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लिथियम आयन बैटरी प्रदर्शन पर शोध

  • 16 Apr 2021
  • 11 min read

चर्चा में क्यों?

आईआईटी गुवाहाटी के शोधकर्त्ताओं ने रिचार्जेबल लिथियम आयन बैटरी के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिये एक तकनीक विकसित की है, जो वर्तमान में उपयोग किये जाने वाले अधिकांश वहनीय (Portable) उपकरणों को शक्ति प्रदान करती है।

प्रमुख बिंदु:

लिथियम आयन बैटरी:

  • विकास:
    • वर्ष 2019 में रसायन का नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) संयुक्त रूप से तीन रसायन वैज्ञानिकों, अमेरिका (America) के जॉन बी गुडइनफ, ब्रिटेन (Britain) के एम. स्टेनली व्हिटिंगम और जापान (Japan) के अकीरा योशिनो को लिथियम-आयन बैटरी (Lithium-Ion Batteries) की खोज और उसके विकास के लिये दिया गया है।
    • लिथियम आयन बैटरी के विकास की शुरूआत 1970 के दशक में तेल संकट के दौरान हुई थी, जब एक्सॉन मोबाइल के लिये काम कर रहे व्हिटिंघम (Whittingham) ने एक ऐसी ऊर्जा तकनीक की खोज शुरू की जो पेट्रोल-डीज़ल जैसे जीवाश्म ईंधन से मुक्त हों और जिसे पुन: रिचार्ज किया जा सके। 
    • वर्ष 1985 में वाणिज्यिक रूप से संचारित पहली लिथियम आयन बैटरी अकीरा योशिनो द्वारा बनाई गई थी।
  • उपयोगिता: 
    • लिथियम-आयन बैटरी प्रौद्योगिकी इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहनों के लिये महत्त्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत बन गई है। यद्यपि लिथियम-आयन बैटरी को फोन और लैपटॉप जैसे अनुप्रयोगों के लिये भी पर्याप्त रूप से कुशल माना जाता है।
    • वर्तमान में अधिकांश इलेक्ट्रिक वाहन (EV) ली-आयन बैटरी का उपयोग करते हैं, लेकिन धीरे-धीरे उनकी सैद्धांतिक सीमा तक पहुँच रहे हैं जो लगभग 300 वाट प्रति घंटे की ऊर्जा प्रदान करने में सक्षम हैं ।
    •  इन बैटरियों का उपयोग सौर और पवन ऊर्जा को संग्रहीत करने के लिये भी किया जा सकता है।
  • हानि:
    • लिथियम-आयन बैटरी के कुछ नुकसान भी है जिसमें ओवरहीटिंग के कारण उनकी संवेदनशीलता और उच्च वोल्टेज पर नुकसान होने का खतरा शामिल है।
      • चूँकि वे ज्वलनशील और दहनशील पदार्थों से बने होते हैं।
    • यह बैटरी समय के साथ अपनी क्षमता खोने लगती हैं- उदाहरण के लिये, एक नए लैपटॉप की बैटरी, एक पुराने लैपटॉप की अपेक्षा बेहतर होती है।

नवीन शोध:

  • आईआईटी गुवाहाटी के शोधकर्त्ताओं ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जो SCO के रूप में सबसे महत्त्वपूर्ण बैटरी आंतरिक अवस्थाओं में से एक का अनुमान लगा सकती है। 
    • SCO बैटरी की शेष क्षमता को दर्शाता है, यानी बैटरी को पूरी तरह से डिस्चार्ज होने से पहले कितना चार्ज किया जा सकता है।
  • शेष क्षमता का ज्ञान बैटरी की क्षमता के उपयोग को अनुकूलित करने में मदद करता है, यह बैटरी की ओवरचार्जिंग और अंडर चार्जिंग को रोकता है, उसकी क्षमता में सुधार करता है, लागत कम करता है और बैटरी की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
  • एक बैटरी की संचालन क्षमता में सुधार और अनुकूलित करने के लिये, इसके विभिन्न राज्यों की सटीक भविष्यवाणी करना महत्वपूर्ण है। इनमें से एक राज्य SCO है , जिसके बारे में अभी तक अनुमान लगाना मुश्किल है।

‘स्टेट ऑफ चार्ज’ (SOC)

  • सेल की आवेश की स्थिति (SOC) उस क्षमता को दर्शाती है जो वर्तमान में संचारित  क्षमता के कार्य के रूप में उपलब्ध है।
  • SOC का मान 0% और 100% के बीच भिन्न-भिन्न होता है। यदि SOC 100% है, तो सेल पूरी तरह से चार्ज है जबकि 0% का SOC यह इंगित करता है कि सेल पूरी तरह डिस्चार्ज है।
  • व्यावहारिक अनुप्रयोगों में,SOC को 50% से अधिक की अनुमति नहीं है और इसलिये SOC 50% तक पहुँचने पर सेल को रिचार्ज किया जाता है।
  • इसी तरह, जैसे-जैसे सेल की उम्र बढ़ने लगती है, अधिकतम SOC कम होने लगती है। इसका मतलब है कि एक वृद्ध कोशिका के लिये, 100% SOC एक नए सेल के 75 -80% SOC के बराबर होगी।

संबंधित विकास:

