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‘हार्ट अटैक रिवाइंड’

  • 01 Dec 2018
  • 6 min read

चर्चा में क्यों?


भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (Food Safety and Standards Authority of India- FSSAI) ने औद्योगिक रूप से उत्पन्न ट्रांसफैट (Trans Fats) के दुष्प्रभावों के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिये मीडिया अभियान ‘हार्ट अटैक रिवाइंड’ (Heart Attack Rewind) की शुरुआत की है।


अभियान के बारे में

  • ‘हार्ट अटैक रिवाइंड’ (Heart Attack Rewind) नामक अभियान अपनी तरह का पहला मीडिया अभियान वास्तव में 30 सेकंड की एक सार्वजनिक सेवा घोषणा (Public Service Announcement- PSA) है।
  • FSSAI के अनुसार, यह अभियान विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization- WHO) द्वारा ट्रांस फैट के पूर्णरूप से उन्मूलन के लिये निर्धारित वर्ष से एक वर्ष पहले अर्थात् 2022 तक भारत में ट्रांस फैट को खत्म करने के FSSAI के वैश्विक लक्ष्य का समर्थन करेगा।
  • ‘हार्ट अटैक रिवाइंड’ को यूट्यूब, फेसबुक, हॉटस्टार और वूट जैसे प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म पर चार सप्ताह की अवधि के लिये 17 भाषाओं में प्रसारित किया जाएगा।
  • इसके अतिरिक्त, अभियान को रेडियो चैनलों पर प्रसारित किया जाएगा तथा दिल्ली/NCR की आउटडोर होर्डिंग पर भी प्रदर्शित किया जाएगा।
  • ‘हार्ट अटैक रिवाइंड’ नागरिकों को ट्रांस फैट के सेवन से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी खतरों के बारे में चेतावनी देता है और स्वस्थ विकल्पों के माध्यम से उनसे बचने के तरीके प्रस्तुत करता है।
  • FSSAI की योजना भारत की खाद्य आपूर्ति में ट्रांस फैट के स्तर को <5 प्रतिशत से <2 प्रतिशत तक करना है।

FSSAI के बारे में

  • भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की स्थापना खाद्य संरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के अधीन की गई है जो उन विभिन्न अधिनियमों एवं आदेशों को समेकित करता है जिसने अब तक विभिन्न मंत्रालयों तथा विभागों में खाद्य संबंधी विषयों का निपटान किया है।
  • FSSAI की स्थापना खाद्य वस्तुओं के लिये विज्ञान आधारित मानकों का निर्धारण करने और मानव उपभोग के लिये सुरक्षित और पौष्टिक आहार की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु उनके विनिर्माण, भंडारण, वितरण, बिक्री तथा आयात को विनियमित करने के लिये की गई है।
  • FSSAI के कार्यान्वयन के लिये स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय प्रशासनिक मंत्रालय है।

ट्रांस फैट के बारे में

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  • तरल वनस्पति तेलों को अधिक ठोस रूप में परिवर्तित करने तथा खाद्य के भंडारण एवं उपयोग अवधि (shelf Life) में वृद्धि करने के लिये इन तेलों का हाइड्रोजनीकरण किया जाता है, इस प्रकार संतृप्त वसा या ट्रांस फैट का निर्माण होता है।
  • ट्रांस फैट बड़े पैमाने पर वनस्पति, नकली या कृत्रिम मक्खन (margarine), विभिन्न बेकरी उत्पादों में मौजूद होते हैं तथा ये तले हुए या पके हुए खाद्य पदार्थों में भी पाए जा सकते हैं।
  • FSSAI 2022 तक चरणबद्ध तरीके से औद्योगिक रूप से उत्पादित ट्रांस फैटी एसिड को 2% से कम करने के लिये प्रतिबद्ध है।
  • वैश्विक स्तर पर ट्रांस फैट के सेवन से हर साल 500,000 से अधिक लोगों की मौत ह्रदय संबंधी बीमारियों (Cardiovascular Disease) के कारण होती है।

ट्रांस फैट के उन्मूलन के लिये WHO की योजना

  • मई 2018 में WHO ने 2023 तक वैश्विक खाद्य आपूर्ति से औद्योगिक रूप से उत्पादित ट्रांस फैट को खत्म करने के लिये एक व्यापक योजना REPLACE की शुरुआत की थी।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा तय पैमानों के अनुसार, Total Energy Intake में ट्रांस फैट्स की मात्रा 1 फीसदी से भी कम होनी चाहिये।
  • REPLACE खाद्य आपूर्ति से औद्योगिक रूप से उत्पादित ट्रांस फैट के त्वरित, पूर्ण और दीर्घकालीन उन्मूलन को सुनिश्चित करने के लिये छह रणनीतिक कार्रवाइयों का प्रावधान करता है:
  1. RE- (Review) : औद्योगिक रूप से उत्पादित ट्रांस वसा के आहार स्रोतों और आवश्यक नीति परिवर्तन हेतु परिदृश्य की समीक्षा।
  2. P- (Promote) : स्वस्थ वसा और तेलों के माध्यम से औद्योगिक रूप से उत्पादित ट्रांस फैट के प्रतिस्थापन को बढ़ावा देना।
  3. L- (Legislate) : औद्योगिक तौर पर उत्पादित ट्रांसफैट को खत्म करने के लिये कानून या विनियामक कार्यवाही को लागू करना।
  4. A- (Assess) : खाद्य आपूर्ति में ट्रांस फैट सामग्री तथा लोगों द्वारा ट्रांस फैट के उपभोग का आकलन और निगरानी करना।
  5. C- (Create) : नीति निर्माताओं, उत्पादकों, आपूर्तिकर्त्ताओं और जनता के बीच ट्रांस फैट के नकारात्मक स्वास्थ्य प्रभाव के बारे में जागरूकता पैदा करना।
  6. E- (Enforce) : नीतियों और विनियमों के अनुपालन को लागू करना।

स्रोत : द हिंदू (बिज़नेस लाइन), FSSAI एवं WHO वेबसाइट

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