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'मैं भी डिजिटल 3.0' अभियान

  • 10 Dec 2021
  • 7 min read

प्रिलिम्स के लिये

प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि’ योजना, 'मैं भी डिजिटल 3.0' अभियान

मेन्स के लिये

स्ट्रीट वेंडर्स की आर्थिक सहायता हेतु सरकार द्वारा किये गए प्रयास

चर्चा में क्यों?

हाल ही में आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने ‘प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि’ योजना के तहत 'मैं भी डिजिटल 3.0' अभियान शुरू किया।

प्रमुख बिंदु

  • मैं भी डिजिटल 3.0
    • यह स्ट्रीट वेंडर्स के लिये डिजिटल ऑनबोर्डिंग एंड ट्रेनिंग (DOaT) हेतु एक विशेष अभियान है।
    • इसका उद्देश्य उन स्ट्रीट वेंडर्स को डिजिटल रूप से शामिल करना है, जिन्हें पहले ही प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत ऋण प्रदान किया जा चुका है।
    • इसके तहत ऋण देने वाली संस्थाओं (LIs) को संवितरण के समय एक स्थायी क्यूआर कोड और ‘एकीकृत भुगतान इंटरफेस’ (UPI) आईडी जारी करने और डिजिटल लेनदेन के संचालन में लाभार्थियों को प्रशिक्षित करने का निर्देश दिया गया है।
    • इस योजना के कार्यान्वयन के लिये एक एकीकृत आईटी प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है। स्ट्रीट वेंडर्स सीधे प्रधानमंत्री स्वनिधि पोर्टल के माध्यम से ऋण के लिये आवेदन कर सकते हैं।
  • प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि
    • परिचय:
      • इसे आत्मानिर्भर भारत अभियान के तहत आर्थिक प्रोत्साहन- II के एक हिस्से के रूप में घोषित किया गया था।
      • इसे 1 जून, 2020 से लागू किया गया है, ताकि स्ट्रीट वेंडरों को उनकी आजीविका को फिर से शुरू करने के लिये किफायती कार्यशील पूंजी ऋण प्रदान किया जा सके, जो कोविड -19 लॉकडाउन के कारण प्रतिकूल रूप से प्रभावित हुए हैं। इसे 700 करोड़ रुपए के स्वीकृत बजट के साथ लागू किया गया था।
    • उद्देश्य
      • 50 लाख से अधिक स्ट्रीट वेंडरों को लाभान्वित करना, जो 24 मार्च, 2020 को या उससे पहले शहरी क्षेत्रों में वेंडिंग कर रहे थे, जिनमें आसपास के शहरी/ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी शामिल थे।
      • 1,200 रुपए प्रति वर्ष की राशि तक कैश-बैक प्रोत्साहन के माध्यम से डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देना।।
        • 31 जनवरी, 2021 तक, पीएम स्वनिधि योजना के तहत 13.82 लाख लाभार्थियों को 1,363.88 करोड़ रुपए के ऋण वितरित किये गये हैं।
    • विशेषताएँ:
      • विक्रेता 10,00 रुपए तक का कार्यशील पूंजी ऋण प्राप्त कर सकते हैं। जो एक वर्ष के कार्यकाल में मासिक किस्तों में चुकाया जा सकता है।
      • ऋण को समय पर/जल्दी चुकता करने पर, त्रैमासिक आधार पर प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से लाभार्थियों के बैंक खातों में 7% प्रतिवर्ष की ब्याज सब्सिडी जमा की जाएगी।
      • ऋण की शीघ्र अदायगी पर कोई ज़ुर्माना नहीं लगेगा। विक्रेता ऋण की समय पर/शीघ्र अदायगी पर बढ़ी हुई ऋण सीमा की सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।
    • चुनौतियाँ:
      • कई बैंक 100 और रु. 500. रुपए के बीच के आवेदन स्टांप पेपर पर मांग रहे हैं। 
      • बैंकों द्वारा पैन कार्ड मांगने और यहाँ तक ​​कि आवेदकों के CIBIL या क्रेडिट स्कोर की जाँच करने अथवा राज्य के अधिकारियों द्वारा मतदाता पहचान पत्र मांगने के भी मामले सामने आए हैं, जबकि प्रायः प्रवासी विक्रेता अपने साथ ये दस्तावेज़ नहीं रखते हैं।
        • CIBIL स्कोर किसी के क्रेडिट इतिहास का मूल्यांकन है और ऋण के लिये उनकी पात्रता निर्धारित करता है।
      • पुलिस और नगर निगम के अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न की शिकायतें भी सामने आई हैं।

स्ट्रीट वेंडर्स के लिये अन्य पहलें:

आगे की राह

  • PM SVANidhi योजना स्थायी होनी चाहिये: इसे 'अल्ट्रा-सूक्ष्म उद्योगों' (स्ट्रीट वेंडर्स) के लिये एक स्थायी विकास योजना के रूप में फिर से तैयार किया जाना चाहिये। यह उन्हें स्थायी आधार पर ऋण प्राप्त करने की अनुमति देगा।
  • निगरानी समितियों में अखिल भारतीय विक्रेता प्रतिनिधियों को शामिल करना: पीएम स्वनिधि योजना दिशा-निर्देशों की धारा 19 (इसकी प्रगति का आकलन करने के लिये केंद्रीय, राज्य और स्थानीय निगरानी समितियों की स्थापना) को संशोधित किया जाना चाहिये ताकि वेंडर यूनियनों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जा सके। ये योजना की अवधारणा में शामिल थे, इसलिये इसके कार्यान्वयन में भी शामिल किया जाना चाहिये।
  • स्थानीय प्रशासन का स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट के अनुसार काम करना: स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट, 2014 में विभिन्न ज़िलों में टीवीसी (टाउन वेंडिंग कमेटी) के गठन की परिकल्पना की गई है ताकि सरकार द्वारा पहचाने गए सभी स्ट्रीट वेंडर्स को मानदंडों के अधीन वेंडिंग ज़ोन में समायोजित किया जा सके।
    • विक्रेताओं की व्यापक बेदखली और उत्पीड़न से बचने के लिये योजना के साथ-साथ संबंधित प्रक्रियाओं जैसे कि वेंडिंग ज़ोन घोषित करना, राज्य के नियमों, योजनाओं और उप-नियमों का मसौदा तैयार करने को भी इस अधिनियम के तहत शामिल किया जाना चाहिये।

स्रोत- पी.आई.बी

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