विभिन्न कार्यक्रमों का परिणाम है।
  • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण द्वारा देश के विभिन्न बाघ अभयारण्यों में बाघों की सुरक्षा के लिये निगरानी, अभयारण्यों का बेहतर प्रबंधन और बाघों के संरक्षण के प्रति लोगों को शिक्षित एवं जागरूक करने जैसे अनेक कार्यक्रम चलाए जाते हैं।
  • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने हाल के वर्षों में बाघों की निगरानी में तकनीकी का प्रयोग करना प्रारंभ किया है जिससे प्राधिकरण को इस क्षेत्र में काफी मदद मिली है।

देश में बाघ मृत्यु के राज्यवार आँकड़े:

  • देश में सबसे अधिक बाघ आबादी (वर्ष 2018 जनगणना के अनुसार 526) वाले राज्य मध्य प्रदेश में इस वर्ष सबसे अधिक 31 बाघों की मृत्यु दर्ज की गई।
  • इसके साथ ही दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र में 18 और कर्नाटक में इसी दौरान 12 बाघों की मृत्यु के मामले दर्ज किये गए। जबकि वर्ष 2018 की बाघ जनगणना में कर्नाटक और महाराष्ट्र में कुल बाघों की संख्या क्रमशः 524 व 312 पाई गई थी।
  • वर्ष 2019 में ही उत्तराखंड राज्य में 10, जबकि दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में वर्ष भर में बाघ मृत्यु के 7 मामले दर्ज किये गए।
  • कुछ बाघों की मृत्यु गैर-बाघ आबादी वाले राज्यों (जैसे-गुजरात) में भी दर्ज की गई, विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार, ऐसा बाघों के इन राज्यों में भटक कर चले जाने के कारण हुआ होगा।

बाघों के अवैध शिकार के मामले:

  • प्रस्तुत आँकड़ों से पता चलता है कि वर्ष 2019 में अवैध शिकार के कारण 22 बाघों की मृत्यु हो गई, जबकि एक बाघ की मृत्यु की मृत्यु जहर के कारण हुई।
  • अवैध शिकार के मामलों के अध्ययन में देखा गया कि 22 में से 16 अवैध शिकार की घटनाएँ बाघ अभयारण्यों के बाहर दर्ज की गईं।
  • विशेषज्ञों के अनुसार, अवैध शिकार की 70% घटनाएँ बाघ अभयारण्यों के बाहर ही होती हैं।
  • वर्ष 2019 में बाघों के अवैध शिकार की घटनाओं के मध्य प्रदेश में 8, महाराष्ट्र में 6 तथा कर्नाटक और असम में 2-2 मामले पाए गए, इसके साथ ही NTCA विद्युत आघात से होने वाली बाघों की मौतों के मामलों को भी अवैध शिकार के रूप में पंजीकृत कर रही है।
  • वर्ष 2019 के आँकड़ों में 17 बाघों की मृत्यु प्राकृतिक कारणों से बताई गई जबकि 56 बाघों की मृत्यु के कारणों का पता नहीं लगाया जा सका।

नए बाघ अभयारण्यों का निर्माण:

  • NTCA के अधिकारियों के मतानुसार, देश में बाघों की बढ़ती संख्या को देखते हुए कुछ और क्षेत्रों को बाघ अभयारण्य के रूप में घोषित करने की आवश्यकता है।
  • वर्तमान में भारत में 50 बाघ अभयारण्य हैं जो 73,000 वर्ग किमी. क्षेत्रफल में फैले हैं।
  • बाघों के अभयारण्यों से बाहर आकर लंबी दूरी तय करने के बढ़ते मामलों को देखते हुए, नए अभयारण्यों के निर्माण पर विचार करना बहुत ही आवश्यक हो गया है।
  • NTCA के अनुसार, वर्ष 2020 तक कम-से-कम तीन नए बाघ अभयारण्य बनाने की योजना है।

बाघों के अंतर्राज्यीय स्थानांतारण के मामले:

  • बाघों के अंतर्राज्यीय स्थानांतारण के लिये संबंधित राज्यों के वन विभागों को NTCA तथा भारतीय वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India-WII) के वैज्ञानिकों की सहमति लेनी पड़ती है।
  • वर्ष 2018 में देश में किसी भी बाघ के पहले अंतर्राज्यीय स्थानांतारण के मामले में मध्य प्रदेश के कान्हा बाघ अभयारण्य से एक नर बाघ और बांधवगढ़ अभयारण्य से एक बाघिन (मादा) को ओडिशा के सतकोसिया बाघ अभयारण्य में स्थानांतरित किया गया था।
    • परन्तु बाघ की अवैध शिकार में मृत्यु और मादा बाघिन द्वारा एक स्थानीय महिला की हत्या के बाद ऐसे कार्यक्रमों की सार्थकता पुनः विचार किया जा रहा है।
  • देश में बाघों की संख्या बढ़ने के साथ ही उनमें क्षेत्रीय अधिकार को लेकर संघर्ष के मामले भी बढ़े हैं, जिसे देखते हुए राज्य वन विभागों ने अंतर्राज्यीय स्थानांतारण का रास्ता अपनाया था।

स्रोत-द हिंदू

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