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सामाजिक न्याय

नमस्ते (NAMASTE) योजना

  • 10 Feb 2023
  • 10 min read

प्रिलिम्स के लिये:

मैला ढोने की समस्या से निपटने हेतु पहल, ULB

मेन्स के लिये:

नमस्ते योजना, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति से संबंधित मुद्दे

चर्चा में क्यों?

केंद्रीय बजट 2023-2024 में यंत्रीकृत स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र हेतु राष्ट्रीय कार्ययोजना (National Action for Mechanized Sanitation Ecosystem- NAMASTE) के लिये लगभग 100 करोड़ रुपए आवंटित किये गए हैं, साथ ही सरकार सभी शहरों एवं कस्बों में सेप्टिक टैंक तथा सीवर की 100% यांत्रिक सफाई सुनिश्चित करने पर विचार कर रही है।

नमस्ते योजना:

  • परिचय:
    • इसे वर्ष 2022 में केंद्रीय क्षेत्र योजना के रूप में लॉन्च किया गया था।
    • यह योजना आवासन और शहरी मामलों के मंत्रालय तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Housing and Urban Affairs and the Ministry of Social Justice & Empowerment- MoSJE) द्वारा संयुक्त रूप से शुरू की जा रही है, इसका उद्देश्य असुरक्षित सीवर तथा सेप्टिक टैंक सफाई प्रथाओं को खत्म करना है।
  • उद्देश्य:
    • भारत में स्वच्छता/सफाई संबंधी कार्यों में होने वाली मौतों को शून्य करना।
    • स्वच्छता के सभी कार्य कुशल श्रमिकों द्वारा कराना।
    • कोई भी सफाई कर्मचारी मानव मल के सीधे संपर्क में न आए।
    • स्वच्छता कर्मचारियों को स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups- SHG) में शामिल करना और स्वच्छता उद्यमों को चलाने हेतु सशक्त बनाना।
    • सुरक्षित स्वच्छता कार्य के प्रवर्तन और निगरानी को सुनिश्चित करने हेतु राष्ट्रीय, राज्य एवं शहरी स्थानीय निकाय (ULB) स्तरों पर पर्यवेक्षी तथा निगरानी प्रणाली को मज़बूत करना।
    • स्वच्छता सेवा चाहने वालों (व्यक्तियों और संस्थानों) को पंजीकृत और कुशल स्वच्छता श्रमिकों से सेवाएँ लेने हेतु जागरूकता बढ़ाना।

ULB में लागू की जाने वाली योजना की मुख्य विशेषताएँ:

  • पहचान: NAMASTE में सीवर/सेप्टिक टैंक वर्कर्स (SSWs) की पहचान करने की परिकल्पना की गई है।
  • SSW को व्यावसायिक प्रशिक्षण और PPE किट प्रदान करना।
  • स्वच्छता प्रतिक्रिया इकाइयों (Sanitation Response Units- SRU) को सुरक्षा उपकरणों हेतु सहायता।
  • आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (Ayushman Bharat-Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana- AB-PMJAY) के तहत चिह्नित SSW और उनके परिवारों को स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ प्रदान करना।
  • आजीविका सहायता: कार्ययोजना स्वच्छता से संबंधित उपकरणों की खरीद हेतु सफाई कर्मचारियों को वित्तीय सहायता एवं सब्सिडी (पूंजी+ब्याज) प्रदान करके मशीनीकरण तथा उद्यम विकास को बढ़ावा देगी।
  • सूचना शिक्षा और संचार (Information Education and Communication- IEC) अभियान: नमस्ते योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने हेतु ULB और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (National Safai Karamcharis Finance & Development Corporation- NSKFDC) द्वारा संयुक्त रूप से व्यापक अभियान चलाए जाएंगे।

हाथ से मैला ढोने की प्रथा/मैनुअल स्कैवेंजिंग:

  • मैनुअल स्कैवेंजिंग को "सार्वजनिक सड़कों और सूखे शौचालयों से मानव मल को हटाने, सेप्टिक टैंक, नालों और सीवर की सफाई" के रूप में परिभाषित किया गया है।
  • भारत ने मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 (Prohibition of Employment as Manual Scavengers and their Rehabilitation Act, 2013) के तहत इस प्रथा पर प्रतिबंध लगा दिया है।
    • यह अधिनियम हाथ से मैला ढोने की प्रथा को "अमानवीय प्रथा" के रूप में चिह्नित करता है।

