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जैव विविधता और पर्यावरण

तटीय पर्यावरण

  • 10 Dec 2019
  • 4 min read

प्रीलिम्स के लिये:

गोल्डमैन पर्यावरण पुरस्कार, प्रफुल्ल समंतारा

मेन्स के लिये:

तटीय पर्यावरण तथा उसे संरक्षित करने से संबंधित मुद्दे

चर्चा में क्यों?

गोल्डमैन पर्यावरण पुरस्कार प्राप्तकर्त्ता प्रसिद्ध भारतीय पर्यावरणविद् प्रफुल्ल समंतारा ने पश्चिम बंगाल के दीघा से दक्षिणी ओडिशा के गोपालपुर तक प्रस्तावित तटीय राजमार्ग का विरोध किया है।

मुख्य बिंदु:

  • इस राष्ट्रीय राजमार्ग की लंबाई 415 किमी. है जो कि ओडिशा के तटीय क्षेत्र से होकर गुज़रेगा।
  • अप्रैल 2015 में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 7500 करोड़ रूपए की लागत वाली इस परियोजना की घोषणा की थी।
  • हाल ही में ओडिशा सरकार ने दीघा और सतपदा के बीच 320 किमी. के विस्तार को मंज़ूरी दे दी है परंतु सतपदा से चिल्का झील होते हुए गोपालपुर तक 95 किमी. के राजमार्ग विस्तार को अभी मंज़ूरी नहीं मिली है।
  • पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने भी इस प्रस्तावित राज़मार्ग का अवलोकन किया है क्योंकि यह प्रसिद्ध चिल्का झील तथा अन्य संवेदनशील क्षेत्रों से होकर गुज़रेगा।

प्रफुल्ल समंतारा द्वारा राजमार्ग के विरोध में दिये गए तर्क:

  • प्रफुल्ल समंतारा के अनुसार, यह परियोजना ओडिशा के संवेदनशील तटीय पर्यावरण को खतरे में डाल देगी तथा चिल्का झील एवं भीतरकनिका जैसे प्रमुख जैव विविधताओं वाले क्षेत्र इससे प्रभावित होंगे।
  • यह परियोजना मैंग्रोव वनों को नुकसान पहुँचाएगी तथा समुद्री क्षरण के खतरे को बढ़ावा देगी।
  • मैंग्रोव वन बाढ़ और ज्वार के खिलाफ प्राकृतिक बाधा के रूप में कार्य करते हैं और समुद्र तटों की रक्षा करते हैं।
  • यह तटीय राजमार्ग तटीय क्षेत्र में स्थित लगभग 33% मैंग्रोव वनों को समाप्त कर देगा।
  • पर्यटन तथा अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में इस तटीय राजमार्ग की कोई विशेष भूमिका नहीं होगी क्योंकि ओडिशा से गुज़रने वाला NH-16 भी तट से अधिक दूर नहीं है।

कौन हैं प्रफुल्ल समंतारा?

  • प्रफुल्ल समंतारा एक प्रसिद्ध पर्यवारणविद् हैं जिन्होंने ओडिशा के डोंगरिया कोंड आदिवासियों के भूमि अधिकारों के लिये 12 वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़ी और उनके पूजनीय स्थल नियामगिरी पर्वत को खनन से बचाया।
  • प्रफुल्ल समंतारा ‘ग्रीन नोबेल’ के नाम से लोकप्रिय गोल्डमैन पर्यावरण पुरस्कार जीतने वाले भारत के छठे व्यक्ति हैं। यह पुरस्कार उन्हें एशिया क्षेत्र में पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य करने के लिये वर्ष 2017 में दिया गया था।
  • इससे पहले यह पुरस्कार मेधा पाटकर, एम.सी. मेहता, राशिदा बी और चंपा देवी शुक्ला को संयुक्त रूप से तथा रमेश अग्रवाल को मिल चुका है।

स्रोत- द हिंदू

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