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मानस मोबाइल एप

  • 16 Apr 2021
  • 6 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारत सरकार ने भारत के लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिये एक मोबाइल एप, मानस (Mental Health and Normalcy Augmentation System-MANAS) लॉन्च किया।

  • MANAS को एक राष्ट्रीय कार्यक्रम के रूप में ‘प्रधानमंत्री विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सलाहकार परिषद’ (PM-STIAC) ​​का समर्थन प्राप्त है।
    • PM-STIAC: यह एक अति-महत्त्वपूर्ण परिषद है जो प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय को विशिष्ट विज्ञान और प्रौद्योगिकी संबंधी स्थिति का आकलन करने, इस क्षेत्र की चुनौतियों को समझने, विशिष्ट हस्तक्षेप, भविष्य के रोडमैप को विकसित करने और तदनुसार प्रधानमंत्री को सलाह देने की सुविधा प्रदान करता है।

प्रमुख बिंदु:

  • मानस एक व्यापक, समर्पित और राष्ट्रीय डिजिटल कल्याणकारी मंच है, जिसे भारतीय नागरिकों के मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिये विकसित किया गया है।
    • यह विभिन्न सरकारी मंत्रालयों के स्वास्थ्य और कल्याण संबंधी प्रयासों को एकीकृत करता है।
    • यह सार्वभौमिक दक्षता के साथ जीवन कौशल और मुख्य मनोवैज्ञानिक प्रक्रियाओं पर आधारित है, जो विभिन्न आयु आधारित तरीके प्रदान कर मानसिक स्वास्थ्य कल्याण पर ध्यान केंद्रित करने वाले सकारात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है।

विकसित करने वाली संस्थाएँ:

  • ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज़’ (NIMHANS) बंगलूरू, सशस्त्र बल मेडिकल कॉलेज (AFMC) पुणे और ‘सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग’ (C-DAC) बंगलूरू।

लाभधारक:

  • सभी आयु वर्ग के लोगों की समग्र भलाई के साथ-साथ MANAS का प्रारंभिक संस्करण 15-35 वर्ष के आयु वर्ग में सकारात्मक मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।

लक्ष्य:

  • एक स्वस्थ और खुशहाल समुदाय का निर्माण करने के लिये अपनी क्षमता को पोषित करके भारत को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना।

मानस का आदर्श वाक्य:

  • उत्तम मन, सक्षम जन।

भारत में मानसिक स्वास्थ्य:

Cause-for-concern

  • डेटा विश्लेषण: फरवरी 2020 में ‘द लांसेट साइकेट्री’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2017 में भारत में 197.3 मिलियन लोग मानसिक विकारों से ग्रस्त थे।
    • शीर्ष मानसिक बीमारियों से अवसादग्रस्त विकारों से 45.7 मिलियन लोग और चिंता संबंधी विकारों से 44.9 मिलियन लोग ग्रस्त थे।
    • भारत में कुल विकलांगता-समायोजित जीवन वर्ष (DALYs) में मानसिक विकारों का योगदान वर्ष 1990 के 2.5% से बढ़कर वर्ष 2017 में 4.7% हो गया।
      • अवसादग्रस्तता विकार और चिंता विकार कुल मानसिक विकारों में सबसे अधिक प्रभावी रहे हैं।
      • DALYs: DALYs नामक इकाइयों में किसी बीमारी या विकार से जुड़ी दिव्यांगता के प्रकार को मापा जा सकता है।
        • DALY किसी दी गई आबादी के भीतर बीमारी, दिव्यांगता या समय से पहले मृत्यु के कुल वर्षों के बारे में बताता है।

मानसिक स्वास्थ्य में सुधार के लिये अन्य भारतीय पहलें:

  • मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम (MHCA) 2017:
    • मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम (MHCA) 2017 वर्ष 2018 में लागू हुआ, जो कि ‘विकलांग लोगों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय’ की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये लागू किया गया था, भारत ने वर्ष 2007 में इसकी पुष्टि की थी।
  • किरन:
    • सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने चिंता, तनाव, अवसाद, आत्मघाती विचारों और अन्य मानसिक स्वास्थ्य चिंताओं का सामना करने वाले लोगों को सहायता प्रदान करने के लिये एक 24/7 टोल-फ्री हेल्पलाइन शुरू की है।
  • मनोदर्पण पहल:
    • मनोदर्पण आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत शिक्षा मंत्रालय की एक पहल है।
    • इसका उद्देश्य छात्रों, परिवार के सदस्यों और शिक्षकों को कोविड -19 के दौरान उनके मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण के लिये मनोसामाजिक सहायता प्रदान करना है।
  • निमहांस राह (NIMHANS RAAH) एप:
    • यह मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों और पेशेवरों के संबंध में डेटा का वन-स्टॉप स्रोत है। इसे NIMHANS द्वारा विकसित किया गया है।

आगे की राह:

  • हालाँकि सुरक्षित और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नागरिकों के मानसिक स्वास्थ्य के लिये एप विकसित करना आवश्यक है, परंतु इस एप को सार्वजनिक स्वास्थ्य योजनाओं जैसे- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, पोषण अभियान, ई-संजीवनी और अन्य के साथ एकीकृत किया जाना चाहिये। इसके अलावा इसे बहुभाषी बनाया जाना चाहिये।
  • मनोवैज्ञानिकों और मनोचिकित्सकों की संख्या में वृद्धि की जानी चाहिये।

स्रोत-पीआइबी

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