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जीव विज्ञान और पर्यावरण

IUCN वर्ल्ड कंज़र्वेशन काॅन्ग्रेस

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  • 07 Sep 2021
  • 9 min read

प्रिलिम्स के लिये

अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ, बहलर कछुआ संरक्षण पुरस्कार

मेन्स के लिये

IUCN से संबंधित विभिन्न महत्त्वपूर्ण पहलें

चर्चा में क्यों?

दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे समावेशी पर्यावरण निर्णयन फोरम 'IUCN वर्ल्ड कंज़र्वेशन काॅन्ग्रेस 2020' फ्रांँस के मार्सिले में आयोजित किया जा रहा है। ज्ञात हो कि इस फोरम को जून 2020 में सितंबर 2021 तक के लिये स्थगित कर दिया गया था।

  • इसके तहत मौजूदा जैव विविधता संकट सहित संरक्षण प्राथमिकताओं को संबोधित करने हेतु कई महत्त्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिये गए हैं।
  • अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) ‘विश्व संरक्षण काॅन्ग्रेस’ का आयोजन करता है, जो प्रत्येक चार वर्ष में एक बार दुनिया भर के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित की जाती है। इस प्रकार की पहली काॅन्ग्रेस’ संयुक्त राज्य अमेरिका में वर्ष 1948 में आयोजित की गई थी।

अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN)

  • अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) सरकारों तथा नागरिकों दोनों से मिलकर बना एक विशिष्ट सदस्यता संघ है।
  • यह दुनिया की प्राकृतिक स्थिति को संरक्षित रखने के लिये एक वैश्विक प्राधिकरण है जिसकी स्थापना वर्ष 1948 में की गई थी।
  • इसका मुख्यालय स्विटज़रलैंड में स्थित है।
  • IUCN द्वारा जारी की जाने वाली ‘रेड लिस्ट’ दुनिया की सबसे व्यापक सूची है, जिसमें पौधों और जानवरों की प्रजातियों की वैश्विक संरक्षण की स्थिति को दर्शाया जाता है।

