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NSCN(K) निकी समूह के साथ युद्धविराम

  • 09 Sep 2021
  • 8 min read

प्रिलिम्स के लिये: 

नगा शांति प्रक्रिया, कार्बी एंगलोंग समझौता, ब्रू जनजाति

मेन्स के लिये: 

पूर्वोत्तर भारत में संघर्ष के कारण एवं उनके समाधान के प्रयास 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में केंद्र सरकार ने नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड (NSCN-K) निकी ग्रुप के साथ एक वर्ष की अवधि के लिये युद्धविराम समझौता किया है।

  • यह पहल नगा शांति प्रक्रिया के लिये एक महत्त्वपूर्ण कदम है तथा भारत के प्रधानमंत्री के 'उग्रवाद मुक्त, समृद्ध उत्तर पूर्व' के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

प्रमुख बिंदु

  • नगा शांति प्रक्रिया :
    • 1947 में भारत के स्वतंत्र होने के पश्चात् आरंभिक चरण में नगा क्षेत्र असम का हिस्सा बना रहा।
    • 1957 में, नगा नेताओं और भारत सरकार के बीच एक समझौते के बाद, असम के नगा हिल्स क्षेत्र तथा  उत्तर-पूर्व में त्युएनसांग फ्रंटियर डिवीजन को  एक साथ भारत सरकार द्वारा प्रत्यक्ष रूप से प्रशासन की एक इकाई के अंतर्गत लाया गया था।
    • नगालैंड ने वर्ष1963 में राज्य का दर्जा हासिल किया, हालाँकि इसके बाद भी विद्रोही गतिविधियाँ जारी रही।

Naga-Struggle

  • उग्रवाद मुक्त समृद्ध पूर्वोत्तर  का दृष्टिकोण (विज़न) 
    • यह माना जाता हैं कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से पूर्वोत्तर राज्य देश के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। 
    • इसलिये इसका उद्देश्य 2022 तक पूर्वोत्तर में सभी प्रकार के विवादों को समाप्त करना तथा वर्ष 2023 में पूर्वोत्तर में शांति और विकास के एक नए युग की शुरुआत करना है।
    • इसके तहत सरकार पूर्वोत्तर की गरिमा, संस्कृति, भाषा, साहित्य और संगीत को समृद्ध कर रही है।
    • हालिया वर्षों में सरकार ने पूर्वोत्तर भारत में सैन्य संगठनों के साथ कई शांति समझौतों पर भी हस्ताक्षर किये हैं। उदाहरण -
      • कार्बी एंगलोंग समझौता, 2021: इसमें असम के पाँच विद्रोही समूहों, केंद्र और असम की राज्य सरकार के बीच एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किये गए थे।
      • ब्रू समझौता, 2020 : ब्रू समझौते के तहत त्रिपुरा में 6959 ब्रू परिवारों के लिये वित्तीय पैकेज सहित स्थायी बंदोबस्त पर भारत सरकार, त्रिपुरा और मिज़ोरम के बीच ब्रू प्रवासियों के प्रतिनिधियों के साथ सहमति व्यक्त की गई है।
      • बोडो शांति समझौता, 2020 : 2020 में भारत सरकार, असम सरकार और बोडो समूहों के प्रतिनिधियों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किये, जिसमें असम में बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन (Bodoland Territorial Region-BTR) को अधिक स्वायत्तता प्रदान की गई।  
      • NSCN(NK), NSCN (R), और NSCN (K)-खांगो, NSCN (IM) जैसे नगा विद्रोह में शामिल विभिन्न सैन्य संगठनों के साथ शांति समझौता।

पूर्वोत्तर भारत में संघर्ष:

