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सामाजिक न्याय

पोखरण में कुम्हारों के सशक्तीकरण का प्रयास

  • 22 Jun 2020
  • 7 min read

प्रीलिम्स के लिये:

खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग, कुम्हार सशक्तीकरण योजना

मेन्स के लिये:

कुम्हारों के समक्ष समस्याएँ एवं उनके सशक्तीकरण हेतु प्रयास

चर्चा में क्यों?

खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (Khadi and Village Industries Commission- KVIC) ने पोखरण की एक समय सबसे प्रसिद्ध रही बर्तनों की कला की पुनःप्राप्ति तथा कुम्हारों को मुख्य धारा से जोड़ने के लिये प्रयास प्रारंभ किये हैं।

प्रमुख बिंदु:

  • पोखरण में कुम्हारों के परिवारों को इलेक्ट्रिक पॉटर चाकों (Electric Potter Wheels) का वितरण किया गया है।
  • इलेक्ट्रिक चाकों के अलावा, KVIC ने 10 कुम्हारों के समूह में 8 अनुमिश्रक मशीनों (Blunger Machines) का भी वितरण किया है। 
    • अनुमिश्रक मशीनों का इस्तेमाल मिट्टी को मिलाने के लिये किया जाता है। 
    • यह मशीन केवल 8 घंटे में 800 किलो मिट्टी को कीचड़ में बदल सकती है जबकि व्यक्तिगत रूप से मिट्टी के बर्तन बनाने के लिये 800 किलो मिट्टी तैयार करने में लगभग 5 दिन का समय लगता है।
  • KVIC ने गाँव में 350 प्रत्यक्ष रोज़गार का भी सृजन किया है। 
  • KVIC द्वारा किये जा रहे प्रयासों का उद्देश्य कुम्हारों को सशक्त बनाना, स्व-रोज़गार का सृजन करना और मृतप्राय हो रही मिट्टी के बर्तनों की कला को पुनर्जीवित करना है।
  • इसके अलावा इस गाँव के कुम्हारों को कुम्हार सशक्तीकरण योजना से भी जोड़ा गया है।
    • उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रम से राजस्थान के कई ज़िलों जैसे जयपुर, कोटा, झालावाड़ और श्री गंगानगर सहित एक दर्जन से अधिक ज़िलों को लाभ प्राप्त हुआ है।
  • KVIC अध्यक्ष द्वारा राजस्थान में KVIC के राज्य निदेशक को बाड़मेर और जैसलमेर रेलवे स्टेशनों पर मिट्टी के बर्तनों के उत्पादों का विपणन करने और उसकी बिक्री के लिये सुविधा प्रदान करने का निर्देश भी जारी किया गया है, जिससे कुम्हारों को विपणन में सहायता प्रदान की जा सके। 
    • 400 रेलवे स्टेशनों पर केवल मिट्टी/टेराकोटा के बर्तनों में खाद्य पदार्थों की बिक्री होती है जिनमें से राजस्थान के दो जैसलमेर और बाड़मेर शामिल हैं, दोनों प्रमुख रेलमार्ग पोखरण के सबसे नज़दीक हैं। 
    • KVIC की राज्य इकाई इन शहरों में पर्यटकों के उच्च स्तर को देखते हुए इन रेलवे स्टेशनों पर अपने मिट्टी के बर्तनों की बिक्री में सुविधा प्रदान करेगी।

कुम्हार सशक्तीकरण योजना

(Kumhar Sashaktikaran Yojana)

  • KVIC द्वारा राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, जम्मू और कश्मीर, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, असम, गुजरात, तमिलनाडु, ओडिशा, तेलंगाना और बिहार जैसे राज्यों के कई दूरदराज़ इलाकों में कुम्हार सशक्तीकरण योजना की शुरुआत की गई है। 
  • कुम्हार सशक्तीकरण योजना का मुख्य उद्देश्य कुम्हार समुदाय को मुख्यधारा में वापस लेकर आना है।
  • इस योजना के अंतर्गत, KVIC द्वारा बर्तनों के उत्पाद का निर्माण करने के लिये उपयुक्त मिट्टी को मिलाने के लिये अनुमिश्रक मशीनों और पग मिल्स जैसे उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं। 
    • इन मशीनों ने मिट्टी के बर्तनों के निर्माण की प्रक्रिया में लगने वाले कठिन परिश्रम को भी समाप्त कर दिया है और इसके कारण कुम्हारों की आय 7 से 8 गुना ज्यादा बढ़ गई है।

कुम्हारों के सशक्तीकरण की आवश्यकता:

  • पोखरण में 300 से अधिक कुम्हार परिवार रहते हैं जो कई दशकों से मिट्टी के बर्तनों के निर्माण के कार्य से जुड़े हुए हैं, लेकिन काम में कठिन परिश्रम और बाज़ार का समर्थन नहीं मिलने के कारण कुम्हारों ने अन्य रास्तों को तलाश करना शुरू कर दिया था। 

आगे की राह:

  • पोखरण (जहाँ पर भारत ने अपना पहला परमाणु परीक्षण किया था) को अब तक केवल परमाणु परीक्षणों के स्थल के रूप में जाना जाता था, लेकिन बहुत जल्द ही उत्कृष्ट मिट्टी के बर्तनों का निर्माण भी इसकी पहचान बनेगा।
  • कुम्हारों को आधुनिक उपकरण और प्रशिक्षण प्रदान करना उन्हें समाज के साथ जोड़ने और उनकी कला को पुनर्जीवित करने का प्रयास है।

खादी और ग्रामोद्योग आयोग 

(Khadi and Village Industries Commission): 

  • यह 'खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग अधिनियम (Khadi and Village Industries Commission Act) 1956' के तहत एक सांविधिक निकाय (Statutory Body) है। 
  • यह भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (Ministry of MSME) के अंतर्गत एक मुख्य संस्था है।

उद्देश्य:

  • सामाजिक उद्देश्य: रोज़गार देना। 
  • आर्थिक उद्देश्य: बिक्री योग्य वस्तुओं का उत्पादन करना। 
  • व्यापक उद्देश्य: गरीबों को आत्मनिर्भर बनाना एवं एक मज़बूत ग्रामीण सामुदायिक भावना का निर्माण करना। 

स्रोत: पी.आई.बी.

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