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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

डेपसांग मैदान

  • 13 Aug 2020
  • 6 min read

प्रिलिम्स के लिये: 

दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी, दौलत बेग ओल्डी, वास्तविक नियंत्रण रेखा, गलवान घाटी

मेन्स के लिये: 

वर्तमान समय में भारत-चीन के मध्य उत्पन्न सामरिक विवाद का कारण, प्रभाव एवं समाधान 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में, भारत एवं चीन के मध्य सामरिक रूप से महत्त्वपूर्ण डेपसांग मैदान (Depsang Plains) के मुद्दों पर चर्चा करने के लिये मेजर जनरल-स्तरीय वार्ता संपन्न की गई। वार्ता को दौलत बेग ओल्डी (Daulat Beg Oldie- DBO) में आयोजित किया गया जो दोनों देशों द्वारा प्रस्तुत अलग-अलग दावों के मुद्दों पर चर्चा करने तथा एक-दूसरे द्वारा डेपसांग मैदान में गश्त को रोकने पर केंद्रित थी।

Depsang-Plains

प्रमुख बिंदु:

  • बैठक के बारे में:
  • 15 जून 2020 को पोस्ट गैल्वान क्लैश (Post Galwan Clash) पर पहली उच्च स्तरीय वार्ता संपन्न हुई।
  • तब से सैन्य वार्ता कोर कमांडर स्तर तक ही सीमित है।
  • बैठक में केवल सीमा प्रबंधन के हिस्से के रूप में दोनों पक्षों द्वारा नियमित गश्त पैटर्न्स (Routine Patrolling Patterns) पर चर्चा की गई।

  • डेपसांग मैदान:
    • पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा ( Line of Actual Control (LAC) पर चल रहे गतिरोध में पैंगोंग एवं डेपसांग मैदान दोनों वर्तमान गतिरोध के प्रमुख क्षेत्र हैं।
    • डेपसांग मैदानों के सामरिक महत्त्व के बावजूद, अब तक आयोजित सैन्य वार्ताओं का क्रम गलवान (Galwan), गोगरा हॉटस्प्रिंग (Gogra Hotsprings) और पांगोंग झील के फिंगर कएरिया में (Finger area of Pangong) में उत्पन्न गतिरोध पर ही केंद्रित है।
    • डेपसांग LAC के उन क्षेत्रों में से एक है जहाँ टैंक युद्धाभ्यास संभव है।
    • वर्ष 1962 के युद्ध के दौरान, चीनी सैनिकों ने मैदान पर कब्जा कर लिया था। वर्ष 2013 में चीनी सैनिकों द्वारा इसके 19 किमी अंदर आकर टेंटों को उखाड़ दिया गया जिसके परिणामस्वरूप दोनों देशों के मध्य 21 दिन तक गतिरोध बना रहा।
  • डेपसांग मैदान में विवाद के मुद्दे:
    • डेपसांग मैदान के एक महत्त्वपूर्ण क्षेत्र में काफी संख्या में चीनी सेना की उपस्थिति है, जिसे बल्ज (Bulge) कहा जाता है।
    • चीनी सैनिकों ने भारतीय सेना की टुकड़ियों को विभिन्न गश्त बिंदुओं/क्षेत्रों तक पहुँचने से रोक दिया है।
    •  LAC के समीप चीन के द्वारा निर्माण कार्य तथा टैंक एवं बख्तरबंद वाहनों का मौज़ूदगी बढ़ाई गई है।

भारत की चिंता:

  • इस क्षेत्र में चीन की मौजूदगी भारतीय सीमा में स्थित बर्ट (Burts) और राकी नाला (Raki Nala) क्षेत्र में एक चुनौती/खतरा है इसके अलावा दौलत बेग ओल्डीबी (Daulat Beg Oldieby- DBO) चीनी सेना को 255 किमी लंबी दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी (Darbuk-Shyok-Daulat Beg Oldie) सड़क के काफी करीब लाता है। 

चुनौतियाँ:

  • भारतीय उद्योग परिसंघ द्वारा आयोजित भारत @ 75 शिखर सम्मेलन(India@75 Summit) को संबोधित करते हुए भारत के विदेश मंत्री द्वारा कहा गया कि चीन के साथ एक समझ विकसित करना चीन-भारतीय संबंधों के समक्ष एक बड़ी चुनौती है।
  • दोनों देश बिलियन-प्लस आबादी (Billion-Plus Populations)  के साथ भौगोलिक रूप से बहुत विशिष्ट हैं।
  • ऐसे समय में दोनों के मध्य एक समानांतर लेकिन अंतर में वृद्धि हो रही है जब दोनों आधुनिक देश एक दूसरे के पड़ोसी भी हैं जहाँ दोनों देशों के मध्य एक संतुलन समझ में बढ़ोतरी हो रही है।

आगे की राह:

  • भारतीय विदेश नीति के संचालन के लिये संतुलन स्थापित करना एक केंद्रीय एवं महत्त्वपूर्ण बिंदु है।
  • वर्तमान समय में  70 वर्ष पूर्व के राजनयिक संबंध स्थापित करने की मूल आकांक्षा को फिर से जागृत करने, अच्छे पड़ोसी तथा दोस्ती, एकता और सहयोग की भावना को आगे बढ़ने की आवश्यकता है।
  • भारत और चीन के पास विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, जनसांख्यिकी, बाज़ार एवं सेनाएँ  विद्यमान हैं इसलिये यह दोनों देशों के हितों में है कि वे अपने लोगों, क्षेत्र और वैश्विक शांति एवं विकास के लिये अपनी ऊर्जा को संरेखित करें।

स्रोत: द हिंदू

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