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भारतीय अर्थव्यवस्था

भारत की मज़बूत अर्थव्यवस्था करेगी वैश्विक विकास का नेतृत्व : IMF

  • 09 Aug 2018
  • 5 min read

चर्चा में क्यों?

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, निवेश में वृद्धि और मज़बूत निजी खपत के कारण भारत की आर्थिक वृद्धि दर के वित्त वर्ष 2019-20 में बढ़कर 7.5 प्रतिशत होने का अनुमान है। साथ ही यह भी कहा गया है कि राजकोषीय समेकन की गति में तेज़ी लाने के लिये भारत को बेहतर आर्थिक स्थितियों का उपयोग करना चाहिये।

प्रमुख बिंदु

विकास दर के अनुमान में कोई बदलाव नहीं

  • अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अपनी रिपोर्ट में चालू वित्त वर्ष के दौरान भारत की आर्थिक विकास दर 7.3 फीसद और अगले वित्त वर्ष में विकास की दर 7.5 फीसद के अपने अनुमान को बरक़रार रखा है।

GST एक महत्त्वपूर्ण सुधार

  • अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने वस्तु एवं सेवा कर (GST) को भारत की कर प्रणाली में एक  "महत्वपूर्ण सुधार" की संज्ञा दी है। 
  • IMF ने यह सलाह भी दी है कि GST के ढाँचे को और अधिक सरल बना कर इसमें कर की केवल दो दरों को शामिल करना अधिक लाभदायक होगा।

♦ एक, मानक दर, जिसका स्तर कम हो।
♦ दूसरी दर चुनिंदा वस्तुओं के लिये हो और जो उच्च हो।

  • उल्लेखनीय है कि GST में इस समय चार दरें लागू हैं
  • इससे GST प्रणाली का विकास होगा तथा राजस्व निरपेक्षता भी बनी रहेगी।

NPA प्रमुख समस्या

  • IMF के अनुसार, भारत में NPA की स्थिति काफी चिंताजनक है। 
  • NPA की समस्या को दूर करने के लिये उठाए गए कदमों जैसे- दिवालियापन कानून तथा भारतीय रिज़र्व बैंक के दिशा-निर्देश आदि को सराहनीय कदम बताया गया है।

सरकारी बैंकों के निजीकरण की आवश्यकता 

  • सरकारी बैंकों के प्रशासन की हालत को देखते हुए IMF ने इन बैंकों के निजीकरण की सलाह दी है। हाल ही में भारत के सार्वजनिक बैंकों में हुई धोखाधड़ी को देखते हुए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने यह सलाह दी है।

श्रम सुधार तथा भूमि सुधार की आवश्यकता

  • IMF ने भारत के श्रम बाज़ार पर ध्यान देते हुए कहा है कि देश में तेज़ी से बढ़ते युवाओं को रोज़गार उपलब्ध कराने के लिये पुराने श्रम कानूनों में बदलाव करना आवश्यक है। श्रम सुधारों के साथ ही भूमि सुधार भी आवश्यक है क्योंकि इसके बिना अनौपचारिक व असंगठित क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आर्थिक गतिविधियों कि शुरुआत करना संभव नहीं है। 

भारत के लिये प्रत्यक्ष विदेशी निवेश भी है महत्त्वपूर्ण

  • वैश्विक बाज़ारों के साथ अपने एकीकरण में सुधार से भारत लाभ उठा सकता है।
  • विदेशी प्रत्यक्ष निवेश प्रवाह को बनाए रखने और व्यापार बाधाओं को दूर करने के लिये और अधिक प्रयास किये जा सकते हैं जो कि देश के लिये महत्वपूर्ण हैं। जैसे–

♦ व्यापार दस्तावेज़ संबंधी आवश्यकताओं और प्रक्रियाओं को कम करना।
♦ टैरिफ कम करना।
♦ व्यापार वातावरण में सुधार को जारी रखना।
♦ शासन में सुधार।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष

  • आईएमएफ एक अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्था है जो अपने सदस्य देशों की वैश्विक आर्थिक स्थिति पर नज़र रखने का कार्य करती है।
  • यह अपने सदस्य देशों को आर्थिक एवं तकनीकी सहायता प्रदान करने के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय विनिमय दरों को स्थिर रखने तथा आर्थिक विकास को सुगम बनाने में भी सहायता प्रदान करती है।
  • आईएमएफ का मुख्यालय वाशिंगटन डी.सी. संयुक्त राज्य अमेरिका में है। आईएमएफ की विशेष मुद्रा एसडीआर (Special Drawing Rights) कहलाती है।
  • आईएमएफ का उद्देश्य आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करना, आर्थिक प्रगति को बढ़ावा देना, गरीबी को कम करना, रोज़गार के नए अवसरों का सृजन करने के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को सुविधाजनक बनाना है।
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