  • वर्ष 2019 में, जॉन्स हॉपकिन्स एप्लाइड फिजिक्स लेबोरेटरी ने एक लिथियम-आयन बैटरी विकसित की है।यह बैटरी दहनशील से मुक्त होती है।
  • इससे पहले जनवरी 2020 में, ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने दावा किया था कि उन्होंने दुनिया की सबसे कुशल लिथियम-सल्फर (ली-एस) बैटरी विकसित की है, जो लगातार पाँच दिनों तक स्मार्टफोन को बिजली देने में सक्षम है
    • जबकि ली-एस बैटरी में प्रयुक्त सामग्री ली-आयन बैटरी से अलग नहीं होती है, ऑस्ट्रेलियाई शोधकर्ताओं ने  बिना किसी गिरावट के उच्च तनाव को समायोजित करने के लिये सल्फर कैथोड्स (एक प्रकार का इलेक्ट्रिकल कंडक्टर, जिसके माध्यम से इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं) के डिजाइन को फिर से जोड़ दिया है।
  • खनिज बिदेश इंडिया लिमिटेड (KBIL) की स्थापना सार्वजनिक क्षेत्र की तीन कंपनियों- नालको (NALCO), हिंदुस्तान कॉपर और मिनरल एक्सप्लोरेशन कार्पोरेशन लिमिटेड द्वारा विदेशों में लिथियम एवं कोबाल्ट जैसे रणनीतिक खनिज संसाधनों को प्राप्त करने के लिये विशिष्ट जनादेश के साथ अगस्त 2019 में की गई थी।  
  • KBIL द्वारा चिली और बोलिविया में भी महत्त्वपूर्ण खनिजों की खोज के लिये ऐसे ही संभावित विकल्पों पर कार्य किया जा रहा है। ध्यातव्य है कि  चिली और बोलिविया भी विश्व के शीर्ष लिथियम उत्पादक देशों की सूची में शामिल हैं। 

लिथियम-आयन प्रौद्योगिकी के संभावित विकल्प:  

  • लिथियम सल्फर बैटरी:
    • ली-एस बैटरी को आमतौर पर उत्पादन, ऊर्जा दक्षता और बेहतर सुरक्षा की कम लागत के कारण ली-आयन बैटरी के उत्तराधिकारी माना जाता है ।
      • उनके उत्पादन की लागत कम है क्योंकि सल्फर प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।
    • फिर भी, इन बैटरियों के व्यवसायीकरण में कुछ कठिनाइयाँ आई हैं जिनमें मुख्यतः उनके लघु जीवन चक्र और अपूर्ण बिजली क्षमता शामिल है।
  • ग्रैफीन बैटरी:
    • लिथियम बैटरियों को बार-बार चार्ज करने की आवश्यकता इसकी वहनीयता को सीमित करती है, ऐसे में ग्रैफीन बैटरियाँ इसका एक महत्त्वपूर्ण विकल्प हो सकती हैं।  ग्रैफीन हाल ही में स्थिर और पृथक किया गया पदार्थ है।  
  • फ्लोराइड बैटरी:
    • फ्लोराइड बैटरियों में लिथियम बैटरी की तुलना में आठ गुना अधिक समय तक चलने की क्षमता है।
  • सैंड बैटरी (Sand Battery):
    • लिथियम-आयन बैटरी के इस वैकल्पिक प्रकार में वर्तमान ग्रेफाइट ली-आयन बैटरी की तुलना में तीन गुना बेहतर प्रदर्शन प्राप्त करने के लिये सिलिकॉन का उपयोग किया जाता है। यह भी स्मार्टफोन में प्रयोग की जाने वाले लिथियम-आयन बैटरी के समान होती है परंतु इसमें एनोड के रूप में ग्रेफाइट के बजाय सिलिकॉन का उपयोग किया जाता है।
  • अमोनिया संचालित बैटरी:
    • अमोनिया से चलने वाली बैटरी का शायद बाज़ार में शीघ्र उपलब्ध होना संभव न हो परंतु आमतौर पर घरेलू क्लीनर के रूप में ज्ञात यह रसायन लिथियम का एक विकल्प हो सकता है, क्योंकि यह वाहनों और अन्य उपकरणों में लगे फ्यूल सेल को ऊर्जा प्रदान कर सकता है।
    • यदि वैज्ञानिकों द्वारा अमोनिया उत्पादन के एक ऐसे तरीके को खोज कर ली जाती है जिसमें उपोत्पाद के रूप में ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन न होता हो, तो इसे फ्यूल सेल को ऊर्जा प्रदान करने के लिये वहनीय विकल्प के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।
  • ऊर्ध्वाधर रूप से संरेखित कार्बन नैनोट्यूब इलेक्ट्रोड:
    • यह लिथियम आयन बैटरी इलेक्ट्रोड के लिये अच्छा विकल्प हो सकती है जिसमें उच्च दर की क्षमता और योग्यता की आवश्यकता होती है।
  • सॉलिड-स्टेट बैटरी: 
    • इसमें जलीय इलेक्ट्रोलाइट सॉल्यूशन के विकल्पों का उपयोग किया जाता है, यह एक ऐसा नवाचार है जो आग के जोखिम को कम करने के साथ ऊर्जा घनत्व में तीव्र वृद्धि करते हुए चार्जिंग समय को दो-तिहाई से कम कर सकता है।
    • ये सेल बगैर अतिरिक्त स्थान घेरे ही कॉम्पैक्ट इलेक्ट्रिक वाहन की परिवहन क्षमता में वृद्धि कर सकते हैं,  जो बैटरी प्रौद्योगिकी में एक महत्त्वपूर्ण बढ़त होगी।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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