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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

भारत-जर्मनी संबंध

  • 06 Dec 2022
  • 11 min read

प्रिलिम्स के लिये:

भारत-जर्मनी संबंध, ऑयल प्राइस कैप, यूरोपीय संघ

मेन्स के लिये:

भारत-जर्मनी संबंध, भारत और जर्मनी के बीच सहयोग के क्षेत्र

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारत के विदेशमंत्री ने नई दिल्ली में जर्मनी के विदेश मंत्री से मुलाकात की। 

  • जर्मनी के विदेश मंत्री की यात्रा G-7 और यूरोपीय संघ (European Union- EU) के देशों द्वारा रूस से 60 डॉलर प्रति बैरल की कीमत सेअधिक मूल्य पर तेल खरीदने वाले देशों से शिपिंग एवं बीमा सेवाओं को वापस लेने के लिये "ऑयल प्राइस कैप" यानी तेल की कीमतों की सीमा निर्धारित करने संबंधी योजना की शुरुआत के साथ हुई।

Germany

दोनों देशों के बीच वार्ता के प्रमुख बिंदु:

  • भारत और जर्मनी ने व्यापक प्रवासन और गतिशीलता साझेदारी पर एक समझौते पर हस्ताक्षर किये। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों में लोगों के लिये अनुसंधान, अध्ययन और काम के लिये यात्रा को आसान बनाना है।
    • यह समझौते दोनों देशों के बीच सबंधों के संदर्भ में "अधिक समकालीन साझेदारी का आधार" होगा।
  • दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत की, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा तथा ऊर्जा संक्रमण पर भारत को जर्मनी की सहायता के साथ-साथ दोनों देशों की हिंद-प्रशांत रणनीति जैसे अंतर्राष्ट्रीय मुद्दे शामिल थे इसके अलावा चीन, अफगानिस्तान और पाकिस्तान पर वार्ता हुई।

G-7 और तेल मूल्य सीमा

  • परिचय:
    • यह यूरोपीय संघ की G-7 और ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर रूस से कच्चे तेल की खेप/शिपमेंट की कीमत सीमा तय करने की योजना है, जो अभी के लिये 60 अमेरिकी डाॅलर प्रति बैरल आंकी गई है।
    • इस मूल्य सीमा का मुख्य उद्देश्य हस्ताक्षरकर्त्ता देशों में कंपनियों को रूसी कच्चे तेल के कार्गो जहाज़ों को शिपिंग, बीमा, मध्यस्थता और अन्य संबद्ध सेवाओं को विस्तारित करने से प्रतिबंधित करना है जहाँ कच्चा तेल पूर्व निर्धारित प्रति बैरल 60 अमेरिकी डॉलर से अधिक किसी भी मूल्य पर बेचा गया हो।
      • चूँकि यह 5 दिसंबर, 2022 को प्रभावी हुआ था, इसलिये यह सीमा केवल उन शिपमेंट पर लागू होगी जो प्रभावी होनेके बाद जहाज़ों पर "लोड" हुए हैं और पारगमन में शिपमेंट पर लागू नहीं होगा।
  • भारत का पक्ष:
    • यूक्रेन पर आक्रमण के बाद रूस पर संयुक्त राज्य अमेरिका के नेतृत्व वाले प्रतिबंधों के बावजूद, भारत ने न केवल जारी रखने का फैसला किया है, बल्कि "निकट भविष्य" में रूस के साथ अपने व्यापार को भी दोगुना कर दिया है।
      • यूक्रेन में युद्ध के बाद से रूसी तेल की खपत बढ़ाने के सरकार के फैसले के बचाव में यह ध्यान दिया जाना चाहिये कि भारत की रूसी तेल की खपत यूरोपीय खपत का केवल छठा हिस्सा थी। इसकी तुलना प्रतिकूल रूप से नहीं की जानी चाहिये।

