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जैव विविधता और पर्यावरण

वायु गुणवत्ता की निगरानी के लिये डैशबोर्ड

  • 29 Oct 2020
  • 3 min read

प्रिलिम्स के लिये

राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम

मेन्स के लिये

भारत में पर्यावरण प्रदूषण 

चर्चा में क्यों?

मुंबई स्थित एक स्टार्ट-अप ‘रेस्पिरर लिविंग साइंसेज़’ (Respirer Living Sciences) के सहयोग से जलवायु और ऊर्जा संबंधी समाचार वेबसाइट ‘कार्बनकॉपी’ (CarbonCopy) द्वारा स्थापित एक डैशबोर्ड को लॉन्च किया गया जो वर्ष 2016 के बाद से राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम (National Air Quality Monitoring Programme- NAMP) के अंतर्गत आने वाले सभी 122 शहरों के लिये पार्टिकुलेट मैटर (Particulate Matter- PM) की तुलनात्मक तस्वीर प्रस्तुत करता है।

प्रमुख बिंदु:

  • 28 अक्तूबर, 2020 को लॉन्च किया गया यह नया डैशबोर्ड भारत के राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (National Ambient Air Quality Standards- NAAQS) की एक व्यापक तस्वीर प्रदान करता है जो राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम के अंतर्गत आता है।
  • यह डैशबोर्ड वर्ष 2016 से 2018 तक 122 शहरों में PM2.5 और PM10 स्तरों की तीन-वर्षीय परिवर्तनीय औसत प्रवृत्ति के बारे में बताता है।

डैशबोर्ड द्वारा प्रदर्शित मुख्य तथ्य:

  • कुल 122 शहरों में से 59 शहरों में PM2.5 संबंधी डेटा उपलब्ध था। इस संबंध में नोएडा की स्थिति सबसे खराब रही उसके बाद क्रमशः आगरा, दिल्ली, लखनऊ, गाजियाबाद, मुजफ्फरपुर, कानपुर, चंडीगढ़, हावड़ा और कोलकाता का स्थान रहा।
  • तीन वर्ष के PM10 निगरानी डेटा के अनुसार, दिल्ली की स्थिति सबसे खराब रही उसके बाद क्रमशः झारखंड और उत्तर प्रदेश सबसे प्रदूषित राज्य के रूप में सामने आए।
  •  राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम में सूचीबद्ध 23 राज्यों में से केवल तीन राज्य या केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश और पंजाब PM10 निगरानी के संबंध में सभी तीन वर्षों के लिये औसत रीडिंग हेतु ज़िम्मेदार है।
  • रेस्पिरर लिविंग साइंसेज़ के अनुसार, ‘डेटा का विश्लेषण करते समय, प्रत्येक शहर में उपलब्ध मॉनिटरों की संख्या, वर्ष दर वर्ष निगरानी क्षमता में वृद्धि या कमी और मॉनिटर करने के लिये उपलब्ध मानकों की संख्या को देखना महत्त्वपूर्ण है।

स्रोत- इंडियन एक्सप्रेस

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