मैला ढोने की समस्या से निपटने के लिये उठाए गए कदम:

  • हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास (संशोधन) विधेयक, 2020:
    • यह सीवर की सफाई को पूरी तरह से मशीनीकृत करने, 'ऑन-साइट' सुरक्षा के तरीके अपनाने और सीवर में होने वाली मौतों के मामले में कर्मियों के परिवार वालों को मुआवज़ा प्रदान करने का प्रस्ताव करता है।
    • यह मैला ढोने वालों कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 में बदलाव है।
    • इसे अभी कैबिनेट की मंज़ूरी मिलना शेष है।
  • मैला ढोने वालों कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013
    • वर्ष 2013 का अधिनियम, जो वर्ष 1993 के अधिनियम के स्थान पर लाया गया, न केवल शुष्क शौचालयों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाता है बल्कि अस्वच्छ शौचालयों, गड्ढों और खुली नालियों की हाथों द्वारा सफाई पर भी प्रतिबंध लगाता है।
  • अस्वच्छ शौचालयों का निर्माण और रखरखाव अधिनियम, 2013:
    • यह अस्वच्छ शौचालयों के निर्माण या रखरखाव तथा किसी को भी हाथ से मैला ढोने हेतु काम पर रखने के साथ-साथ सीवर और सेप्टिक टैंकों की खतरनाक सफाई को गैरकानूनी घोषित करता है।
  • अत्याचार निवारण अधिनियम:
    • वर्ष 1989 में अत्याचार निवारण अधिनियम सफाई कर्मचारियों के लिये एक एकीकृत रक्षा कवच साबित हुआ, मैला ढोने वालों के रूप में कार्यरत 90% से अधिक लोग अनुसूचित जाति के थे। यह अधिनियम हाथ से मैला ढोने वालों को निर्दिष्ट पारंपरिक व्यवसायों से मुक्त करने के संदर्भ में एक मील का पत्थर बन गया।
  • सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय:
    • वर्ष 2014 में सर्वोच्च न्यायालय के एक आदेश ने सरकार के लिये उन सभी लोगों की पहचान करना अनिवार्य कर दिया था, जो वर्ष 1993 के बाद से सीवेज सफाई का काम करने के दौरान मारे गए थे और प्रत्येक व्यक्ति के परिवार को मुआवज़े के रूप में 10 लाख रुपए दिये जाने का भी आदेश दिया गया था।

 UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न: 

प्रिलिम्स:

प्रश्न: 'राष्ट्रीय गरिमा अभियान' एक राष्ट्रीय अभियान है, जिसका उद्देश्य है: (2016)

(a) बेघर एवं निराश्रित व्यक्तियों का पुनर्वास और उन्हें आजीविका के उपयुक्त स्रोत प्रदान करना।
(b) यौनकर्मियों को उनके अभ्यास से मुक्त करना और उन्हें आजीविका के वैकल्पिक स्रोत प्रदान करना।
(c) हाथ से मैला ढोने की प्रथा को खत्म करना और हाथ से मैला ढोने वालों का पुनर्वास करना।
(d) बंधुआ मज़दूरों को मुक्त करना और उनका पुनर्वास करना।

उत्तर: (c)

व्याख्या:

  • राष्ट्रीय गरिमा अभियान वर्ष 2001 में शुरू किया गया, मैला ढोने की प्रथा के उन्मूलन और इस कार्य में संलग्न लोगों के लिये गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करने हेतु यह एक राष्ट्रीय अभियान है।
  • अतः विकल्प (c) सही है।

मेन्स:

प्रश्न. निषेधात्मक श्रम के कौन-से क्षेत्र हैं, जिनका रोबोटों द्वारा धारणीय रूप से प्रबंधन किया जा सकता है? ऐसी पहलों पर चर्चा कीजिये, जो प्रमुख अनुसंधान संस्थानों में मौलिक और लाभप्रद नवाचार के लिये अनुसंधान को आगे बढ़ा सकें। (2015)

स्रोत: पी.आई.बी.

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