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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

वित्तीय कार्रवाई कार्य बल

  • 27 Jun 2020
  • 4 min read

प्रीलिम्स के लिये 

वित्तीय कार्रवाई कार्य बल

मेन्स के लिये 

कार्य व इसका महत्त्व 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (Financial Action Task Force-FATF) की पूर्ण बैठक चीन की अध्यक्षता में आयोजित की गई।

प्रमुख बिंदु 

  • इससे पूर्व FATF के तत्त्वावधान में धन शोधन और आतंकी वित्तपोषण पर गठित यूरेशियन समूह (Eurasian Group on Combating Money Laundering and Financing of Terrorism-EAG) के 32वें पूर्ण अधिवेशन का भी आयोजन किया गया था।
  • इस अधिवेशन में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (National Investigation Agency-NIA) और प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) के अधिकारियों ने आतंकी वित्त-पोषण के रोकथाम हेतु एक विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया।
  • वित्तीय कार्रवाई कार्य बल अवैध वित्तपोषण की रोकथाम के संभावित उपायों पर वैश्विक महामारी के प्रभाव की निगरानी कर रहा है।
  • FATF ने  COVID-19 से संबंधित अपराधों में वृद्धि देखी, जिनमें धोखाधड़ी, साइबर-अपराध, सरकारी धन या अंतर्राष्ट्रीय वित्त सहायता का दुरुपयोग आदि शामिल है। 

वित्तीय कार्रवाई कार्य बल

  • FATF की स्थापना वर्ष 1989 में एक अंतर-सरकारी निकाय के रूप में हुई थी।
  • FATF का उद्देश्य मनी लॉड्रिंग, आतंकवादी वित्तपोषण जैसे खतरों से निपटना और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली की अखंडता के लिये अन्य कानूनी, विनियामक और परिचालन उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन को बढ़ावा देना है।
  • FATF की सिफारिशों को वर्ष 1990 में पहली बार लागू किया गया था। उसके बाद 1996, 2001, 2003 और 2012 में FATF की सिफारिशों को संशोधित किया गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे प्रासंगिक और अद्यतन रहें, तथा उनका उद्देश्य सार्वभौमिक बना रहे।
  • किसी भी देश का FATF की ‘ग्रे’ लिस्ट में शामिल होने का अर्थ होता है कि वह देश आतंकवादी फंडिंग और मनी लॉड्रिंग पर अंकुश लगाने में विफल रहा है।
  • किसी भी देश का FATF की ‘ब्लैक’ लिस्ट में शामिल होने का अर्थ होता है कि उस देश को अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं द्वारा वित्तीय सहायता मिलनी बंद हो जाएगी।
  • वर्तमान में FATF में भारत समेत 37  सदस्य देश और 2 क्षेत्रीय संगठन शामिल हैं। भारत FATF का 2010 से सदस्य है।
  • लश्कर-ए- तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के वित्त के स्रोत को बंद करने में विफल रहने के कारण पाकिस्तान पूर्व की भांति FATF की ‘ग्रे लिस्ट’ में बना हुआ है। पाकिस्तान को पहले आतंकी फंडिंग नेटवर्क और मनी लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट्स के खिलाफ 27-पॉइंट एक्शन प्लान का अनुपालन सुनिश्चित करने या "ब्लैक लिस्टिंग" का सामना करने के लिये जून 2020 तक की समय सीमा दी गई थी।
  • हालाँकि वैश्विक महामारी COVID-19 के कारण यह समयसीमा बढ़ाकर अक्तूबर, 2020 कर दी है।

स्रोत: द हिंदू

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