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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

काउंटरिंग अमेरिकाज़ एडवर्सरज़ थ्रू सेंक्शंस एक्ट (CAATSA)

  • 16 Jul 2022
  • 10 min read

प्रिलिम्स के लिये:

CAATSA, S-400 मिसाइल प्रणाली

मेन्स के लिये:

भारत के लिये CAATSA छूट के निहितार्थ, अमेरिका-भारत संबंध, रूस-भारत संबंध।

चर्चा में क्यों?

हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रेज़ेंटेटिव ने नेशनल डिफेंस ऑथराइज़ेशन एक्ट (NDAA) में संशोधन को मंज़ूरी दी है, जिसमें काउंटरिंग अमेरिकाज़ एडवर्सरज़ थ्रू सेंक्शंस एक्ट (CAATSA) के तहत भारत को प्रतिबंधों के दायरे से बाहर रखने का प्रस्ताव किया गया है।

  • यह भारत को स्वतंत्र रूप से अमेरिकी प्रतिबंधों के भय के बिना रूस की S-400 मिसाइल प्रणाल को खरीदने की अनुमति देगा।
  • नेशनल डिफेंस ऑथराइज़ेशन (NDAA) कानून है जिसे कॉन्ग्रेस प्रत्येक वर्ष संयुक्त राज्य की रक्षा एजेंसियों की नीतियों और संगठन में बदलाव करने के लिये पारित करती है तथा इस पर मार्गदर्शन प्रदान करती है कि सैन्य क्षेत्र को आवंटित राशि को कैसे खर्च किया जा सकता है।

प्रस्तावित संशोधन:

  • संशोधन अमेरिकी प्रशासन से आग्रह करता है कि वह चीन जैसे हमलावरों को रोकने में मदद करने हेतु भारत को काउंटरिंग अमेरिकाज़ एडवर्सरीज़ थ्रू सेंक्शंस एक्ट (CAATSA) के तहत छूट प्रदान करने के लिये अपने अधिकार का उपयोग करे।
  • कानून में कहा गया है कि महत्त्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों पर संयुक्त राज्य अमेरिका-भारत पहल (ICET) कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम कंप्यूटिंग, जैव प्रौद्योगिकी, एयरोस्पेस तथा अर्द्धचालक विनिर्माण में नवीनतम प्रगति को संबोधित करने के लिये दोनों देशों में सरकारों, शिक्षाविदों एवं उद्योगों के बीच घनिष्ठ साझेदारी विकसित करने हेतु एक स्वागत योग्य और आवश्यक कदम है।

CAATSA

  • परिचय:
    • अमेरिकी कानून:
      • CAATSA एक अमेरिकी कानून है जिसे वर्ष 2017 में लागू किया गया था तथा इसका मुख्य उद्देश्य दंडनीय उपायों के माध्यम से ईरान, रूस और उत्तर कोरिया की आक्रामकता का सामना करना है।
      • अका शीर्षक II मुख्य रूप से यूक्रेन में इसके सैन्य हस्तक्षेप और वर्ष 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में इसके कथित हस्तक्षेप की पृष्ठभूमि में इसके तेल और गैस उद्योग, रक्षा एवं सुरक्षा क्षेत्र, वित्तीय संस्थानों जैसे रूसी हितों पर प्रतिबंधों से संबंधित है।
      • अधिनियम की धारा 231 अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी रक्षा और खुफिया क्षेत्रों के साथ "महत्त्वपूर्ण लेन-देन" में लगे व्यक्तियों पर अधिनियम की धारा 235 में उल्लिखित 12 सूचीबद्ध प्रतिबंधों में से कम-से-कम पाँच प्रतिबंधो को आरोपित  करने का अधिकार देती है।
        • अधिनियम की धारा 231 के भाग के रूप में अमेरिकी विदेश विभाग ने 39 रूसी संस्थाओं को अधिसूचित किया है, जिनके साथ संबंध रखने पर तीसरे पक्ष को प्रतिबंधों के लिये उत्तरदायी बनाया जा सकता है।
    • प्रतिबंध जो भारत को प्रभावित कर सकते हैं: केवल दो प्रतिबंध ऐसे हैं जो भारत-रूस संबंधों या भारत-अमेरिका संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं।
      • बैंकिंग लेन-देन का निषेध: इनमें से पहला, जिसका भारत-रूस संबंधों पर प्रभाव पड़ने की संभावना है, "बैंकिंग लेन-देन का निषेध" है।
        • इसका परिणाम यह होगा कि भारत के लिये एस-400 सिस्टम की खरीद हेतु रूस को अमेरिकी डॉलर में भुगतान करने में कठिनाई होगी। यह भारत की स्पेयर पार्ट्स, घटकों, कच्चे माल और अन्य सेवाओं की खरीद को भी प्रभावित करेगा।
        • वर्ष 2020 में तुर्की को S-400 प्रणाली की खरीद के लिये मंज़ूरी प्रदान की गई थी।
      • निर्यात मंज़ूरी:
        • "निर्यात मंज़ूरी " प्रतिबंध के संदर्भ में देखा जाए तो इसमें भारत-अमेरिका सामरिक और रक्षा साझेदारी के पूरी तरह से पटरी से उतरने की आशंका है, क्योंकि यह अमेरिका द्वारा नियंत्रित किसी भी वस्तु के लाइसेंस एवं निर्यात को अस्वीकार कर देगा।
    • छूट मानदंड:
      • अमेरिकी राष्ट्रपति को वर्ष 2018 में ‘केस-बाइ-केस’ आधार पर CAATSA प्रतिबंधों को माफ करने का अधिकार दिया गया।

