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कृषि

गुजरात कृषि उपज बाज़ार (संशोधन) अध्यादेश, 2020

  • 12 May 2020
  • 7 min read

प्रीलिम्स के लिये

गुजरात कृषि उपज बाज़ार (संशोधन) अध्यादेश, 2020

मेन्स के लिये

किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य चुनौतियाँ और प्रयास

चर्चा में क्यों?

गुजरात में राज्य-संचालित कृषि उपज बाज़ार समितियों (Agricultural Produce Market Committees-APMCs) के ‘एकाधिकार’ को समाप्त करते हुए राज्य सरकार ने गुजरात कृषि उपज बाज़ार (संशोधन) अध्यादेश, 2020 को मंज़ूरी दे दी है।

प्रमुख बिंदु

  • ध्यातव्य है कि इस अध्यादेश के माध्यम से निजी संस्थाओं को अपनी बाज़ार समितियाँ स्थापित करने की अनुमति प्राप्त होगी, जो किसानों को उनकी उपज के लिये सर्वोत्तम संभव पारिश्रमिक पेश कर सकेंगी।
  • गुजरात सरकार का यह अध्यादेश बाज़ार समितियों के अधिकार क्षेत्र को उनकी भौतिक सीमाओं तक सीमित करता है।
  • अब तक एक विशेष तालुका के किसानों को अपनी उपज को अपने संबंधित APMCs को ही बेचना पड़ता था। यहाँ तक ​​कि व्यापारी भी अपने स्वयं के तालुकों तक ही सीमित थे। APMCs द्वारा अपने क्षेत्राधिकार और उससे बाहर होने वाले सभी लेन-देन पर उपकर लगाया जाता था
  • गत वित्तीय वर्ष में गुजरात के 24 APMCs ने मिलकर 35,000 करोड़ रुपए का लेनदेन किया और लेनदेन पर उपकर (0.5 प्रतिशत लेनदेन) के रूप में 350 करोड़ रुपए कमाए थे।
    • विश्लेषण के अनुसार, उपकर के माध्यम से अर्जित किया गया अधिकांश लाभ ऐसे लेन-देनों से प्राप्त हुआ था, जो APMCs की भौतिक सीमा से बाहर किये गए थे।
  • नए नियमों के अनुसार, अब APMCs केवल उन लेन-देनों पर उपकर लगा सकती हैं जो उनकी सीमाओं के भीतर होते हैं।
  • नियमों के अनुसार, किसी भी निजी संस्था के स्वामित्त्व वाले कोल्ड स्टोरेज या गोदाम को निजी बाज़ार में परिवर्तित किया जा सकता है, जो कि मौजूदा APMCs के साथ प्रतिस्पर्द्धा कर सकते हैं और किसानों को सर्वोत्तम मूल्य प्रदान कर सकते हैं।
  • इस अध्यादेश के तहत व्यापारियों को एक ‘एकीकृत एकल व्यापार लाइसेंस’ (Unified Single Trading Licence) भी प्रदान करने की व्यवस्था की गई है, जिसके माध्यम से वे राज्य में कहीं भी व्यापारिक गतिविधियों में भाग ले सकते हैं।

महत्त्व

  • उल्लेखनीय है कि कई किसान निकायों ने राज्य के इस निर्णय का स्वागत किया है, क्योंकि इससे किसानों को उनकी उपज की गुणवत्ता के आधार पर उचित मूल्य प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।
  • अध्यादेश के माध्यम से जो आमूलचूल परिवर्तन किये गए हैं, वे न केवल APMCs को अधिक प्रतिस्पर्द्धी बनाएंगे, बल्कि राज्य संचालित APMCs के एकाधिकार को समाप्त करके एक बड़ा परिवर्तन लाएंगे।
  • अब किसानों को केवल एक विशेष APMCs को अपना माल बेचने के लिये बाध्य नहीं होना पड़ेगा, जिससे किसानों को अपनी उपज का सही मूल्य प्राप्त हो सकेगा।
  • यह अध्यादेश राज्य में APMCs के एकाधिकार को समाप्त कर देगा जो एक संघ बनाकर यह तय करते थे कि किसानों को उपज की क्या कीमतें प्रदान की जाए।

कृषि उपज बाज़ार समिति 

(Agricultural Produce Market Committees-APMCs)

  • कृषि उपज बाज़ार समिति (Agricultural Produce Market Committees-APMCs) एक राज्य सरकार द्वारा गठित एक वैधानिक बाज़ार समिति होती है, जिसे कुछ अधिसूचित कृषि, बागवानी अथवा पशुधन उत्पादों में व्यापार के संबंध में गठित किया जाता है।
  • उल्लेखनीय है कि भारतीय संविधान के तहत कृषि विपणन राज्य सूची का विषय है। इसीलिये कृषि बाज़ार अधिकांशतः राज्य APMC अधिनियमों के तहत स्थापित और विनियमित किये जाते हैं। इसीलिये कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने-अपने कानून अधिनियमित किये हुए हैं।
  • APMCs के प्रमुख कार्य
    • मूल्य निर्धारण प्रणाली और बाज़ार क्षेत्र में होने वाले लेन-देन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना;
    • यह सुनिश्चित करना कि किसानों को उनकी उपज का भुगतान उसी दिन प्राप्त हो;
    • कृषि प्रसंस्करण को बढ़ावा देना;
    • बिक्री के लिये बाज़ार क्षेत्र में लाए गए कृषि उपज और उनकी दरों पर से संबंधित आँकड़ों को सार्वजनिक करना; 
    • कृषि बाजारों के प्रबंधन में सार्वजनिक निजी भागीदारी को बढ़ावा देना।

आगे की राह

  • उल्लेखनीय है कि छोटे APMCs को अनुचित प्रतिस्पर्द्धा से बचाना इस संबंध में एक बड़ा मुद्दा, जिससे इस अध्यादेश में संबोधित नहीं किया गया है, हालाँकि सरकार आगामी दिनों में एक ऐसा नियम लाने की योजना बना रही है जो मौजूदा APMCs के पाँच किलोमीटर के दायरे में एक निजी बाज़ार की स्थापना की अनुमति नहीं देगा।
  • राज्य सरकार का यह निर्णय एक परिवर्तनकारी कदम है, हालाँकि इससे राज्य के APMCs के राजस्व पर काफी प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि APMCs अपने राजस्व का एक विशिष्ट हिस्सा उनकी भौतिक सीमा से बाहर होने वाले लेनदेनों पर उपकर लगाकर प्राप्त करती हैं।
  • आवश्यक है कि इस निर्णय को पूर्ण रूप से लागू करने से पूर्व राज्य संचालित APMCs को विश्वास में लिया जाए और उनके विभिन्न मुद्दों को हल किया जाए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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