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एस-400 ट्रायम्फ मिसाइल प्रणाली

  • 22 Jan 2021
  • 8 min read

चर्चा में क्यों? 

 ‘एस-400 ट्रायम्फ मिसाइल रक्षा प्रणाली’ के प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होने के लिये भारतीय सैन्य विशेषज्ञों का पहला समूह जल्द ही मास्को (रूस) जाएगा।

Russia

प्रमुख बिंदु: 

पृष्ठभूमि:  

  • अमेरिका की आपत्तियों और CAATSA (Countering America’s Adversaries Through Sanctions Act) के तहत प्रतिबंधों के खतरे के बावजूद अक्तूबर 2018 में भारत ने रूस के साथ ‘एस-400 ट्रायम्फ मिसाइल प्रणाली’ के लिये  5.43 बिलियन अमेरिकी डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किये।

एस-400 ट्रायम्फ मिसाइल प्रणाली:

  • एस-400 ट्रायम्फ रूस द्वारा डिज़ाइन की गई एक गतिशील (Mobile) और सतह से हवा में मार करने वाली (Surface-to-Air Missile System- SAM) मिसाइल प्रणाली है। यह विश्व में लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने में सक्षम (Modern Long-Range SAM- MLR SAM) परिचालन के लिये तैनात सबसे खतरनाक आधुनिक मिसाइल प्रणाली है, जिसे अमेरिका द्वारा विकसित ‘टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस सिस्टम’ (THAAD) से भी बेहतर माना जाता है। I 
  • यह प्रणाली 30 किमी. तक की ऊँचाई पर 400 किमी. की सीमा के भीतर विमान, मानव रहित हवाई वाहन (UAV) और बैलिस्टिक तथा क्रूज मिसाइलों सहित सभी प्रकार के हवाई लक्ष्यों को भेद सकती है।
  • यह प्रणाली एक साथ 100 हवाई लक्ष्यों को ट्रैक कर सकती है और उनमें से छह को एक साथ लक्षित कर सकती है।

भारत के लिये महत्त्व:  

  • चीन भी इस प्रणाली को खरीद रहा है, चीन ने इस प्रणाली की छह यूनिट की खरीद के लिये वर्ष 2015 में रूस के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किये थे, इसकी डिलीवरी जनवरी 2018 में शुरू हुई थी।
    • चीन द्वारा एस-400 प्रणाली का अधिग्रहण किया जाना इस क्षेत्र में एक ‘गेम-चेंजर’ के रूप में देखा जा रहा है। हालाँकि भारत के खिलाफ इसकी प्रभावशीलता बहुत ही सीमित है। 
  • भारत के लिये F-35 जैसे उन्नत कोटि के लड़ाकू विमानों का मुकाबला करने सहित दो मोर्चों (चीन और पाकिस्तान के संदर्भ में) पर युद्ध की चुनौतियों से निपटने हेतु इस प्रणाली को प्राप्त करना बहुत ही महत्त्वपूर्ण है।   

भारत-रूस रक्षा सहयोग: 

महत्त्वपूर्ण स्तंभ:

  • रक्षा सहयोग, भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी का एक महत्त्वपूर्ण स्तंभ है।

नियमित बैठकें:

  • भारत और रूस के रक्षा मंत्री दोनों देशों के बीच सक्रिय परियोजनाओं की समीक्षा करने तथा अन्य सैन्य तकनीकी सहयोग के मुद्दों पर चर्चा के लिये वार्षिक रूप से बारी-बारी रूस तथा भारत में बैठक करते हैं। 
  • वर्ष 2008 में  केंद्रीय रक्षा मंत्रालय (भारत) के रक्षा सचिव और रूस के 'सैन्य तकनीकी सहयोग हेतु संघीय सेवा निदेशक' (FSMTC) की सह-अध्यक्षता में  ‘उच्च स्तरीय निगरानी समिति’ (HLMC) की स्थापना की गई थी।

संबंधों में गिरावट:

  • शीत युद्ध के बाद के समय में भारत और रूस के आर्थिक संबंधों में गिरावट देखने को मिली और हाल के वर्षों में अमेरिका, भारत के लिये शीर्ष हथियार आपूर्तिकर्त्ता के रूप में उभरा जिसने रूस को हथियार आपूर्तिकर्त्ता के रूप में दूसरे स्थान (2011-13 के आँकड़ों के आधार पर) पर धकेल दिया।

वर्तमान स्थिति:

  • वर्ष 2013-14 में रक्षा खरीद में आई गिरावट में सुधार कर लिया गया है और CAATSA के तहत प्रतिबंधों के भय के बावजूद ‘एस-400 हवाई रक्षा मिसाइल प्रणाली’ जैसे महत्त्वपूर्ण सौदे की शुरुआत की गई।  
  • हाल के वर्षों में भारत द्वारा इज़राइल, अमेरिका और फ्राँस के साथ अनुबंधों के माध्यम से अपनी रक्षा आपूर्ति को विकेंद्रीकृत करने का प्रयास किया जा रहा है, परंतु रूस अभी भी एक प्रमुख आपूर्तिकर्त्ता बना हुआ है। इसे दोनों देशों के बीच हुए हालिया घटनाक्रमों के आधार पर समझा जा सकता है: 
    • भारत ने रूस से 2.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर की लागत वाले मिग 29 और सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों के अधिग्रहण के प्रस्तावों को मंज़ूरी दी है।
    • दोनों पक्ष सफलतापूर्वक AK-203 राइफल और 200 केए-226टी (Ka-226T) यूटिलिटी हेलीकॉप्टरों की आपूर्ति से जुड़े अनुबंध के कार्यान्वयन की ओर बढ़ रहे हैं।
  • स्टिम्सन सेंटर द्वारा प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, वर्तमान में भारतीय सैन्य सेवा में 86% उपकरण, हथियार और प्लेटफॉर्म रूसी मूल के हैं।

आयात से लेकर संयुक्त उत्पादन तक: 

  • समय के साथ दोनों देशों के बीच सैन्य तकनीकी क्षेत्र का सहयोग विशुद्ध रूप से खरीदार-विक्रेता संबंध से आगे बढ़ते हुए उन्नत कोटि के सैन्य प्लेटफाॅर्मों के संयुक्त अनुसंधान, डिज़ाइन, विकास और उत्पादन के रूप में विकसित हुआ है।

साझा सैन्य अभ्यास:

  • युद्धाभ्यास इंद्र, भारत और रूस की सेनाओं के बीच आयोजित किया जाने वाला एक संयुक्त त्रि-सेवा अभ्यास है।

भारत में रूसी मूल के सैन्य उपकरणों की तैनाती: 

  • नौसेना: 
    • भारतीय नौसेना का एकमात्र सक्रिय विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य रूस से लिया गया है। परमाणु सक्षम पनडुब्बी चक्र-II भी रूस से ली गई है।
  • थल सेना:
    • भारतीय सेना के टी-90 और टी-72 मुख्य युद्धक टैंक रूसी मूल के हैं
  • वायु सेना:
    • भारतीय वायु सेना का सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान भी रूस से खरीदा गया है

स्रोत- द हिंदू

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