भारत-जर्मनी संबंध

  • भारत-जर्मनी संबंध:
    • भारत और जर्मनी के बीच के द्विपक्षीय संबंध साझा लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर आधारित हैं। भारत द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जर्मनी संघीय गणराज्य के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने वाले पहले देशों में से एक था।
      • जर्मनी, भारत को विकास परियोजनाओं में प्रति वर्ष 3 बिलियन यूरो का सहयोग देता है, जिसमें से 90% जलवायु परिवर्तन से मुकाबले और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के साथ-साथ स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य में काम आता है।
        • जर्मनी महाराष्ट्र में 125 मेगावाट क्षमता के एक विशाल सौर संयंत्र के निर्माण में भी सहयोग कर रहा है, जो 155,000 टन वार्षिक CO2 उत्सर्जन की बचत करेगा।
      • दिसंबर 2021 में जर्मनी के नए चांसलर की नियुक्ति के बाद भारत और जर्मनी ने सहमति व्यक्त की है कि दुनिया के प्रमुख लोकतांत्रिक देशों तथा रणनीतिक भागीदारों के रूप में दोनों देश साझा चुनौतियों से निपटने के लिये आपसी सहयोग की वृद्धि करेंगे, जहाँ जलवायु परिवर्तन उनके एजेंडे में शीर्ष विषय के रूप में शामिल होगा।
  • आर्थिक सहयोग की चुनौती:
    • वर्तमान में दोनों देशों के बीच एक पृथक द्विपक्षीय निवेश संधि का अभाव है। जर्मनी का भारत के साथ यूरोपीय संघ के माध्यम से द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश समझौता (Bilateral Trade and Investment Agreement- BTIA) कार्यान्वित है जहाँ उसके पास अलग से वार्ता कर सकने का अवसर नहीं है।
      • इसके अलावा जर्मनी विशेष रूप से भारत के व्यापार उदारीकरण उपायों को लेकर संदेह रखता है और अधिक उदार श्रम नियमों की अपेक्षा रखता है।
  • हिंद-प्रशांत क्षेत्र का महत्त्व:
    • हिंद-प्रशांत (जिसका केंद्र बिंदु भारत है) जर्मनी और यूरोपीय संघ की विदेश नीति में अधिकाधिक महत्त्वपूर्ण होता जा रहा है।
      • हिंद-प्रशांत क्षेत्र में वैश्विक आबादी के लगभग 65% का निवास है और विश्व के 33 मेगासिटीज़ में से 20 इसी क्षेत्र में हैं।
      • यह क्षेत्र वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में 62% और वैश्विक पण्य व्यापार में 46% की हिस्सेदारी रखता है।
      • यह क्षेत्र कुल वैश्विक कार्बन उत्सर्जन के आधे से अधिक भाग का उद्गम क्षेत्र भी है जो इस क्षेत्र के देशों को स्वाभाविक रूप से जलवायु परिवर्तन और संवहनीय ऊर्जा उत्पादन एवं उपभोग जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में प्रमुख भागीदार बनाता है।
  • जर्मनी और हिंद-प्रशांत:
    • जर्मनी नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को सशक्त करने में अपने योगदान के लिये प्रतिबद्ध है।
      • जर्मनी के हिंद-प्रशांत दिशा-निर्देशों के अंतर्गत संलग्नता की वृद्धि और उद्देश्यों की पूर्ति के लिये भारत का उल्लेख किया गया है। अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित विषयों पर चर्चा में भारत अब एक महत्त्वपूर्ण संधि या नोड बन सकता है।
      • चूँकि भारत एक समुद्री महाशक्ति है और मुक्त एवं समावेशी व्यापार का मुखर समर्थक है, वह इस मिशन में जर्मनी (अंततः यूरोपीय संघ) का एक प्राथमिक भागीदार है।

आगे की राह

  • भारत-जर्मनी संबंधों को मज़बूत करना:
    • जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा और अंतर्राष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा सहित विभिन्न वैश्विक मुद्दों के समाधान के लिये जर्मनी, भारत को एक महत्त्वपूर्ण भागीदार के रूप में देखता है।
      • इसके साथ ही जर्मनी में सत्ता में आई नई गठबंधन सरकार भारत के लिये दोनों देशों के बीच की रणनीतिक साझेदारी को मज़बूत करने का अवसर प्रदान कर रही है।
      • जर्मनी चीन का मुकाबला करने के लिये यूरोपीय संघ के माध्यम से कनेक्टिविटी परियोजनाओं को लागू करने का इच्छुक है। यह गठबंधन ‘भारत-यूरोपीय संघ BTIA’ के संपन्न होने की इच्छा रखता है और इसे संबंधों के विकास के लिये एक महत्त्वपूर्ण पहलू के रूप में देखता है।
  • आर्थिक सहयोग का दायरा:
    • भारत और जर्मनी को बौद्धिक संपदा दिशा-निर्देशों के सहकारी लक्ष्यों को साकार करना चाहिये और व्यवसायों को भी संलग्न करना चाहिये।
      • जर्मन कंपनियों को भारत में विनिर्माण केंद्र स्थापित करने के लिये उदारीकृत उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन योजना का लाभ उठाने के लिये प्रोत्साहित किया जाना चाहिये।
      • जर्मनी ने एक वैक्सीन उत्पादन प्रतिष्ठान के लिये अफ्रीका को 250 मिलियन यूरो का ऋण देने की प्रतिबद्धता जताई है। भारत के सहयोग से सुविधाहीन पूर्वी अफ्रीकी क्षेत्र में ऐसा प्रतिष्ठान स्थापित किया जा सकता है।
  • हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उत्तरदायित्त्वों की साझेदारी:
    • भारत की ही तरह जर्मनी भी एक व्यापारिक राष्ट्र है। जर्मन व्यापार का 20% से अधिक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संपन्न होता है।
      • यही कारण है कि जर्मनी और भारत विश्व के इस हिस्से में स्थिरता, समृद्धि और स्वतंत्रता को बनाए रखने तथा उसका समर्थन करने का उत्तरदायित्व साझा करते हैं। एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत के समर्थन में भारत और यूरोप दोनों के महत्त्वपूर्ण हित निहित हैं।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रश्न. व्यापक-आधारयुक्त व्यापार और निवेश करार (Broad-based Trade and Investment Agreement- BTIA)’ कभी-कभी समाचारों में भारत और निम्नलिखित में से किस एक के बीच बातचीत के संदर्भ में दिखाई पड़ता है? (2017)

(a) यूरोपीय संघ
(b) खाड़ी सहयोग परिषद्
(c) आर्थिक सहयोग और विकास संगठन
(d) शंघाई सहयोग संगठन

उत्तर: (a)

स्रोत: द हिंदू

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