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प्रौद्योगिकी

बढ़ते हवाई यातायात के बीच विमानन क्षेत्र को मज़बूत करने के उपाय

  • 31 May 2018
  • 7 min read

संदर्भ

  • नवीनतम आकड़ों के अनुसार विमानन क्षेत्र में घरेलू यात्री दबाव पहली बार 90 प्रतिशत से अधिक हो गया है। एयरबस ने घरेलू यात्रियों के अगले 20 वर्षों में छः गुना बढ़ने का अनुमान लगाया है।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • 2016 में सरकार ने उन क्षेत्रों जहाँ अभी तक विमान सेवा नहीं शुरू नहीं हुई है, को जोड़ने के लिये राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति और उड़ान (UDAN) (उड़े देश का आम नागिक) की रूपरेखा तैयार की।
  • 1990 के दशक के आरंभ से नियामकीय सुगमता और बढ़ती आय के स्तर ने भारत को दुनिया में नंबर 3 घरेलू नागरिक विमानन बाज़ार बनने में मदद की।
  • किंतु यहाँ आश्चर्यजनक परिप्रेक्ष्य भी परिलक्षित होते हैं जैसे- देश की आबादी का 95 प्रतिशत या 100 करोड़ से अधिक लोग अभी भी हवाई सफर नहीं कर पाए हैं।
  • अब तीब्र गति से हो रहे विकास ने कई एयर पॉकेट के बनने का कारण उत्पन्न किया है और पाँच सहूलियतें भविष्य के लिये उड़ान मार्ग को सुगम बनाने हेतु अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो गई हैं|

1. लूमिंग क्षमता की कमी का समाधान करना 

  • कई प्रमुख हवाई अड्डे संतृप्ति (saturation) स्तर के आस-पास परिचालित हो रहे हैं। इसलिये इनकी क्षमता को युद्धस्तर पर आगे बढ़ाने की ज़रूरत है।
  • अनुमान है कि अगले 15-20 वर्षों में इस क्षेत्र में 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश की आवश्यकता होगी।
  • भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) ने इस वर्ष से शुरू होने वाले पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) के लिये 1,500 करोड़ रुपए की सावधि ऋण की मांग की है जो  आवश्यकताओं के अनुरूप कम प्रतीत होता है।
  • इस संदर्भ में सार्वजनिक निजी साझेदारी (पीपीपी) की तरफ बढ़ना ज़रूरी है, इससे हवाई अड्डे के बुनियादी ढाँचे के विकास में गति आएगी और तेज़ी से सुविधाएँ बेहतर होंगी।

2. क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को पोषित करना 

  • यद्यपि उड़ान योजना ने कुछ हवाई मार्गों को परिचालित कराया है फिर भी कई अन्य ऐसे मार्ग हैं जहाँ सेवाएँ अभी तक शुरू नहीं हुई हैं।
  • यह सुनिश्चित करना महत्त्वपूर्ण है कि बोली प्रक्रिया के बाद के परिणामों की पर्याप्त निगरानी हो।
  • असुरक्षित हवाई अड्डों, विशेष रूप से उच्च मांग वाले मार्गों में निवेश को प्राथमिकता देना भी महत्त्वपूर्ण है।
  • समुद्री विमान (Seaplane) सेवाओं की शुरुआत करना निश्चित रूप से एक अनूठा विचार है इससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को आगे बढ़ाने की उम्मीद की जा सकती है।
  • हालाँकि समुद्री विमान शुरू करने के लिये समर्पित पायलट प्रशिक्षण सुविधाओं की आवश्यकता है।
  • साइट लैंडिंग स्थानों पर सावधानी अत्यंत महत्त्वपूर्ण है क्योंकि समुद्री विमानों को सभी प्रकार के जल निकायों से संचालित नहीं किया जा सकता है।

3. विवेकपूर्ण ढंग से निजीकरण करना 

  • पीपीपी मोड के बावजूद क्षमता बढ़ाने और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को सक्षम करने के लिये कैपेक्स (capex) की आवश्यकता होती है।
  • इस प्रकार, मौजूदा परिचालन और रखरखाव (O & M) आवश्यकताओं की बजाय हवाई अड्डों के भौतिक विकास पर सरकार को अधिक ध्यान देना चाहिये|
  • O & M ज़रूरतों को पीपीपी मोड के माध्यम से हल किया जा सकता है।
  • विदेशों से प्राप्त अनुभव के आधार पर O & M का पूर्ण निजीकरण हमेशा हवाई अड्डे के लिये अच्छा नहीं होता है। इसका उदाहरण लंदन में हीथ्रो हवाई अड्डा है।
  • जयपुर और अहमदाबाद हवाई अड्डे के लिये एएआई द्वारा बार-बार बोली आमंत्रण प्राधिकरण और बोलीदाताओं की अपेक्षाओं के बीच विषमताओं का संकेत देता है।
  • इसलिये यह सुनिश्चित करना महत्त्वपूर्ण है कि उपयोगकर्त्ता निजी प्लेयर और प्राधिकरण के हितों के बीच संतुलन बना रह सके।

4. अंतर्राष्ट्रीयकरण

  • वर्तमान में 38 प्रतिशत यात्री भारत के घरेलू हवाई जहाज़ों से उड़ान भर रहे हैं।
  • 2016 में लागू हुए '0/20' नियम के अनुसार घरेलू हवाई जहाज़ों को विदेश में उड़ान भरने के योग्य होने के लिये 20 विमानों का न्यूनतम बेड़ा आकार रखना अनिवार्य है, जो उड़ान भरने के लिये एक बहुत बड़ा अवसर प्रदान करता है|
  • कम लागत वाले मॉडल, जो इंडिगो और स्पाइसजेट की सफलता की आधारशिला है, भी विदेशों में उड़ान भर रहे हैं।
  • द इकोनॉमिस्ट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि लंदन-न्यूयॉर्क यातायात के पूर्ण-सेवा प्रदान करने वाले जहाज़ों का हिस्सा इस साल 98% से घटकर 90% होने का अनुमान है क्योंकि कम लागत वाले हवाई जहाज़ों पर अधिक संख्या में लोग हवाई यात्रा करते हैं।

5. स्वदेशी तकनीकी क्षमता का निर्माण 

  • वर्तमान में घरेलू जहाज़ों के रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (MRO) का 90 प्रतिशत काम भारत के बाहर किया जाता है।
  • अगले 20 वर्षों में 2,100 भारतीय विमानों की मांग के बोइंग के पूर्वानुमान को देखते हुए भारत में MRO पर महत्त्वपूर्ण लागत प्रतिस्पर्द्धात्मक हो सकती है।
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