रूस की S-400 ट्रायम्फ मिसाइल प्रणाली:

  • परिचय:
    • यह रूस द्वारा डिज़ाइन किया गया एक मोबाइल, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली (SAM) है।
    • यह दुनिया में सबसे खतरनाक परिचालन हेतु तैनात ‘मॉडर्न लॉन्ग-रेंज एसएएम’ (MLR SAM) है, जिसे अमेरिका द्वारा विकसित टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस’ सिस्टम (THAAD) से काफी उन्नत माना जाता है।
    • यह एक मल्टीफंक्शन रडार, ऑटोनॉमस डिटेक्शन एंड टारगेटिंग सिस्टम, एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम, लॉन्चर और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को एकीकृत करता है।
    • यह सतही रक्षा के लिये तीन तरह की मिसाइल दागने में सक्षम है।
    • यह प्रणाली 30 किमी. तक की ऊँचाई पर 400 किमी. की सीमा के भीतर विमान, मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी) और बैलिस्टिक तथा क्रूज़ मिसाइलों सहित सभी प्रकार के हवाई लक्ष्यों को निशाना बना सकती है।
    • यह प्रणाली 100 हवाई लक्ष्यों को ट्रैक कर सकती है और उनमें से छह पर एक साथ निशाना लगा सकती है।
  • भारत के लिये महत्त्व:
    • भारत के दृष्टिकोण से चीन भी रूस से रक्षा उपकरण खरीद रहा है। वर्ष 2015 में चीन ने रूस के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किये। और इसे  जनवरी 2018 में शुरू किया गया था।
    • चीन द्वारा S-400 प्रणाली के अधिग्रहण को इस क्षेत्र में "गेम चेंजर" के रूप में देखा गया है। हालाँकि भारत के खिलाफ इसकी प्रभावशीलता सीमित है।
    • इसका अधिग्रहण दो मोर्चों पर युद्ध में हमलों का मुकाबला करने के लिये महत्त्वपूर्ण है, यहाँ तक कि इसमें उच्च स्तरीय एफ-35 यूएस लड़ाकू विमान भी शामिल है।

भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर CAATSA छूट:

  • NDAA संशोधन ने अमेरिका से रूस निर्मित हथियारों पर अपनी निर्भरता से भारत की धुरी को दूर करने में सहायता के लिये और कदम उठाने का भी आग्रह किया।
  • यह संशोधन हाल के द्विपक्षीय सामरिक संबंधों की अवधि के अनुरूप है।
    • महत्त्वपूर्ण वर्ष 2008 था और तब से भारत के साथ अमेरिकी रक्षा अनुबंध कम-से-कम 20 बिलियन अमेरिकी डाॅलर तक का है। वर्ष 2008 से पहले की अवधि में यह केवल 500 मिलियन अमेरिकी डाॅलर था।
    • इसके अलावा वर्ष 2016 में अमेरिका ने भारत को प्रमुख रक्षा भागीदार के रूप में मान्यता दी। क्वाड और अब I2U2 जैसे समूहों के माध्यम से रणनीतिक संबंधों को भी मज़बूत किया गया है।
  • भारत के लिये रूसी मंचों से दूर जाना उसके सामरिक हित में है।
    • यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद चीन पर रूस की निर्भरता काफी बढ़ गई है, एक ऐसी स्थिति जिसमें भविष्य में बदलाव की संभावना नहीं है।
    • पहले से ही रूस के हथियारों के निर्यात के दूसरे सबसे बड़े प्राप्तकर्त्ता के रूप में चीन भारत के बाद दूसरे स्थान पर है।
    • चीन के साथ भारत के लंबे समय से चले आ रहे सीमा प्रबंधन प्रोटोकॉल को देखते हुए रूसी हथियारों पर निर्भरता नासमझी है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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