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दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी रोड

  • 11 Jun 2020
  • 7 min read

प्रीलिम्स के लिये:

दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी रोड, दौलत बेग ओल्डी (DBO)

मेन्स के लिये:

दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी रोड

चर्चा में क्यों?

'दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी' (Darbuk-Shyok-Daulat Beg Oldie- DSDBO) सड़क का निर्माण कार्य  लगभग दो दशकों के बाद वर्ष 2020 तक पूरा होने की उम्मीद है।

प्रमुख बिंदु:

  • DSDBO लद्दाख में भारतीय क्षेत्र का सबसे उत्तरी इलाका है, जिसे सेना के बीच सब-सेक्टर नॉर्थ (Sub-Sector North) के नाम से जाना जाता है।
  • भारत-चीन के बीच जब भी स्टैंड-ऑफ की रिपोर्टिंग होती है, दरबूक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी (Darbuk-Shyok-Daulat Beg Oldie- DSDBO) सड़क प्राय: चर्चा में रहती है।

'दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी' (DSDBO) सड़क:

  • यह सड़क दारबुक (Darbuk) से अंतिम भारतीय ग्राम श्योक (Shyok) तक लगभग 255 किमी. लंबी सड़क है।
  • यह सड़क  भारत-चीन  LAC के लगभग समानांतर है जो 13,000 फुट से 16,000 फुट के बीच की विभिन्न  बीच ऊँचाई से होकर जाती है।
  • यह सड़क लेह को काराकोरम दर्रे से जोड़ती है तथा चीन के शिनजियांग (Xinjiang) प्रांत से लद्दाख को अलग करती है।
  • श्योक तथा काराकोरम दर्रे के बीच दौलत बेग ओल्डी (DBO) 16,000 फीट से अधिक की ऊँचाई पर स्थित एक पठार है। यह अवस्थिति वायुसेना के लिये बहुत अधिक सामरिक महत्त्व रखती है क्योंकि यह अवस्थिति  वायु सेना के लिये आपूर्ति सामग्री गिराने के लिये उन्नत लैंडिंग ग्राउंड (Advanced Landing Ground- ALG) है।

दौलत बेग ओल्डी (DBO):

  • DBO दुनिया की सबसे ऊँचाई पर स्थित हवाई पट्टी थी, जिसे मूल रूप से 1962 के युद्ध के दौरान बनाया गया था। लेकिन वर्ष 2008 तक इसका रखरखाव नहीं किया गया। वर्ष 20O8 में भारतीय वायु सेना (Indian Air Force- IAF) द्वारा इसे पुन: प्रारंभ किया गया ताकि LAC के पास इसका उन्नत लैंडिंग ग्राउंड्स (Advanced Landing Grounds-ALGs) के रूप में उपयोग किया जा सके।  वर्ष 2008 एंटोनोव एन-32 (Antonov An-32) सैन्य विमान तथा अगस्त 2013 में परिवहन विमान C-130J-30 की की लैंडिंग कराई गई।

Daulat-Beg-Oldi

सड़क निर्माण की पृष्ठभूमि:

  • इस सड़क का निर्माण कार्य वर्ष 2000 में शुरू किया गया था जिसे वर्ष 2012 तक पूरा किया जाना था। सड़क निर्माण का कार्य 'प्रधान मंत्री कार्यालय' (Prime Minister’s Office- PMO) की निगरानी में 320 करोड़ रुपए की लागत से पूरा किया जाना था।
  • हालाँकि निर्माण कार्य को समय पर पूरा नहीं किया जा सका क्योंकि श्योक नदी घाटी में बनाई गई सड़क ग्रीष्मकाल में बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त हो जाती थी। बाद में  सड़क के प्रमुख हिस्सों को नदी से दूर रखते हुए पुन: निर्माण किया गया।
  • अक्टूबर,  2019 में श्योक नदी के ऊपर 430 मीटर लंबे कर्नल चेवांग रिनचेन सेतु (Colonel Chewang Rinchen Setu) का उद्घाटन किया गया, जो पूर्वी लद्दाख में दारबुक (Darbuk) से दौलत बेग ओल्डी (DBO) को जोड़ता है।
  • इसके साथ ही लद्दाख के सियाचिन ग्लेशियर क्षेत्र को भारत सरकार द्वारा पर्यटकों के लिये खोल दिया गया। 

सड़क का सामरिक महत्त्व:

  • भारत-चीन सीमा पर विभिन्न टकरावों तथा आपत्तियों के बावजूद भारत ने ‘वास्तविक नियंत्रण रेखा’ (Line of Actual Control- LAC) पर अवसंरचनात्मक कार्यों को लगातार जारी रखने का निर्णय लिया है। DSDBO सड़क निर्माण कार्य इसी दिशा में एक पहल है।
  • DBO चीन के साथ LAC से केवल 9 किमी. की दूरी पर अवस्थित है।  यह सड़क अंतर्राष्ट्रीय सीमा क्षेत्र, अक्साई चिन, चिप चाप नदी (Chip Chap River) और जीवान नाला (Jiwan Nalla) से सटे क्षेत्रों का प्रबंधन करने में मदद करेगी।
  • वर्तमान समय में यहाँ पहुंचने का एकमात्र तरीका सैन्य हवाई पट्टी है, अत: सड़क से सैन्य सामान पहुँचाना आसान है। 
  • चीन ने गैल्वान नदी घाटी क्षेत्र के साथ-साथ निर्माण कार्य किया है अत: DSDBO सड़क को चीन से सीधा खतरा है।
  • DBO के पश्चिम में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (China-Pakistan Economic Corridor- CPEC) का निर्माण कार्य किया जा रहा है। 

आगे की राह:

  • वुहान (2018) तथा महाबलीपुरम (2019) में होने वाले ‘भारत-चीन अनौपचारिक शिखर सम्मेलन’ में दोनों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति व्यवस्था सुनिश्चित करने के प्रयासों को बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की थी।  
  • 1 अप्रैल, 2020 को ‘भारत- चीन राजनयिक संबंधों को 70 वर्ष’ पूरे हुए हैं। दोनों देशों ने पिछले चार दशकों में शांति से सीमा मुद्दों को हल किया है, जिससे उन्हें उम्मीद है कि वर्तमान सीमा-तनाव भी जल्द ही हल कर लिया जाएगा।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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