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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

मेगा प्रयोगशालाएँ

  • 13 Aug 2020
  • 7 min read

प्रिलिम्स के लिये: 

मेगा प्रयोगशालाएँ

मेन्स के लिये: 

मेगा प्रयोगशालाओं के लाभ, COVID-19 से संबंधित विभिन्न टेस्ट

चर्चा में क्यों?

COVID-19 के परीक्षण को गति देने के साथ-साथ परीक्षण की सटीकता में सुधार लाने के लिये, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (Council of Scientific and Industrial Research- CSIR) द्वारा "मेगा प्रयोगशालाएँ" (Mega labs) विकसित करने पर काम किया जा रहा है।

प्रमुख बिंदु:

  • इन प्रयोगशालाओं में नेक्स्ट जनरेशन सीक्वेंसिंग मशीन (Next Generation Sequencing Machines- NGS) की स्थापना की जाएगी।
    • इन मशीनों का प्रयोग मानव जीनोम अनुक्रमण के लिये भी किया जाता है।
    • CSIR ने NGS मशीनों के निर्माण हेतु U.S आधारित इल्लुमिना कंपनी के साथ भागीदारी की है।
    • वर्तमान में भारत में उपलब्ध इस प्रकार की NGS  मशीन की कीमत लगभग 4 करोड़ रुपए है।
  • इन मशीनों को SARS-CoV-2 कोरोनावायरस का पता लगाने हेतु एक बार में 1,500-3,000 वायरल जीनोम अनुक्रम करने के लिये फिर से तैयार किया जाएगा।

Genome-Study

लाभ:

  • सटीकता-
    • NGS परीक्षणों की सटीकता RT-PCR की तुलना में 70%-80% और एंटीजन परीक्षणों की 50% की तुलना में 97.53% है 
      • जीनोम अनुक्रमण मशीनों से वायरस की उन संभावित उपस्थिति का पता बेहतर तरीके से और उपयुक्त संशोधनों के साथ लगाया जा सकता है जो पारंपरिक रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन परीक्षण (reverse transcription polymerase chain reaction- RT-PCR) से छूट जाते हैं।
      • RT-PCR परीक्षण के तहत SARS-COV-2 वायरस की पहचान वायरस के केवल विशिष्ट हिस्सों का विश्लेषण करते हुए की जाती है, जबकि जीनोम विधि सहायता से वायरस के जीनोम के एक बड़े हिस्से का विश्लेषण किया जा सकता है। 
    • यह विधि वायरस की उपस्थिति का सटीकता से निर्धारण कर सकती है।
  • पुष्टिकरण-
    • NGS के  मामलों को या तो सकारात्मक या नकारात्मक के रूप में पहचाना जाता है जबकि RT-PCR उन्हें 'अनिर्णायक' भी कर देता है। इस प्रकार इसे एक पुष्टिकरण परीक्षण के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है
  • विश्वसनीयता-
    • यह वायरस के विकास के इतिहास का भी पता लगा सकता है और म्यूटेशन को अधिक मज़बूती से ट्रैक कर सकता है।
    • यह अधिक स्थानों की पहचान करने में मदद कर सकता है, क्योंकि SARS-COv-2 वायरस अन्य संबंधित वायरस से भिन्न होते हैं।
  • बड़े पैमाने पर परीक्षण:
    • भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (Indian Council of Medical Research-ICMR) के अनुसार, NGS परीक्षण वर्तमान में लगभग प्रतिदिन 7.5 लाख से एक लाख परीक्षण प्रति दिन तक बढ़ा सकते हैं। 
    • RT-PCR में प्राइमर और प्रोब की आवश्यकता होती है जो महामारी के दौरान थोड़े समय में बड़े पैमाने पर ऐसे परीक्षणों के संचालन में एक बड़ी बाधा के रूप में होते हैं। 
    • NGS को प्राइमर और प्रोब की आवश्यकता नहीं होती है इसमें केवल कस्टम अभिकर्मकों (Custom Reagents) की आवश्यकता होती है।

प्राइमर (Primers): 

  • प्राइमर एक विशेष DNA अनुक्रम को बढ़ाने के लिये उपयोग किये जाने वाले DNA के छोटे अनुक्रम हैं।

प्रोब (Probes):

  • प्रोब एक छोटा रेडियोधर्मी या फ्लोरोसेंटली (Radioactively or Fluorescently) लेबल DNA अनुक्रम है, जिसका उपयोग किसी विशेष DNA अनुक्रम की पहचान करने के लिये किया जाता है।

अभिकर्मक (Reagents):

  • अभिकर्मक को पशु ऊतकों से DNA अर्क (Extracts) को तैयार करने के लिये डिज़ाइन किया गया है जिसका प्रयोग सीधे PCR में किया जा सकता है।

अन्य प्रयोग:

  • पूरे जीनोम अनुक्रमण में सक्षम "हब्स" स्थापित करने से वायरस में होने वाले महत्त्वपूर्ण परिवर्तन को ट्रैक करने में मदद मिलेगी और किसी भी प्रकार के प्रकोप के लिये (वायरल या बैक्टीरियल मूल) पुनरुद्देशित किया जा सकता है, ।
  • NGS का उपयोग COVID-19 के लिये नए नैदानिक ​​परीक्षणों को विकसित करने के लिये भी किया जा सकता है।

निगरानी और ट्रेसिंग:

  • मौजूदा परीक्षणों की सीमित सटीकता और क्षमता के कारण, एक बड़ी आबादी के गलत तरीके से नकारात्मक परिणाम आए हैं।
  • NGS बड़े पूलों जैसे- औद्योगिक हब, वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों या उन स्थानों जहाँ प्रकोप होने की संभावना है, की निरंतर निगरानी जैसे एक बड़े उद्देश्य की प्राप्ति में मदद कर सकता है ।

COVID-19 के लिये परीक्षण:

देश में COVID -19 संक्रमण का पता लगाने के लिये परीक्षण के विभिन्न तरीकों का प्रयोग किया जा रहा है। इनमें शामिल हैं-

स्रोत: द हिंदू

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