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भारतीय अर्थव्यवस्था

रुपए को बचाने के लिये एनआरआई बॉण्ड जारी करने का विकल्प

  • 20 Sep 2018
  • 4 min read

चर्चा में क्यों?

विगत कुछ समय से जारी रुपए के मूल्य में तेज गिरावट से इस अनुमान को बल मिला है कि भारतीय रिज़र्व बैंक देश में डॉलर के निवेश को आकर्षित करने में मदद के लिये 30-35 अरब डॉलर के एनआरआई बॉण्ड जारी करने का विकल्प चुन सकता है।

प्रमुख बिंदु

  • इस बॉण्ड को जारी करने का उद्देश्य भारतीय मुद्रा को मज़बूती प्रदान करने के लिये अनिवासी भारतीयों से धन एकत्र करना है।
  • इस वर्ष की शुरुआत के बाद से रुपए में 7% की गिरावट दो कारणों से हुई है। एक तरफ, भारत के पूंजी बाज़ारों से पूंजी बाहर जा रही है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने वर्ष की पहली छमाही में 47,836 करोड़ रुपए भारतीय पूंजी बाज़ार से निकाल लिये जो कि पिछले 10 वर्षों के दौरान सर्वाधिक है।
  • दूसरी तरफ, भारतीय निर्यातों की मांग में कमी आई है, जबकि कच्चे तेल जैसी वस्तुओं के आयात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस वर्ष जुलाई माह में भारत का चालू खाता घाटा पाँच वर्ष के उच्चतम स्तर पर पहुँच गया।
  • इन दोनों कारकों के संयुक्त प्रभाव ने डॉलर की मांग में वृद्धि की है, इस प्रकार रुपए के मूल्य में गिरावट आई है।

क्या यह बॉण्ड रुपए को बचा सकता है?

  • एनआरआई बॉण्ड सैद्धांतिक रूप से रुपए की मांग में वृद्धि करने और डॉलर के मुकाबले अपने मूल्य को स्थिर करने में मदद कर सकते हैं।
  • हालाँकि, रुपए पर इन बॉण्ड्स का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि वे अनिवासी भारतीयों के लिये कितने आकर्षक हैं। वर्ष 2013 में जब यू.एस. फेडरल रिज़र्व के अपने बॉण्ड-खरीद कार्यक्रम को कम करने के फैसले के बाद रुपए में केवल चार महीने में 25% की गिरावट देखी गई, तो भारतीय रिज़र्व बैंक 30 बिलियन डॉलर से अधिक विदेशी पूंजी इकट्ठा करने में सक्षम रहा।
  • उल्लेखनीय है कि रुपए की गिरावट को रोकने में मदद के लिये वर्ष 1998 और वर्ष 2000 में भी एनआरआई बॉण्ड जारी किये गए थे। हालाँकि ये बॉण्ड अर्थव्यवस्था में पूंजी प्रवाह को प्रोत्साहित करके रुपए को अस्थायी रूप से सहायता प्रदान कर सकते हैं, लेकिन वे उन मूल आर्थिक मुद्दों का समाधान नहीं कर सकते हैं जो रुपए के पतन का वास्तविक कारण हैं।
  • जब तक आरबीआई घरेलू मुद्रास्फीति पर लगाम नहीं लगाता और सरकार निर्यात को बढ़ावा देने तथा आयात को रोकने के लिये कदम नहीं उठाती है, तब तक एनआरआई बॉण्ड जारी करने जैसे आपातकालीन उपाय रुपए को केवल अस्थायी राहत ही प्रदान कर सकते हैं।

एनआरआई बॉण्ड क्या है?

  • ये भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा अनिवासी भारतीयों को जारी किये गए बॉण्ड हैं जो भारत में अपना पैसा निवेश करने में रुचि रखते हैं।
  • चूँकि ये बॉण्ड अन्य समान निवेशों की तुलना में अधिक रिटर्न देते हैं, इसलिये इन्हें उस समय के दौरान पूंजी आकर्षित करने के लिये एक उपकरण के रूप में उपयोग किया जा सकता है जब अन्य घरेलू संपत्तियाँ विदेशी निवेशकों की रुचि को आकर्षित करने में विफल रहती हैं।
  • कई निवेशक इन्हें एक सुरक्षित निवेश के रूप में देखते हैं क्योंकि ये बॉण्ड भारतीय केंद्रीय बैंक द्वारा जारी किये जाते हैं।
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