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भारतीय राजनीति

भारत ने धन शोधन निवारण अधिनियम में किया बदलाव

  • 11 May 2023
  • 11 min read

प्रिलिम्स के लिये:

धन शोधन रोकथाम अधिनियम, वित्तीय कार्रवाई कार्य बल

मेन्स के लिये:

धन शोधन से निपटने के लिये भारत में कानूनी और नियामक ढाँचा, धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) और इसके उद्देश्य, अर्थव्यवस्था पर धन शोधन का प्रभाव।

चर्चा में क्यों?  

भारत ने वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (Financial Action Task Force- FATF) के तहत वर्ष 2023 में प्रस्तावित आकलन से पहले खामियों को दूर करने के लिये विभिन्न परिवर्तनों के हिस्से के रूप में धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के अंतर्गत आने वाले धन शोधन कानून में बदलाव किये हैं। 

PMLA के तहत बदलाव: 

  • वित्तीय संस्थानों, बैंकिंग कंपनियों अथवा मध्यस्थों जैसी रिपोर्टिंग संस्थाओं द्वारा गैर-सरकारी संगठनों का अधिक प्रकटीकरण।
  • "राजनीतिक रूप से सक्रिय व्यक्तियों" को ऐसे व्यक्तियों के रूप में परिभाषित करना, जिन्हें किसी विदेशी राष्ट्र द्वारा प्रमुख सार्वजनिक कार्य सौंपा गया हैं, बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिये नो योर कस्टमर (Know Your Customer- KYC) मानदंडों और एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग के लिये भारतीय रिज़र्व बैंक के वर्ष 2008 के परिपत्र के साथ एकरूपता लाना।
  • अपने ग्राहकों की ओर से वित्तीय लेन-देन करने वाले चार्टर्ड एकाउंटेंट्स, कंपनी सचिवों और लागत तथा कार्य लेखाकारों को पेश करने के कार्य को धन शोधन कानून के दायरे में लाना
    • वित्तीय लेन-देन में निम्नलिखित शामिल हैं: 
      • किसी अचल संपत्ति का क्रय-विक्रय।
      • ग्राहक के पैसे, प्रतिभूतियों अथवा अन्य संपत्तियों का प्रबंधन करना।
      • बैंक, बचत या प्रतिभूति खातों का प्रबंधन।
      • कंपनियों के निर्माण, संचालन अथवा प्रबंधन के लिये योगदान संबंधी संगठन।
      • कंपनियों का निर्माण, संचालन या प्रबंधन, सीमित देयता भागीदारी या ट्रस्ट।
      • व्यापारिक संस्थाओं की खरीद और बिक्री।
  • सरकार ने धन शोधन निवारण अधिनियम के लिये गैर-बैंकिंग रिपोर्टिंग संस्थाओं की सूची बनाई है। जो आधार के माध्यम से अपने ग्राहकों की पहचान को सत्यापित करेंगी, जिसमें अमेज़ॅन पे (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड, आदित्य बिरला हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड और IIFL फाइनेंस लिमिटेड जैसी 22 वित्तीय संस्थाएँ शामिल हैं। 

परिवर्तन से संबंधित मामले:

  • परिवर्तन में रिपोर्टिंग संस्थाओं को सभी लेन-देन के रिकॉर्ड बनाए रखने और प्रत्येक निर्दिष्ट लेन-देन से पहले KYC कराने की आवश्यकता होती है। अनुपालन में विफल रहने पर दंड एवं जाँच एजेंसियों द्वारा कार्रवाई की जा सकती है।
  • PMLA के अधीन न्यूनतम दोषसिद्धि दर, लेकिन एक अत्यंत कठिन प्रक्रिया से गुज़रना
  • PMLA के अंतर्गत आने वाली संस्थाओं की नई परिभाषा में वकीलों और वैधानिक पेशेवरों को बाहर करने की कुछ पेशेवरों द्वारा आलोचना की गई है।
  • कुछ लोगों का यह भी तर्क है कि इन नए निगमित पेशेवरों को पूर्व से ही संसद के विभिन्न अधिनियमों के तहत गठित पेशेवर निकायों द्वारा विनियमित किया जाता है, जिससे ये उपाय अनावश्यक हो जाते हैं।

PMLA, 2002: 

