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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

ब्लू डॉट नेटवर्क

  • 04 Feb 2020
  • 5 min read

प्रीलिम्स के लिये:

ब्लू डॉट नेटवर्क

मेन्स के लिये:

ब्लू डॉट नेटवर्क और भारत

चर्चा में क्यों?

संयुक्त राज्य अमेरिका के नेतृत्व वाले ब्लू डॉट नेटवर्क (Blue Dot Network- BDN) में भारत के शामिल होने की संभावना है।

मुख्य बिंदु:

  • BDN की औपचारिक घोषणा 4 नवंबर, 2019 को थाईलैंड के बैंकॉक में इंडो-पैसिफिक बिज़नेस फोरम (Indo-Pacific Business Forum) में की गई थी।
  • इसका नेतृत्व जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका भी करेगा।

क्या है ब्लू डॉट नेटवर्क?

  • यह वैश्विक अवसंरचना विकास हेतु उच्च-गुणवत्ता एवं विश्वसनीय मानकों को बढ़ावा देने के लिये सरकारों, निजी क्षेत्र और नागरिक समाज को एक साथ लाने की एक बहु-हितधारक पहल है।
  • यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर ध्यान देने के साथ-साथ यह विश्व स्तर पर सड़क, बंदरगाह एवं पुलों के लिये मान्यता प्राप्त मूल्यांकन और प्रमाणन प्रणाली के रूप में काम करेगा।
    • इसके तहत अवसंरचनात्मक परियोजनाओं को ऋण, पर्यावरण मानकों, श्रम मानकों आदि के आधार पर वर्गीकृत किया जाएगा।
    • यह प्रणाली किसी भी लोकतांत्रिक देश की उन परियोजनाओं पर लागू होगी जहाँ नागरिक ऐसी परियोजनाओं का मूल्यांकन करना चाहते हैं।
  • विश्व स्तर पर BDN प्रमुख बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के लिये मान्यता प्राप्त स्वीकृति के तौर पर काम करेगा जिसका उद्देश्य लोगों को यह बताना कि परियोजनाएँ टिकाऊ हैं न कि शोषणकारी।
  • इसे चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (Belt and Road Initiative- BRI) को काउंटर करने के रूप में देखा जा रहा है। हालाँकि BRI के विपरीत BDN किसी परियोजना के लिये सार्वजनिक ऋण की पेशकश नहीं करेगा।
  • गौरतलब है कि भारत, चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) में शामिल नहीं है।

बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI):

  • BRI एशिया, यूरोप तथा अफ्रीका के बीच भूमि और समुद्र क्षेत्र में कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिये चीन द्वारा संचालित परियोजनाओं का एक सेट है।
  • इस परियोजना की परिकल्पना वर्ष 2013 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने की थी। हालाँकि चीन इस बात से इनकार करता है किंतु इसका प्रमुख उद्देश्य चीन द्वारा वैश्विक स्तर पर अपना भू-राजनीतिक प्रभुत्व कायम करना है।
  • BRI पहल चीन द्वारा प्रस्तावित एक महत्त्वाकांक्षी आधारभूत ढाँचा विकास एवं संपर्क परियोजना है जिसका लक्ष्य चीन को सड़क, रेल एवं जलमार्गों के माध्यम से यूरोप, अफ्रीका और एशिया से जोड़ना है।
  • BRI को 'सिल्क रोड इकोनॉमिक बेल्ट’ और 21वीं सदी की सामुद्रिक सिल्क रोड के रूप में भी जाना जाता है।
  • विश्व की 70% जनसंख्या तथा 75% ज्ञात ऊर्जा भंडारों को समेटने वाली यह परियोजना चीन के उत्पादन केंद्रों को वैश्विक बाज़ारों एवं प्राकृतिक संसाधन केंद्रों से जोड़ेगी।
  • BRI के तहत पहला रूट जिसे चीन से शुरू कर रूस और ईरान होते हुए इराक तक ले जाने की योजना है, जबकि इस योजना के तहत दूसरा रूट पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से श्रीलंका और इंडोनेशिया होकर इराक तक ले जाया जाना है।
  • BRI वास्तव में चीन द्वारा परियोजना निर्यात करने का माध्यम है जिसके ज़रिये वह अपने विशाल विदेशी मुद्रा भंडार का प्रयोग बंदरगाहों के विकास, औद्योगिक केंद्रों एवं विशेष आर्थिक क्षेत्रों के विकास के लिये कर वैश्विक शक्ति के रूप में उभरना चाहता है।

स्रोत- द हिंदू

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