Assam

  • संघर्षों की प्रकृति:
    • राष्ट्रीय स्तर के संघर्ष: इसमें एक अलग राष्ट्र के रूप में एक विशिष्ट 'मातृभूमि' की अवधारणा को शामिल है।
      • नगालैंड: नगा विद्रोह, स्वतंत्रता की मांग के साथ शुरू हुआ। 
        • यद्यपि स्वतंत्रता की मांग काफी हद तक कम हो गई है, लेकिन 'ग्रेटर नगालैंड' या 'नगालिम' की मांग सहित अंतिम राजनीतिक समझौते का मुद्दा अभी भी जीवंत बना हुआ है।
    • जातीय संघर्ष: इसमें प्रभावशाली जनजातीय समूह की राजनीतिक और सांस्कृतिक प्रभाविता के खिलाफ संख्यात्मक रूप से छोटे और कम प्रभावशाली जनजातीय समूहों के दावे को शामिल करना शामिल है।
      • त्रिपुरा: वर्ष 1947 के बाद से राज्य की जनसांख्यिकीय रूपरेखा में काफी परिवर्तन हुआ है यह परिवर्तन मुख्य रूप से तब हुआ जब नवगठित पूर्वी पाकिस्तान से बड़े पैमाने पर लोगों का पलायन हुआ और इसने त्रिपुरा को आदिवासी बहुमत वाले क्षेत्र से बंगाली भाषी लोगों के बहुमत वाले क्षेत्र में बदल दिया।
        • आदिवासियों को मामूली कीमतों पर उनकी कृषि भूमि से वंचित कर दिया गया तथा उन्हें वन भूमियों की ओर भेज दिया गया।
        • इसके परिणामस्वरुप तनाव व्यापक हिंसा और उग्रवाद की स्थिति पैदा हुई।
    • उप-क्षेत्रीय संघर्ष:  उप-क्षेत्रीय संघर्ष में ऐसे आंदोलनों को शामिल किया जाता है जो उप-क्षेत्रीय आकांक्षाओं को मान्यता देने को प्रेरित करते हैं और प्रायः राज्य सरकारों या यहाँ तक ​​कि स्वायत्त परिषदों के साथ सीधे संघर्ष में व्याप्त हो जाते हैं।
      • मिज़ोरम: हिंसक विद्रोह के अपने इतिहास और उसके बाद शांति की ओर लौटने वाला यह राज्य अन्य सभी हिंसा प्रभावित राज्यों के लिये एक उदाहरण है।
        • वर्ष 1986 में केंद्र सरकार और मिज़ो नेशनल फ्रंट के बीच 'मिज़ो शांति समझौते' और अगले वर्ष राज्य का दर्जा दिये जाने के बाद मिज़ोरम में पूर्ण शांति और सद्भाव कायम है।
      • इसके अलावा मिज़ोरम के गठन के समय से ही असम और मिज़ोरम के बीच सीमा विवाद व्याप्त है।
    • अन्य कारण: प्रायोजित आतंकवाद, सीमापार से प्रवासियों की निरंतर आवाजाही के परिणामस्वरूप उत्पन्न संघर्ष, महत्त्वपूर्ण आर्थिक संसाधनों पर नियंत्रण को और मज़बूत करने के उद्देश्य के परिणामतः  आपराधिक स्थितियाँ बन गई हैं।
      • असम: राज्य में प्रमुख जातीय संघर्ष 'विदेशियों' की आवाजाही के कारण है यहाँ विदेशियों से तात्पर्य सीमा पार ( बांग्लादेश) से असमिया से काफी अलग भाषा और संस्कृति वाले लोगों से है।
  • संघर्ष समाधान के तरीके:
    • सुरक्षा बलों/पुलिस कार्रवाई' को मज़बूत करना।
    • राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची, संविधान के भाग XXI के तहत विशेष प्रावधान जैसे तंत्र के माध्यम से अधिक स्थानीय स्वायत्तता।
    • उग्रवादी संगठनों से बातचीत।
    • विशेष आर्थिक पैकेज सहित विकास गतिविधियाँ।

स्रोत : इंडियन एक्सप्रेस

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