  • पृष्ठभूमि:
  • परिचय: 
    • यह एक आपराधिक कानून है जो धन शोधन/मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने और मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित मामलों से प्राप्त या इसमें शामिल संपत्ति की ज़ब्ती का प्रावधान करने के लिये बनाया गया है।
    • यह मनी लॉन्ड्रिंग (काले धन को वैध बनाना) से निपटने के लिये भारत द्वारा स्थापित कानूनी ढाँचे का मूल है।
    • इस अधिनियम के प्रावधान सभी वित्तीय संस्थानों, बैंकों (RBI सहित), म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियों और उनके वित्तीय मध्यस्थों पर लागू होते हैं।
  • उद्देश्य: 
    • आपराधिक गतिविधियों के माध्यम से शोधित, उत्पन्न या अर्जित किये गए अपराध की आय को ज़ब्त और अधिग्रहण करना।
    • मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी वित्तपोषण की रोकथाम के लिये एक कानूनी ढाँचा स्थापित करना।
    • मनी लॉन्ड्रिंग अपराधों की जाँच और अभियोजन के लिये तंत्र को सुदृढ़ और बेहतर बनाना।
    • मनी लॉन्ड्रिंग और संबंधित अपराधों के विरुद्ध लड़ाई में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना।
  • नियामक प्राधिकरण:
    • प्रवर्तन निदेशालय (ED): प्रवर्तन निदेशालय PMLA के प्रावधानों को लागू करने और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों की जाँच करने के लिये ज़िम्मेदार है। 

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF):

  • परिचय: 
    • FATF वर्ष 1989 में स्थापित एक अंतर-सरकारी संगठन है।
    • यह अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली की अखंडता के लिये मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवादी वित्तपोषण और अन्य संबंधित खतरों का मुकाबला करने हेतु एक वैश्विक मानक निर्धारक है। 
    • FATF एक नीति-निर्माण निकाय के रूप में कार्य करता है जो वित्तीय अपराधों से निपटने के लिये कानूनी, विनियामक और परिचालन उपायों के कार्यान्वयन को बढ़ावा देता है।
  • उद्देश्य: 
    • FATF का प्राथमिक उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय मानकों को स्थापित करना और मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवादी वित्तपोषण तथा सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार से निपटने के उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन को बढ़ावा देना है।
  • गठन: 
    • मनी लॉन्ड्रिंग और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव के बारे में बढ़ती चिंताओं के जवाब में G7 देशों की पहल पर FATF का गठन किया गया था। 
    • इसने शुरुआत में मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने के लिये सिफारिशों और सर्वोत्तम प्रथाओं को विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया।
      • वर्षों से आतंकवादी वित्तपोषण का मुकाबला करने और नए उभरते खतरों को संबोधित करने के लिये इसके जनादेश का विस्तार हुआ।
  • ग्रे लिस्ट और ब्लैक लिस्ट: 
    • FATF की दो प्रमुख सूचियाँ हैं: "ग्रे लिस्ट" और "ब्लैक लिस्ट"।
    • ग्रे लिस्ट में ऐसे क्षेत्राधिकार शामिल हैं जिनके धन शोधन रोधी एवं आतंकवाद रोधी वित्तपोषण ढाँचे में रणनीतिक कमियाँ हैं।
      • ग्रे लिस्ट में रखा जाना सुधार की आवश्यकता को दर्शाता है, साथ ही यह FATF द्वारा निगरानी बढ़ाने के अधिकार क्षेत्र को विषय बनाता है।
    • ब्लैक लिस्ट, जिसे आधिकारिक तौर पर "कार्रवाई हेतु आह्वान (Call for Action)" के रूप में जाना जाता है, में ऐसे देश शामिल हैं जिनके धन शोधन और आतंकवाद रोधी वित्तपोषण प्रयासों में गंभीर कमियाँ हैं।
      • ब्लैक लिस्ट में शामिल करने से अंतर्राष्ट्रीय रोक एवं प्रतिबंध लग सकते हैं।
  • सदस्य देश: 
    • वर्तमान में FATF के 39 सदस्य हैं: 37 क्षेत्राधिकार और 2 क्षेत्रीय संगठन (खाड़ी सहयोग परिषद एवं यूरोपीय आयोग)।
    • वित्तीय अपराधों से निपटने में वैश्विक सहयोग को मज़बूत करने हेतु FATF संयुक्त राष्ट्र जैसे अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर काम करता है।
  • भारत और FATF: 
    • भारत वर्ष 2010 में FATF का सदस्य बना था।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रश्न. चर्चा कीजिये कि किस प्रकार उभरती प्रौद्योगिकियाँ और वैश्वीकरण मनी लॉन्ड्रिंग में योगदान करते हैं। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर मनी लॉन्ड्रिंग की समस्या से निपटने के लिये किये जाने वाले उपायों को विस्तार से समझाइये। (मुख्य परीक्षा, 2021)

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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