प्रमुख बिंदु

  • वैश्विक स्वदेशी एजेंडा:
    • यह भूमि, क्षेत्रों, जल, तटीय समुद्र और प्राकृतिक संसाधनों के शासन हेतु स्वदेशी अधिकारों को मान्यता एवं सम्मान प्रदान करने का आह्वान करता है।
    • इसे IUCN के स्वदेशी लोगों के संगठन के सदस्यों द्वारा विकसित किया गया था।
    • यह पाँच विषयों से संबंधित 10 उच्च-स्तरीय प्रस्तावों और परिणामों को प्रस्तुत करता है: स्वदेशी शासन; जैव विविधता संरक्षण; जलवायु कार्रवाई; कोविड-19 के बाद रिकवरी के प्रयास तथा खाद्य सुरक्षा और वैश्विक नीति निर्धारण।
  • अद्यतित रेड लिस्ट:
    • नौ श्रेणियों में प्रजातियों की संख्या: अद्यतन या अपडेट की गई रेड लिस्ट के अनुसार, प्रजातियों के स्तर पर वैश्विक सुधार के बावजूद उच्च जोखिम वाली प्रजातियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
      • कुल 902 प्रजातियांँ आधिकारिक तौर पर विलुप्त (Extinct) हो चुकी हैं। जिन प्रजातियों का मूल्यांकन किया गया उनमें से 30% (138,374) विलुप्त होने के खतरे का सामना कर रही हैं।
      • 80 वन्य प्रजातियांँ विलुप्त हो चुकी हैं, 8,404 गंभीर रूप से संकटग्रस्त, 14,647 संकटग्रस्त, 15,492 सुभेद्य प्रजातियों में शामिल हैं तथा  8,127 प्रजातियों के भविष्य पर खतरा बना हुआ है।
      • लगभग 71,148 प्रजातियों की स्थिति कम चिंताजनक है, जबकि 19,404 प्रजातियों के डेटा का अभाव है।
      • नौवीं श्रेणी 'नॉट इवैल्यूएटेड' (Not Evaluated) प्रजाति है अर्थात्  इन प्रजातियों का मूल्यांकन आईयूसीएन द्वारा नहीं किया गया है।
    • कोमोडो ड्रैगन्स: इंडोनेशिया की कोमोडो ड्रैगन (Varanus komodoensis) विश्व की सबसे बड़ी जीवित छिपकली है और इसे  सुभेद्य से संकटग्रस्त की श्रेणी में स्थानांतरित कर दिया गया है।
      • इस प्रजाति पर जलवायु परिवर्तन के खतरनाक प्रभाव देखे गए हैं, समुद्र के बढ़ते स्तर के साथ अगले 45 वर्षों में प्रजाति के आवास में कम-से-कम 30% की कमी आने की आशंका है।
    • टूना प्रजाति: सात सबसे अधिक व्यावसायिक रूप से पकड़ी जाने वाली मछली की  टूना प्रजातियों में से चार की स्थिति में सुधार/ रिकवरी के संकेत दिखाई दिये हैं।
      • अटलांटिक ब्लूफिन टूना (Thunnus thynnus) को संकटग्रस्त (Endangered) से कम चिंताग्रस्त (Least concern) श्रेणी में रखा गया है। 
      • दक्षिणी ब्लूफिन टूना (Thunnus maccoyii) संकटग्रस्त से कम संकटग्रस्त में स्थानांतरित। 
      • एल्बाकोर (Thunnus alalunga)  और येलोफिन टूना (Thunnus albacares) दोनों निकट संकटग्रस्त (Near Threatened) से बहुत कम संकट (Least Concern) की सूची में स्थानांतरित। 
      • टूना की अन्य प्रजातियाँ जिसमें बिगआई टूना (Thunnus obesus) सुभेद्य में, जबकि स्किपजैक टूना  (Katsuwonus pelamis)  बहुत कम संकट ( least concerned) में ही बनी हुई है।
      • पैसिफिक ब्लूफिन टूना (Thunnus orientalis)  को न्यूअर  स्टॉक मूल्यांकन डेटा (Newer Stock Assessment Data) और मॉडल (Models) की उपलब्धता के कारण सुभेद्य से निकट संकटग्रस्त (Near Threatened) की श्रेणी में स्थानांतरित किया गया है।
  • सतत् पर्यटन पहल:
    • यह कार्यक्रम जर्मनी द्वारा वित्तपोषित किया गया है तथा इसमें संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) एवं वर्ल्डवाइड फंड फॉर नेचर (WWF) जैसे कार्यकारी भागीदार शामिल हैं।
      • यह विकासशील और उभरते देशों के सतत् विकास में योगदान करने के लिये पर्यटन को एक उपकरण के रूप में उपयोग करेगा।
    • पहल को संचालित करने के लिये IUCN दो विश्व धरोहर स्थलों तथा  पेरू और वियतनाम में पाँच अन्य संरक्षित क्षेत्रों के साथ काम करेगा ताकि समुदाय-आधारित पर्यटन क्षेत्र के भविष्य के व्यवधानों के प्रति लचीलापन बढ़ाया जा सके।
  • अन्य हालिया अद्यतन:
    • रैप्टर प्रजाति से संबंधित खतरा: IUCN और बर्डलाइफ इंटरनेशनल के एक विश्लेषण के अनुसार, वैश्विक स्तर पर 557 रैप्टर प्रजातियों में से लगभग 30% को कुछ स्तर तक विलुप्त होने का खतरा है।
    • बहलर कछुआ संरक्षण पुरस्कार: हाल ही में भारतीय जीवविज्ञानी शैलेंद्र सिंह को तीन गंभीर रूप से लुप्तप्राय (Critically Endangered) कछुए की प्रजातियों को उनके विलुप्त होने की स्थिति से बाहर लाने हेतु बहलर कछुआ संरक्षण पुरस्कार (Behler Turtle Conservation Award) से सम्मानित किया गया है।
      • ‘बहलर कछुआ संरक्षण पुरस्कार’ कछुआ संरक्षण में शामिल कई वैश्विक निकायों जैसे- ‘टर्टल सर्वाइवल एलायंस (TSA), IUCN/SSC कच्छप और मीठे पानी के कछुआ विशेषज्ञ समूह, कछुआ संरक्षण तथा ‘कछुआ संरक्षण कोष’ द्वारा प्रदान किया जाता है।

स्रोत: डाउन टू अर्थ

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