दृष्टि ज्यूडिशियरी का पहला फाउंडेशन बैच 11 मार्च से शुरू अभी रजिस्टर करें
ध्यान दें:

डेली अपडेट्स


सामाजिक न्याय

नशीली दवाओं का खतरा

  • 16 Dec 2022
  • 9 min read

प्रिलिम्स के लिये:

ड्रग मेनस, नशा मुक्त भारत अभियान/ड्रग मुक्त भारत अभियान, वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट 2022

मेन्स के लिये:

ड्रग एब्यूज़ की समस्या और संबंधित पहल, वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट 2022

चर्चा में क्यों? 

केरल नशीली दवाओं के खतरे से निपटने के लिये खेलों का उपयोग कर रहा है, जिसके लिये इसके आबकारी विभाग (Excise Department) ने केरल में कॉलेज परिसरों और छात्रावासों के पास क्लब बनाए हैं।

  • छात्रों को खेलों में भाग लेने के लिये प्रेरित करने के अलावा जागरूकता हेतु कक्षाएँ आयोजित की जाती हैं और मादक द्रव्यों के सेवन से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी साझा की जाती है।

भारत में नशीली दवाओं के खतरे की स्थिति:

  • मादक पदार्थों की लत भारत के युवाओं में तेज़ी से फैल रही है।
    • भारत विश्व के दो सबसे बड़े अफीम उत्पादक क्षेत्रों के मध्य में स्थित है जिसके एक तरफ स्वर्णिम त्रिकोण/गोल्डन ट्रायंगल (Golden Triangle) क्षेत्र और दूसरी तरफ स्वर्णिम अर्द्धचंद्र/गोल्डन क्रिसेंट (Golden Crescent) क्षेत्र स्थित है।
      • स्वर्णिम त्रिकोण क्षेत्र में थाईलैंड, म्यांँमार, वियतनाम और लाओस शामिल हैं।
      • स्वर्णिम अर्द्धचंद्र क्षेत्र में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान शामिल हैं।
  • भारत उपयोगकर्त्ताओं के मामले में दुनिया के सबसे बड़े अफीम बाज़ारों में से एक है और संभवत: बढ़ी हुई आपूर्ति के प्रति संवेदनशील होगा।
    • इसका कारण यह है कि अफगानिस्तान में उत्पन्न होने वाले अफीम की तस्करी की तीव्रता पारंपरिक बाल्कन मार्ग के साथ दक्षिण और पश्चिम के अलावा पूर्व की ओर हो सकती है।
  • वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट 2022 के अनुसार, भारत में वर्ष 2020 में 5.2 टन अफीम की चौथी सबसे बड़ी मात्रा ज़ब्त की गई और तीसरी सबसे बड़ी मात्रा में मॉर्फिन (0.7 टन) भी उसी वर्ष ज़ब्त की गई ।
    • भारत वर्ष 2011-2020 में विश्लेषण किये गए 19 प्रमुख डार्कनेट बाज़ारों में बेची जाने वाली ड्रग के शिपमेंट से भी संबंधित है।

नशीली दवाओं के खतरे से निपटने हेतु पहल: 

  • भारत: 
    • नार्को-समन्वय केंद्र: नवंबर 2016 में नार्को-समन्वय केंद्र (Narco-Coordination Centre- NCORD) का गठन किया गया और राज्य में ‘नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो’ की मदद के लिये ‘वित्तीय सहायता योजना’ को पुनर्जीवित किया गया।
    •  ज़ब्ती सूचना प्रबंधन प्रणाली: नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को एक नया सॉफ्टवेयर विकसित करने हेतु धनराशि उपलब्ध कराई गई है, अर्थात् ज़ब्ती सूचना प्रबंधन प्रणाली (Seizure Information Management System- SIMS) ड्रग अपराधों और अपराधियों का ऑनलाइन डेटाबेस तैयार करेगी।
    • राष्ट्रीय ड्रग दुरुपयोग सर्वेक्षण: सरकार एम्स के नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर (National Drug Dependence Treatment Centre) की मदद से सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के माध्यम से भारत में मादक पदार्थों के दुरुपयोग के आकलन हेतु एक राष्ट्रीय ड्रग सर्वेक्षण (National Drug Abuse Survey ) भी कर रही है।
    • 'प्रोजेक्ट सनराइज़: स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा वर्ष 2016 में उत्तर-पूर्वी राज्यों में बढ़ते HIV के प्रसार से निपटने हेतु विशेष रूप से ड्रग्स इंजेक्शन का प्रयोग करने वाले लोगों में इसके प्रयोग को रोकने हेतु  'प्रोजेक्ट सनराइज़' (Project Sunrise) को शुरू किया गया था।
    • द नार्कोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट, (NDPS) 1985: यह किसी भी व्यक्ति द्वारा मादक पदार्थ या साइकोट्रॉपिक पदार्थ के उत्पादन, बिक्री, क्रय, परिवहन, भंडारण और / या उपभोग को प्रतिबंधित करता है।
      • NDPS अधिनियम में वर्ष 1985 से तीन बार (1988, 2001 और 2014 में ) संशोधन किया गया है।
      • यह अधिनियम संपूर्ण भारत में लागू  है तथा  भारत के बाहर सभी भारतीय नागरिकों और भारत में पंजीकृत जहाज़ों एवं विमानों पर भी समान रूप से लागू होता है।
    • सरकार द्वारा ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ (Nasha Mukt Bharat Abhiyan) को शुरू करने की घोषणा की गई है जो सामुदायिक आउटरीच कार्यक्रमों पर केंद्रित है।
  • नशीली दवाओं के खतरे का मुकाबला करने के लिये अंतर्राष्ट्रीय संधियाँ और अभिसमय:

आगे की राह

  • सीमा पार तस्करी पर अंकुश लगाकर NDPS अधिनियम के तहत कठोर दंड या नशीली दवाओं के प्रवर्तन में सुधार कर आपूर्ति को रोकने के लिये कदम उठाए जाने चाहिये तथा भारत को मांग पक्ष को ध्यान में रखकर समस्या का समाधान करना चाहिये।
  • व्यसन को चरित्र दोष के रूप में नहीं बल्कि एक बीमारी के रूप में देखा जाना चाहिये। साथ ही  नशीली दवाओं के सेवन से जुड़े कलंक (Stigma) को समाप्त करने की ज़रूरत है। समाज को यह समझने की भी ज़रूरत है कि नशा करने वाले अपराधी नहीं बल्कि पीड़ित होते हैं।
  • कुछ दवाएँ जिनमें 50% से अधिक अल्कोहल और ओपिओइड होता है, को शामिल करने की आवश्यकता है। देश में नशीली दवाओं की समस्या पर अंकुश लगाने के लिये पुलिस अधिकारियों व आबकारी एवं नारकोटिक्स विभाग (Excise and Narcotics Department) की ओर से सख्त कार्रवाई किये जाने की आवश्यकता है।
  • शिक्षा पाठ्यक्रम में मादक पदार्थों की लत, इसके प्रभाव और नशामुक्ति पर भी अध्याय शामिल होने चाहिये। उचित परामर्श एक अन्य विकल्प हो सकता है।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्षों के प्रश्  

प्रश्न. संसार के दो सबसे बड़े अवैध अफीम उत्पादक राज्यों से भारत की निकटता ने उसकी आंतरिक सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। नशीली दवाओं के अवैध व्यापार एवं बंदूक बेचने, गुपचुप धन विदेश भेजने और मानव तस्करी जैसे अवैध गतिविधियों के बीच कड़ियों को स्पष्ट कीजिये। इन गतिविधियों को रोकने के लिये क्या-क्या उपाय किये जाने चाहिये? (2018)

स्रोत: द हिंदू

close
एसएमएस अलर्ट
Share Page
images-2
images-2